पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर बनी न्यूज़ एंकर, क्या इससे इनकी स्थिति बदलेगी?

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सौतुक डेस्क/

भारत में एक ट्रांसजेंडर के समाचार वाचक के तौर पर आगे आने के करीब तीन साल बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी एक ट्रांसजेंडर ने समाचार वाचन का काम शुरू किया है. ट्रांसजेंडर का मतलब उन लोगों से है जो व्यवहार और समझ में अपने यौन अंगो के अनुरूप व्यवहार नहीं करते. भारत में इनके लिए प्रचलित शब्द हिजड़ा है जो एक गाली के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें किन्नर भी कहा जाता है.

भारत और पकिस्तान, इन दो देशों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्थिति अच्छी नहीं है और इन लोगों के आगे आने से इस ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों का मनोबल बढ़ेगा. सनद रहे कि इस समुदाय के लोगों में बड़ी संख्या में आत्महत्या करने के प्रयास देखे जाते हैं. इससे इनकी तकलीफ का अंदाजा लगाया जा सकता है.

हाल ही में खबर आई है कि पाकिस्तान में एक समाचार चैनल ने देश में पहली बार एक ट्रांसजेंडर समाचार वाचक नियुक्त किया है. पत्रकारिता में स्नातक मार्विया मलिक इससे पहले मॉडल भी रह चुकी हैं. मलिक ने बीबीसी उर्दू को बताया कि नियुक्ति की खबर सुनकर उनकी आखों में आंसू आ गए.

उन्होंने तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद शुक्रवार को अपना पहला कार्यक्रम एक निजी टीवी चैनल ‘कोहिनूर टीवी’ पर प्रस्तुत किया. न केवल पाकिस्तान बल्कि लगभग सभी देशों में ट्रांसजेंडर को भेदभाव का सामना करना पड़ता है और उन्हें बहुत मुश्किल से काम मिलता है. आजीविका के लिए कुछ ट्रांसजेंडर तो भीख मांगने, नृत्य करने या वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर हो गए हैं.

मलिक ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनका काम पाकिस्तान में मौजूद ट्रांसजेंडर समुदाय को बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा.

उन्होंने कहा, “हमारे समुदाय के साथ समानता का व्यवहार होना चाहिए और किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव नहीं होना चाहिए. हमें समान अधिकार मिलने चाहिए और हमें सामान्य नागरिक की मान्यता मिलनी चाहिए, न कि तीसरे लिंग के रूप में.”

कोहिनूर के मालिक जुनैद अंसारी ने ‘वॉइस ऑफ अमेरिका’ को बताया कि मलिक को योग्यता के आधार पर चुना गया है, न कि लिंग के आधार पर.

इसी महीने पाकिस्तानी संसद ने ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के संरक्षण तथा उन्हें उनकी लैंगिक पहचान का निर्धारण करने की अनुमति देने वाले एक अध्यादेश के पक्ष में मतदान किया था.

सामाजिक तिरस्कार का शिकार समुदाय

याद हो कि भारत में करीब तीन साल पहले यानी 2015 में पद्मिनी प्रकाश नाम के एक ट्रांसजेंडर ने तमिल भाषा के एक चैनल के लिए एंकरिंग का काम शुरू किया था. इस चैनल का नाम है लोटस टीवी. 2015 के स्वतंत्रता दिवस के दिन से पद्मिनी रोज सात बजे शाम को चैनल पर समाचार वाचक की तरह आती थीं. उनका भी यही मानना था कि इससे समाज में ट्रांसजेंडर को देखने का नजरिया बदलेगा.

लोगों को चाहिए कि ऐसी किसी भी बदलाव को स्वागत करें. पुराने ख्यालों में ट्रांसजेंडर को बहुत स्वस्थ नजरिये से नहीं देखा जाता रहा है और इसकी वजह से इस समुदाय से आने वाले लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसका अंदाजा इंडियन जर्नल ऑफ़ साइकोलॉजिकल मेडिसिन में वर्ष 2016 में छपे एक अध्ययन से लगाया जा सकता है.

इस अध्ययन में बताया गया है कि इस समुदाय के लोगों में आत्महत्या करने की सम्भावना अधिक होती है. पूरे विश्व में यह करीब 32 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत है. भारत में इस समुदाय के करीब पचास प्रतिशत लोग बीस वर्ष के होने तक एक बार आत्महत्या करने की कोशिश कर चुके होते हैं.

इसकी वजह इन लोगों के साथ होने वाले यौन दुर्व्यवहार, परिवार के द्वारा इनका त्याग, समाज में इनका तिरस्कार, पुलिस और सरकार का इनके साथ भेदभाव इत्यादि है. ऐसे में यह उम्मीद की जानी चाहिए कि इन ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के इस तरह आगे आने से समाज में व्याप्त बहुत सारी भ्रांतियां कम होंगी और इनके लिए भी एक स्वस्थ समाज बनेगा जहां ये लोग सामान्य जीवन जी सकेंगे.

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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