पुरुष प्रधान समाज में निर्मला सीतारमण को देश के सुरक्षा की जिम्मेदारी देने के क्या हैं मायने

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साभार: द टाइम्स ऑफ़ इंडिया

सौतुक डेस्क/

नरेन्द्र मोदी के हाल में किये कैबिनेट विस्तार के बाद निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाए जाने पर तरह-तरह की बातें की जाने लगीं. किसी ने इसे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से सम्बंधित विवाद से जोड़कर मजे लिए तो किसी ने पहली या दूसरी महिला रक्षामंत्री के बहस को बढ़ावा दिया.

लेकिन एक बात जो सबसे अधिक गौर करने वाली है वह यह कि निर्मला सीतारमण उन 16 महिलाओं की श्रेणी में आ गयीं हैं जो कि विश्व के अलग-अलग देशों के सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाये हुईं हैं. पुरुष प्रधान विश्व में यह कम मार्के की बात नहीं है.

भारत वही देश है जहां अभी इसी पर विचार विमर्श हो रहा है कि महिलाएं सीमाओं पर जाकर जंग में भाग ले सकती है कि नहीं. ऐसे समय में सीतारमण का रक्षा मंत्री बनना और अधिक प्रासंगिक हो जाता है.

यही नहीं सीतारमण उन दो महिला रक्षा मंत्रीयों में से एक हैं जिनकी सेनाएं परमाणु हथियार से भी लैस हैं. उनके अतिरिक्त  दूसरी महिला हैं फ्लोरेंस पार्ले जो फ़्रांस की रक्षा मंत्री हैं. पार्ले ने जहां एक महिला रक्षा मंत्री से यह जिम्मेदारी ली थी निर्मला सीतारमण के पहले भारत में केवल इंदिरा गाँधी ने रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी उठाई थी. अलबत्ता इंदिरा गाँधी देश की प्रधानमंत्री भी थी.

सनद रहे कि भारतीय रक्षा मंत्रालय का काम इतना आसान नहीं है जिसको अब गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर मीडिया में भी स्वीकार कर चुकें हैं. वो पहले भी गोवा के मुख्यमंत्री थे. प्रधानमंत्री मोदी ने उनका वहाँ से बुलाकर रक्षा मंत्री बनाया था. अब वह वापस अपने राज्य लौट चुके हैं.

आज के समय में सीतारमण दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना का नेतृत्व कर रही हैं. भारतीय सेना अपने 14 लाख सुरक्षा बलों के साथ उन सबसे मजबूत स्थिति में हैं जिसका नेतृत्व एक महिला कर रही है.

इन दोनों के अतिरिक्त शेख हसीना भी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी उठा रही हैं. इस देश के पास 1.6 लाख सुरक्षा बल हैं.

एएनआई के एक रिपोर्ट के अनुसार इटली, जर्मनी, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया ऐसे देश हैं जहा रक्षा की जिम्मेदारी महिला उठा रही हैं. केन्या, बोस्निया, मैसेडोनिया, स्लोवेनिया और यूरोप में नॉर्वे, नीदरलैंड और अल्बानिया में भी महिलाओं ने अपने देश के सुरक्षा नीति की जिम्मेदारी उठाये हुए हैं. निकारागुआ भी ऐसे ही देशो में एक है.

श्रीलंका की प्रधानमंत्री श्रीमवो भंडारनायके दुनिया की पहली महिला थीं जिन्होंने सुरक्षा की भी जिम्मेदारी अपने कंधे पर ली. इनके बाद भारत की इंदिरा गाँधी का नंबर आता है.

बिना प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बने देश के रक्षा नीतियों की जिम्मेदारी लेने वाली पहली महिला थीं फ़िनलैंड की मार्टा एलिज़ाबेथ रेह्न जो वर्ष 1990 में देश की रक्षामंत्री बनीं.

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