दिल्ली में दुष्कर्म रोकने के लिए 3 वर्षो में पर्याप्त प्रयास नहीं : स्वाति मालीवाल

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फाइल फोटो: आईएएनएस

सोमरिता घोष/

नई दिल्ली: दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का कार्यकाल अगले पांच महीनों में पूरा होने जा रहा है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में दुष्कर्म रोकने के लिए केंद्र की पुलिस ने ज्यादा कुछ नहीं किया है।

स्वाति ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, “हमने महिलाओं के हित के लिए काफी काम किया है और यह साबित करने के लिए हमारे पास पर्याप्त आंकड़े हैं। लेकिन अगर आप मुझसे पूछें कि राष्ट्रीय राजधानी में दुष्कर्म की घटनाएं कम करने या रोकने में डीसीडब्ल्यू का क्या योगदान है, तो शायद यही सवाल कई बार मैं खुद से पूछती हूं। जब मैं नाबालिग लड़कियों के दुष्कर्म के मामलों के बारे में सुनती हूं, तो मैं खुद से भी यह सवाल उठाती हूं कि इसमें हमारा योगदान क्या है।”

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 13,803 मामले दर्ज हुए और यहां दुष्कर्म के सबसे अधिक (1,996) मामले दर्ज हुए।

उन्होंने कहा, “हमें राजधानी में इसे रोकना जरूरी है। लोग इसलिए नहीं डरते क्योंकि वे सोचते हैं कि वे अपराध करने के बाद आसानी से बच जाएंगे। और यही हो रहा है। दर्ज किए गए मामलों की तुलना में, बेहद कम में सजा होती है। हमें त्वरित न्यायतंत्र, ज्यादा पुलिस बल और ज्यादा फॉरेंसिक लैब्स की जरूरत है।”

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 13,803 मामले दर्ज हुए और यहां दुष्कर्म के सबसे अधिक (1,996) मामले दर्ज हुए।

मालीवाल को 2015 में डीसीडब्ल्यू प्रमुख नियुक्त किया गया था, जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आई थी। उनकी नियुक्ति पर काफी सवाल भी खड़े हुए थे और इसे एक राजनीतिक कदम कहा गया था।

उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार में एक कार्यकर्ता को अध्यक्ष के पद पर नियुक्त करने का साहस था। हमें सरकार से काफी समर्थन मिला, इसमें कोई संदेह नहीं है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि महिला आयोग को लेकर उनका दृष्टिकोण ऐसे संगठन से है जो लोकतांत्रिक रूप से काम करे।”

उन्होंने कहा कि तीन वर्षो में डीसीडब्ल्यू ने दिल्ली पुलिस से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं।

2016 में भ्रष्टाचार रोधी शाखा ने डीसीडब्ल्यू में नियुक्तियों में अनियमितताओं को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिस संबंध में मालीवाल को अदालत का सामना करना पड़ा था। वह इस मामले में जमानत पर हैं।

उन्होंने कहा, “मैं इतने सारे मामले अकेले नहीं देख सकती। जब मेरी नियुक्ति हुई थी, तब केवल 31 कर्मचारी थे और बुनियादी रूप से भी काफी कमियां थीं। इससे पिछले आयोग ने कुछ नहीं किया। मामले लंबित थे और मुझे काम करने के लिए लोगों की जरूरत थी। मुझे एक टीम बनानी थी। नियुक्तियां प्रक्रिया के अनुरूप ही हुईं। समिति में कई लोग हैं, जो विभिन्न राजनीतिक दलों से हैं। जो कोई भी असल में डीसीडब्ल्यू के लिए काम करना चाहता है उसका स्वागत है।”

अपनी नियुक्ति के बाद मालीवाल की पहली प्राथमिकता मध्य दिल्ली के जीबी रोड इलाके से सेक्स वकर्स को छुड़ाना और उनका पुनर्वास थी।

उन्होंने कहा, “कई सेक्स वकर्स हैं, जो इस स्थिति से बाहर आना चाहते हैं, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है, जीवनयापन के वैकल्पिक साधन की उनकी आखिरी उम्मीद भी खो चुकी है। यह एक बेहद संवेदनशील विषय है और हमें इस पर समग्र रूप से काम करने की जरूरत है। अगर आप उन्हें शिक्षित भी करते हैं, तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि उसकी पिछली जिंदगी का प्रभाव बिल्कुल खत्म हो।”

अपनी नियुक्ति के बाद मालीवाल की पहली प्राथमिकता मध्य दिल्ली के जीबी रोड इलाके से सेक्स वकर्स को छुड़ाना और उनका पुनर्वास था

मालीवाल ने राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों और महिलाओं की तस्करी के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई और डीसीडब्ल्यू की गतिविधियों के लिए केंद्र से सहयोग न मिलने की भी शिकायत की।

उन्होंने कहा, “हमारे आग्रह के बदले में हमें केवल चुप्पी मिलती है, चाहे बात महिलाओं की तस्करी की हो, दुष्कर्म मामले, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और अधिक पुलिस बल की नियुक्ति की बात हो या निर्भया फंड के इस्तेमाल की बात। मैने गृह मंत्री से मुलाकात की है, उन्हें कई पत्र लिखे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

केंद्र सरकार ने डीसीडब्ल्यू को जवाब क्यों नहीं दिया, यह पूछे जाने पर मालीवाल ने कहा कि शायद ऐसा केंद्र और राज्य के बीच मतभेदों के कारण हो।

उन्होंने कहा, “मैं इसे लेकर किसी प्रकार की राजनीति में नहीं पड़ना चाहती।”

एक और कार्यकाल मिलने पर उनकी क्या योजनाएं होंगी, इस बारे में पूछने पर मालीवाल ने कहा कि इस पर दिल्ली सरकार को ही फैसला लेना है। उन्होंने कहा, “मैं वर्तमान में जीती हूं। मेरी प्राथमिकताएं वहीं रहेंगी। बड़े बदलावों के लिए तीन साल का समय काफी कम होता है।”

–आईएएनएस

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