संसद में राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर गोल गोल बात क्यों की?

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उमंग कुमार/

सरकार की चतुराई को समझने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं मिलेगा. सोलवहीं लोकसभा भंग होने वाली है और सरकार अपने कार्य का लेखा जोखा दे रही है. इस लोकसभा के आखिरी संसद सत्र की शुरुआत में जब राष्ट्रपति संसद को संबोधित कर रहे थे तो वे सरकार की तमाम उपलब्धियों का आंकड़ा लेकर बैठे थे. वैसे, यह हर सरकार में होता है क्योंकि राष्ट्रपति को वही बोलना होता है जो सरकार लिखकर उन्हें देती है.

खैर, इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के सामने मोदी सरकार की उपलब्धियों में कई बीमा योजनाओं के आंकड़े गिना डाले. जैसे, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना. राष्ट्रपति ने बताया कि इन योजनाओं के तहत 21 करोड़ गरीब परिवारों को बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है. ऐसे अन्य उदाहरण भी हैं. जैसे राष्ट्रपति ने स्वास्थ्य बीमा के बारे में बताया कि महज चार महीने में इस योजना से 10 लाख से ज्यादा गरीबों को फायदा हुआ है.

पर जब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बात आई तो वे यह कहकर निकल लिए कि इस योजना के तहत किसानों को सस्ते दर पर फसल बीमा योजना उपलब्ध कराई जा रही है. इसके आंकड़े नहीं दिए. क्यों? आईये बताते हैं.

मोदी सरकार के आने के पहले भी फसल बीमा करने के लिए योजना थी. नई सरकार बनने के बाद 2016 में  इस स्कीम को बदल कर नई योजना लाई गई जिसका नाम रखा गया प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना. सरकार ने दावा किया कि इस नई योजना में पुरानी  सारी अच्छी चीज़ें रखी गयीं हैं और इसके साथ ढेर सारी नई चीजें जोड़ी गयी हैं.

इस योजना को लांच करते हुए मोदी ने पुरानी योजना को यह कहकर खारिज किया कि किसानों को उसमें भरोसा नहीं है और इसलिए कम किसान उसमें भाग लेते हैं.

लेकिन इस योजना के साथ भी वही हुआ. पहले साल के बाद इसमें भी किसानों का पंजीकरण घटा है. सरकारी आंकड़े के अनुसार इस योजना में 2016-17 में जहां 5.7 करोड़ किसान पंजीकृत हुए थे वहीँ इसके अगले साल इनकी संख्या घटकर 5.2 करोड़ हो गई.

यही वजह है कि सरकार ने राष्ट्रपति के भाषण में इस योजना के आंकड़े नहीं दिए. इस बात को लेकर सरकार इतनी बैकफुट पर है कि इसने 2018 के खरीफ का आंकड़ा ही जारी नहीं किया. बाद में एक आरटीआई से पता चला कि 2017 के मुकाबले करीब दस प्रतिशत कम किसान 2018 में पंजीकृत हुए हैं.

सरकार की इस बड़ी योजना के हालत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2016-17 में इस योजना पर सरकार और किसानों की कुल लागत 22,550 करोड़ रुपये आई. इसमें 19 प्रतिशत किसानों की जेब से गया और कुल क्लेम महज 15,350 करोड़ रूपया था.

यह भी बताते चलें कि कृषि पर काम करने वाले जाने माने पत्रकार पी साईंनाथ ने कहा था कि फसल बीमा योजना, रफाल से भी बड़ा घोटाला है.

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