गुजरात के मुख्य सचिव रहे अचल कुमार जोति के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के साथ देश के तीन प्रमुख पदों पर गुजरात के लोग हुए विराजमान

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सौतुक डेस्क/

गुजरात के मुख्य सचिव रहे आईएएस अधिकारी अचल कुमार जोति देश के मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं. इस तरह देश के तीन बड़े पदों पर गुजरात से जुड़े लोग विराजमान हुए हैं. इन तीन में शामिल हैं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, देश की सबसे बड़े राजनितिक दल के अध्यक्ष अमित शाह और अब चुनाव योग के मुख्य आयुक्त.

भारत के 21वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त के बतौर अचल कुमार जोति ने आज कार्यभार संभाला. निर्वतमान निर्वाचन आयुक्त  नसीम जैदी ने कल अपना कार्यकाल पूर्ण करने के बाद पद छोड़ दिया था.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यभार ग्रहण करने के बाद  जोति ने चुनाव आयोग की प्राथमिकताओं के बारे में कहा कि चुनाव आयोग देशभर में स्वतंत्र, निष्पक्ष, विस्तृत और विश्वसनीय चुनाव संपन्न कराने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहेगा. इसके साथ ही चुनाव आयोग “सभी मतदाताओ से मतदान करने” के अपने अभियान को सुनिश्चित करेगा.  जोति ने कहा कि चुनाव आयोग विधानसभा और संसदीय चुनाव सपन्न कराने के लिए ई-सुशासन के प्रचार के प्रति सक्रियता जारी रखेगा.

सनद रहे कि जोति ने 13 मई 2015 से चुनाव आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु,पुद्दुचेरी, उत्तरप्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में विधान सभा चुनावों का सफलता पूर्वक संचालन किया है.

चुनाव आयोग में नियुक्त होने से पहले जोति कई सारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं. भारतीय प्रशासनिक सेवा (1975) के बैच के जोति को प्रशासन के क्षेत्र में 42 वर्ष का अनुभव है.  अपने  कार्यकाल के दौरान उन्होंने सुरेन्द्र नगर, गोधरा और खेड़ा के जिला अधिकारी और मंडलायुक्त के बतौर कार्य किया है.  साथ ही जोति को  गुजरात  और केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों मे महत्वपूर्ण विभागों में कार्य करने का अनुभव है.

इनके मुख्य चुनाव आयुक्त के बतौर नाम के घोषणा के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर काफी विविध प्रतिक्रिया देखने को मिली. विवादित और मोदी सरकार के प्रखर आलोचक संजीव भट्ट ने ट्वीट किया कि ‘गुजरात सरकार के पूर्व मुख्य सचिव एके जोति नए मुख्या चुनाव आयुक्त होंगे. भारत को अब स्वतंत्र और पारदर्शी  चुनाव को अलविदा कह देना चाहिए. भट्ट  गुजरात के पूर्व पुलिस अधिकारी हैं.

सनद रहे कि भारतीय जनता पार्टी जो देश का सबसे बड़ा राजनितिक दल है उसके मुखिया भी गुजरात से ही हैं और प्रधानमंत्री के काफी करीबी माने जाते हैं. अमूमन दल के निति के अनुसार एक ही राज्य से प्रधानमंत्री और दल के अध्यक्ष नहीं होने चाहिए थे. पर प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने अपने रसूख का इस्तेमाल करके उन्हें दल प्रमुख बनवाया. शाह चुनाव जीतने में माहिर रहे हैं.

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