बीएचयु के इम्तहान में द्वापर युग से आते हैं सवाल

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शिखा कौशिक/

साकी की मोहब्बत में दिल साफ़ हुआ इतना,
जब सर को झुकाता हूँ तो शीशा नज़र आता है.

अलामा इकबाल की ये पंक्तियाँ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में प्रवेश करते ही स्वागत करती हुई मिलती हैं. पूरे पूर्वांचल और बिहार के छात्रों के लिए यह विश्वविद्यालय शिक्षा का केंद्र है जहां से छात्र छात्राएं  इकबाल के इन पंक्तियों को चरितार्थ करने यहाँ पहुंचते हैं.

लेकिन आजकल हर बुरी चीज के लिए चर्चा में आने वाला यह विश्वविद्यालय जाति और धर्म के विघटनकारी मूल्यों का प्रयोगशाला बना हुआ है. जो सबसे नया है वह है सोमवार को राजनीति विज्ञान के सेमेस्टर परीक्षा में पहले साल के छात्रों से पूछे गए सवाल.

इसकी  बानगी देखिये:

  • कौटिल्य के अर्थशास्त्र में जीएसटी की प्रकृति पर एक निबंध लिखिए.
  • मनु भूमंडलीकरण के प्रथम भारतीय चिन्तक हैं. विवेचन कीजिये.
  • महाभारत में राजा के अधिकार और कर्तव्यों का विवेचन कीजिये.

राजनीति विज्ञान के छात्रों से सोमवार को पूछे गए हरेक प्रश्न पर सही उत्तर देने पर 15 अंक प्राप्त होना था. जो सीधा-सीधा राजनितिक आकाओं को खुश करने के लिए तैयार किया गया लगता है.  इन सवालों का पाठ्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है. वहाँ के शिक्षक अपने इस कर्म को अनर्गल प्रलाप करके बचाव करना जरुर जानते हैं पर उन छात्रों के भविष्य का क्या जो ऐसी शिक्षा-दीक्षा लेकर बाज़ार में उतरने वाले हैं.

राजनीति विज्ञान का प्रश्न पत्र

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के अनुसार छात्रों ने स्पष्ट किया है कि यह सब पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है पर जिस प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने यह प्रश्न तैयार किया है उसने अपने बचाव में कहा है कि “मैंने इन दोनों चिंतको के काम की विवेचना की है और कक्षा में पढ़ाया भी है. इसके लिए नए पुराने उदहारण से बच्चों को समझाया गया है. यह मेरा विचार था कि इन सारे मुद्दों से भी बच्चों को परिचित कराया जाए.” क्या हुआ जो यह सब पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है? क्या यह शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है कि बच्चों को नई-नई चीजों से अवगत कराया जाए? उन्होंने कहा.

इस अखबार को छात्रों ने बताया है कि मिश्रा ने कक्षा में इन प्रश्नों के उत्तर भी लिखा दिया था और यह भी बता दिया था कि ये सवाल परीक्षा में आने वाले हैं.

लेकिन मिश्रा जी को शायद यह नहीं मालूम कि बीएचयू से अन्य कॉलेज भी जुड़े हैं जिन छात्रों को वह नहीं पढ़ाते. शायद इसलिए पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है जो छात्रों और समय की जरुरत के मद्देनज़र पाठ्यक्रम तैयार करते हैं.

सनद रहे कि हाल ही में यह विश्वविद्यालय लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और विश्वविद्यालय प्रशासन के गलत रुख के लिए चर्चा में रहा था. कई दिन तक लड़कियों को, छेड़छाड़ करने वाले पर महज एक्शन की मांग के लिए आन्दोलन करना पड़ा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्राओं पर लाठियां भी चलवाईं. सरकार ने कुलपति को छुट्टी पर भेज उस मामले को रफा दफा किया.

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