कुलपति चला रहे बयानों से काम, हजार छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

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सौतुक डेस्क/

एक तरफ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का प्रशासन आन्दोलन और उसके बाद हुई हिंसा के लिए बाहरी छात्रों को दोषी बताता रहा तो दूसरी तरफ सोमवार को विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले करीब हजार छात्रों पर एफआईआर भी दर्ज करा दिया है. इसके साथ ही लंका पुलिस थाना के कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है.

घटना के शुरुआत से ही विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ‘उपद्रव की घटना बाहरी लोगों की देन है’ जैसे बयान के ओट में छिपे रहे. उन्होंने सबकुछ बोल दिया लेकिन उनकी तरफ से यह बयान कभी नहीं आया कि लड़कियों की मांग में नाजायज क्या है और वो उस मांग को मानने में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखा रहे हैं.

कुलपति ने समय पर लड़कियों के सुरक्षा सम्बंधित मांग मान ली रहती तो शायद विश्वविद्यालय की बदनामी नहीं होती. इन लड़कियों की मांग भारत के हर एक परिवार की मांग होगी जिनके घरों की लड़किया बाहर पढ़ने गई हैं. ऐसे में इन मांगो के प्रति कुलपति का रवैया समझ से परे है.

ऐसा प्रतीत होता है कि कुलपति ने तय कर लिया है कि वे सिर्फ बयान से काम चलाएंगे. सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर घायल लड़कियों की तस्वीरें साझा की जा रही हैं वही त्रिपाठी ने एनडीटीवी को यह बयान दिया है कि छात्राओं पर कोई लाठी चार्ज नहीं हुआ है.

उधर आ रही खबरों के मुताबिक लंका थाना के एसओ राजीव सिंह को लाइन हाजिर किया गया है. इसके साथ ही भेलूपुर क्षेत्र के सीओ निवेश कटियार और एक एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट को भी हटाया गया है.

छात्र छात्राओं के आन्दोलन का कोई समुचित जवाब न देने की स्थिति में विश्वविद्यालय प्रशासन सीधे सीधे जोर जबरदस्ती पर उतर गया है. महिला महाविद्यालय और त्रिवेणी हॉस्टल की छात्राओं को बिजली और पानी बंद कर जहां उन्हें घर भेजने पर मजबूर किया गया. वैसे भी विश्वविद्यालय में दुर्गापूजा की छुट्टी होने वाली थी जो एनडीटीवी के एक रिपोर्ट के मुताबिक 28 सितम्बर से शुरू होने वाली थी. लेकिन प्रशासन ने इन छात्र-छात्राओं को छुट्टी से पहले ही घर भेजने का फैसला किया.

सनद रहे कि यह विश्वविद्यालय का यह मामला महज इस बात को लेकर शुरू हुआ है कि यहाँ पढ़ने आई छात्राओं के सुरक्षा के मद्देनजर कुछ जरुरी कदम उठाया जाए. छेड़खानी से परेशान यहाँ पढ़ रही छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कुछ मामूली जरुरत जैसे रोडलाईट, सुरक्षाकर्मियों की सचेत तैनाती और सीसीटीवी कैमरा लगाने की मांग कर रही थी. लेकिन विश्वविद्यालय को यह जरुरी मांग भी न जाने क्यों गलत लगी.

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