उत्तर प्रदेश में आधार की सुरक्षा में सेंध

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सौतुक डेस्क/

बावजूद इसके आपके पास कोई रास्ता नहीं है, आप नहीं जा सकते कोर्ट- रीथिंक आधार

एक तरफ जहां सरकार यह दावा करते नहीं थक रही है कि आधार के लिए दिए आंकड़े सुरक्षित रहेंगे, वहीं  बार-बार उनके वादे झूठे साबित हो रहे हैं. इस बार उत्तर प्रदेश में पुलिस  ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनलोगों ने आधार में दिए गए उँगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) का क्लोन बनाकर फर्जी आधार कार्ड बना लिया था.

सितम्बर 11 को उत्तर प्रदेश टास्क फ़ोर्स ने 10 लोगों के इस गैंग का पर्दाफाश किया. ये लोग अधिकारिक तौर पर जुड़े आधार कार्यकर्ताओं के फिंगरप्रिंट्स लेकर खुद को कार्यकर्ता के तौर पर दिखाते थे.

इसके लिए, एक तो इनलोगों ने इन कार्यकर्ताओं के फिंगरप्रिंट की नक़ल ले ली थी. इसके लिए इनलोगों ने फोटोपॉलीमर रेसिन का इस्तेमाल किया था. इसके साथ यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (यूआईडीएआई ) का सॉफ्टवेर भी क्रैक कर लिया था.

मीडिया में आई खबरों के अनुसार, इस गैंग ने ऑपरेटर्स या कहें कार्यकर्ता जो हमलोगों से आधार के लिए तमाम जानकारियाँ  जैसे उँगलियों के निशान, आखों की पुतली वगैरह लेता है,  उनके फिंगरप्रिंट लेने के लिए बटर पेपर का इस्तेमाल किया.

चूँकि जिन ऑपरेटर्स का फिंगरप्रिंट्स लिया गया था वे यूआईडीएआई से जुड़े थे, इससे होनेवाले खतरे का अनुमान लगाया जा सकता है. साथ में इनलोगों ने आखों की पुतली के चेक करने से बचने के लिए  गैरकानूनी तरीके से सॉफ्टवेर वल्नेरेबिलिटी को इस्तेमाल किया. ये सरकार ने अपने उद्देश्य के लिए स्थापित किया है.

आधार का विरोध कर रहे समूह रीथिंक आधार ने कहा कि इस तरीके से कोई व्यक्ति एनरोलमेंट पैकेट वहाँ भेज सकता है जहां सारे आंकड़े इकठ्ठा हो रहे हैं . मतलब आम लोगों के आंकड़े इकठ्ठा कर के आप केंद्रीय स्थान जहां सबके आंकड़े इकट्ठा हो रहा है, वहाँ भेजा जा सकता है.

खबरों के अनुसार ये लोग सॉफ्टवेर और फिन्गेर्प्रिन्ट्स को महज 5,000 रुपये में बेचते थे. इनका इस्तेमाल कर अन्य लोग अवैध पंजीकृत केंद्र चला सकते थे.

पुलिस ने छापे में कागज़ पर 38 क्लोनड फिंगरप्रिंट्स, किसी केमिकल पर 46 क्लोनड प्रिंट्स, 12 मोबाईल फ़ोन, दो आधार फिंगर स्कैनर, दो रेटिना स्कैनर, आठ रबर स्टाम्प, और 18 आधार कार्ड जब्त किया है. जांच अभी चल रही है और पुलिस के अनुसार इनके नेटवर्क में अन्य राज्यों के लोग भी शामिल हो सकते हैं.

इन सबको देखते हुए रीथिंक आधार ने तुरंत आधार पंजीकरण को रोकने और साथ में आधार को अन्य चीजों से जोड़ने, जैसे बैंक खाता इत्यादि, को बंद करने की मांग की है.

यूआईडीएआई को तुरंत उन लोगों को बताना चाहिए जिनके आंकड़े इस गिरोह ने इस्तेमाल किये हैं. साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि पुलिस को ऐसे किसी गिरोह का पता सबसे पहले कब चला. और किन-किन राज्यों में ऐसे होने का संदेह है.

आधार के इस चोरी का क्या मतलब है?– रीथिंक आधार

सरकार लागातार यह दावा करती रही है कि आधार के आंकड़े एकदम सुरक्षित हैं और अब तक के अन्य पहचान पत्र से तो खासकर. क्योंकि इसमें बायोमेट्रिक आंकड़े समाहित हैं. युआडीएआई कहता रहा है कि बस वही एजेंट लोगों को पंजीकृत कर सकते हैं जिनका इस संस्था से अनुबंध है. इस ताजा घटना से यह साबित होता है कि यह व्यस्था फूलप्रूफ तो कत्तई नहीं है और न मालूम कितने फर्जी आधार इनके माध्यम से अब तक बन चुके हैं.

यह स्थिति और डरावनी हो जाती है जब देश में लोगों के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जिसके तहत वो सरकार से अपने आंकड़े चोरी होने के एवज में कोई दावा ठोंक सकें.

आधार एक्ट की धारा 47 (1) के अनुसार,  कोई भी न्यायलय इस एक्ट के तहत हुए अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता जब तक कि यूआईडीएआई या इसके अधिकारी कोई  शिकायत नहीं करते.

इसका मतलब यह हुआ कि यही संस्था आपके आंकड़े इकठ्ठा करेगी, इसकी सुरक्षा करेगी और अगर कुछ गड़बड़ी हुई तो कोर्ट में खुद शिकायत करेगी. इसे अंग्रेजी में कनफ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट कहते हैं.  इसको ऐसे समझे कि अगर कोई गलती हुई तो यह संस्था अपनी गलती के खिलाफ कोर्ट क्यों जायेगी? और इस मामले में नागरिकों के कोर्ट जाने का कोई प्रावधान नहीं है.

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