अब भारतीयों के लिए शराब नहीं खराब?

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उमंग कुमार/

सदियों से शायर और कवि मय, मैख़ाने का बखान खूब करते रहे हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उनके असली कद्रदान भारत में अब पैदा हुए हैं. जी हाँ! हाल में आई एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में शराब की खपत बढ़ रही है और इसके पीछे चीन और भारत के लोगों की मयकशी है.

ब्रिटिश स्वास्थय जर्नल लैंसेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में 1990 की तुलना में 2017 में शराब की खपत दस प्रतिशत बढ़ी है और इसके पीछे चीन और भारत के शराब पीने वाले लोग हैं.

अगर ऐसा ही चलता रहा तो अगले एक दशक में दुनिया में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 17 प्रतिशत और बढ़ेगी.

इस रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक दुनिया के आधे के करीब युवा शराब का सेवन कर रहे होंगे. कम से कम पच्चीस फीसदी युवा हर महीने कम से कम एक बार शराब का सेवन तो करेंगे ही.

इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर शराब-सम्बन्धी स्वास्थ्य प्रभावों की बात की जाए तो दुनिया एकदम से गलत रास्ते पर जा रही है.

ब्रिटिश स्वास्थय जर्नल लैंसेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में 1990 की तुलना में 2017 में शराब की खपत दस प्रतिशत बढ़ी है और इसके पीछे चीन और भारत के शराब पीने वाले लोग हैं

शराब का सेवन करने से करीब 200 बिमारियों के होने की सम्भावना रहती है और विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) के मुताबिक़ इसकी वजह से सालाना 30 लाख लोगों की मौत हो जाती है. मरने वालों में 75 फीसदी पुरुष हैं.

दुनिया भर में 23.7 करोड़ पुरुष और 4.6 करोड़ महिलायें शराब सम्बंधित रोगों से प्रभावित होते हैं. यूरोप में सबसे अधिक लोग इससे प्रभावित हैं.

सन् 1990 के पहले शराब सेवन अधिकतर अमीर देशों की बात थी. वहां इसका प्रचलन काफी अधिक था, लेकिन धीरे-धीरे यह ट्रेंड बदल रहा है. अब यूरोप और अमेरिका में यह कम हो रहा है. बल्कि चीन और भारत में शराब सेवन बढ़ रहा है.

साल 2017 में, चीन में एक युवा साल भर में औसतन 11 लीटर शराब सेवन कर रहा था. यद्यपि अमेरिका के मुकाबले यह अभी भी कम है पर चीन के 1990 के आंकड़े को देखें तो इन 27 सालों में यह करीब 70 प्रतिशत का उछाल है.

इसी तरह भारत में 2017 में 40 फीसदी पुरुष और 22 फीसदी महिलाओं ने औसतन 6 लीटर शराब का सेवन किया. यह 1990 के मुकाबले लगभग दोगुना था और शोधकर्ताओं के अनुसार 2030 तक इसमें पचास फीसदी की बढ़ोत्तरी अनुमानित है.

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