पनामा पेपर्स के बाद अब पैराडाइज़ पेपर, मोदी से इनके खिलाफ एक्शन की उम्मीद करना बेमानी

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बॉलीवुड के स्टार अमिताभ बच्चन पनामा और इस पैराडाइज- दोनों पेपर्स में मौजूद 

सौतुक डेस्क/

इस महीने की 8 तारीख को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी देश में काला धन विरोध दिवस मनाने की तैयारी में है.  लेकिन इससे ठीक दो दिन पहले रविवार को देर शाम एक अंतरराष्ट्रीय खुलासे ने सरकार और तंत्र की नींद हराम कर दी. इस रिपोर्ट ने कुल 714 भारतीय नाम जारी किये हैं जिन्होंने कर बचाने के लिए 19 ऐसी जगहों पर निवेश किया जिससे कर बचाया जा सकता है.

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों के समूह जिसमें भारत से इंडियन एक्सप्रेस भी शामिल है ने दो कम्पनियों – बरमूडा की एप्पलबय और सिंगापूर के एशियासिटी –के दस्तावेजों का अध्ययन किया. इसमें पाया गया कि इन कंपनियों की मदद से पैसा अन्य देशों में ले जाया गया.

पैराडाइज़ पेपर के नाम से यह खोज 10 महीनों तक चली. द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक भारतीय नामों में सन-टीवी-एयरसेल-मैक्सिस केस, एस्सार-लूप 2जी केस, एसएनसी-लवलीन हैं, जिसमें केरल के पिनारयी विजयन का नाम आया था और उन्हें क्लीनचिट दिया गया था. अन्य नामों में जिंदल स्टील, अपोलो टायर्स, हवेल्ल्स, हिंदुजा, एमार एमजीएफ, विडियोकॉन, हिरानंदानी समूह, और डीसी कंस्ट्रक्शन इत्यादि शामिल हैं.

बड़े कॉर्पोरेट के अलावा जो नाम हैं उनमें अमिताभ बच्चन भी शामिल हैं. इनका नाम पनामा पेपर्स में भी आया था. वही पनामा पेपर्स जिसमें नाम आने की वजह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को अपने पद से इस्तीफ़ा तक देना पड़ा था. इधर उनके सरकार के नए नए प्रोजेक्ट का ब्रांड एम्बैसडर बनाया जाता रहा.

संजय दत्त की पत्नी दिलनशीं (पुराना नाम) का नाम भी इस पैराडाइज़ लिस्ट में हैं. इसके आतिरिक्त मोदी के मंत्रालय से जयंत सिन्हा और आरके सिन्हा का नाम भी यहाँ मौजूद है. विजय माल्या भी इस लिस्ट में शामिल हैं.

पद्म भूषन और पद्मश्री से नवाजे जा चुके फोर्टिस-एस्कॉर्ट के मालिक डॉ अशोक सेठ भी इस लिस्ट में शामिल हैं. इन्हें एक ऐसी कंपनी में शेयर दिया गया जो स्टेंट बनाती है. बदले में सेठ ने यह स्टेंटस अपने मरीजों में लगवाया. यह सीधा सीधा कनफ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट का मामला है. जिस कंपनी में उनको शेयर दिया गया उसका नाम था बायोसेन्सर्स इंटरनेशनल समूह जो सिंगापूर में पंजीकृत है. इस कंपनी को बरमूडा में 2035 तक टैक्स देने से छूट दी गई है. इसमें अन्य देशों जैसे सिंगापूर, जापान, अमेरिका, इंडोनेशिया के डॉक्टर भी शामिल हैं जिनको इस कंपनी ने शेयर दिया हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सेठ ने इस कंपनी के 5000 शेयर 2009 में खरीदे.

इस डॉक्यूमेंट में अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी विल्बर रौस जो ट्रम्प प्रशासन में व्यापार और उत्पादन की जिम्मेदारी लिए हुए हैं, का नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं. यह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दामाद की गैस कंपनी के साथ व्यवसाय में लिप्त हैं. रौस ने नेविगेटर होल्डिंग में भी निवेश किया हुआ है जो रूस के गैस और पेट्रोकेमिकल से जुड़ा है. इसमें पुतिन के दामाद का 20 प्रतिशत का शेयर हुआ करता था.

पनामा पेपर्स के आने के बाद आर्थिक घपलेबाजी का यह सबसे बड़ा एक्सपोज है जिसमें बड़े-बड़े लोगों के नाम आये हैं. नरेन्द्र मोदी की सरकार दो दिन बाद काला धन के खिलाफ उत्सव मनाने जा रही है. लेकिन पनामा पेपर्स में आये लोगों के नाम के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाना बताता है कि उनके निशाने पर बड़े लोग नहीं हैं. यह सरकार आम आदमी को ही निशाने पर लिए हुए है.

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