विश्व के कुल 122 देशों ने परमाणु हथियारों के खिलाफ सहमती बनाई, भारत इसके खिलाफ

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सौतुक डेस्क/

पिछले सात जुलाई को जब दुनिया के दो दिग्गज परमाणु देश जर्मनी में मुलाकात कर रहे थे उसी वक्त न्यूयार्क में एक इतिहास रचा जा रहा था. पहली बार विश्व के करीब 122 देशों ने  परमाणु हथियार के विरोध में सहमती बनाया. उधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन मुलाक़ात कर कर रहे थे इधर  न्यूयार्क स्थित सयुंक्त-राष्ट्र के कार्यालय में इन देशो ने परमाणु हथियार के निरस्त्रीकरण से सम्बंधित संधि को अपनाया. इस संधि के लिए पिछले 20 वर्षों से प्रयास चल रहा था.

 संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में निरस्त्रीकरण के पक्ष में कुल 122 देशों का समर्थन मिला. विपक्ष में केवल नीदरलैंड का एक वोट था वहीँ सिंगापुर ने इसमें भाग नहीं लिया. इस संधि के अनुसार  परमाणु हथियार से संबंधित सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी. जिसमे ऐसे किसी हथियार का विकास, परीक्षण, उत्पादन, निर्माण, अधिग्रहण, परमाणु हथियार या अन्य परमाणु विस्फोटक का भण्डारण सब प्रतिबंधित रहेगा. इसके साथ ही इन हथियारों के इस्तेमाल के या इस्तेमाल की धमकी पर प्रतिबन्ध रहेगा.
सभी देश इस संधि पर 20 सितंबर 2017 तक हस्ताक्षर कर सकते हैं और जब कम से कम 50 देशों का इसपर हस्ताक्षर हो जायेगा तब जाकर यह संधि मान्य होगी.
हालांकि, कई बड़े देश इस संधि प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हुए. अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इसराइल जैसे परमाणु हथियार रखने वाले  नौ देशों में से किसी ने भी इस संधि का समर्थन नहीं किया.  बल्कि, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने तुरंत एक वक्तव्य जारी कर स्पष्ट किया कि उन्हें इस समझौते में कोई दिलचस्पी नहीं है. उनका कहना है कि यह संधि वर्तमान की वास्तविकता को नजरअंदाज करती है. इन देशों ने स्पष्ट किया कि ये इस पर हस्ताक्षर करने या समर्थन देने का कोई इरादा नहीं रखते और इस तरह उनके परमाणु सम्बंधित नीतियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
कुछ भी हो इस संधि से इतना तो पता चलता है कि विश्व का व्यापक समाज परमाणु हथियार के खिलाफ है और बाकी देशो के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है.

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