जानिये क्यों काम करना चाहती थी शराब की दुकान में यह महिला

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शिखा कौशिक/

शराब की दूकान, वह भी सरकारी.  दुकान पर खरीदने वाले लोगों (शराबियों) की भीड़ और काउंटर पर शराब बेचती एक महिला. ऐसा दृश्य कभी देखा है आपने? नहीं न, कम से कम भारत में तो किसी ने नहीं देखा होगा. लेकिन यह दृश्य बदलने वाला है और इसकी शुरुआत केरल से हो चुकी है जहां एक महिला ने पांच साल के लम्बे संघर्ष के बाद न्यायालय के आदेश के बाद पहली बार शराबखाने में नौकरी हासिल की है.

उस महिला का नाम है शैनी राजीव और कोच्ची से 30 किलोमीटर दूर पुठेन्वेलिक्कारा गाँव के सरकारी शराब की दुकान पर ब्रिटिश अंपायर, मैकडोनाल्ड, हनीबी जैसे ब्रांड के शराब की बोतलों के बीच बैठकर वह अपनी नौकरी करती हैं.

करीब 43 साल की इस महिला को केरल के उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद केरल स्टेट बेवेरज (BEVCO) कारपोरेशन में नौकरी मिली थी. न्यायालय का यह आदेश इस साल के अप्रैल में आया था. अक्टूबर महीने से इन्होंने काम करना शुरू किया. दुकान में कार्यरत कुल 11 कर्मचारियों में सबसे सीनियर शैनी की बेसिक तनख्वाह 21 हजार रुपये है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के अनुसार रोजाना इनको 300 रूपया भत्ता मिलता है.

2010 के लोक सेवा आयोग के द्वारा आयोजित परीक्षा में शैनी को कुल 1,717 सफल परीक्षार्थियों में 526 स्थान मिला था.  BEVCO के लिए आयोजित इस परीक्षा कर परिणाम वर्ष 2012 में आया था और कुल सफल परीक्षार्थियों में से आधे से अधिक महिलायें थीं.

पर BEVCO ने महज़ दर्जन भर महिलाओं को ही चुना, वो भी जिनकी रैंक सौ के अन्दर थी. इन महिलाओं को गोदाम के काम के लिए रखा गया वहीँ पुरुषों को खुदरा व्यापार (रिटेल) के उद्देश्य के लिए चुना गया. इसकी वजह यह है कि केरल आबकारी शॉप्स डिस्पोजल रूल्स और 2002 के विदेशी शराब अधिनियम (फॉरेन लिकर रूल्स) में महिलाओं को रिटेल दुकानों, बार, और पब में महिलाओं को काम पर रखने की मनाही है. इसकी वजह से शैनी और बहुत सारी अन्य महिलओं को परीक्षा पास करने पर भी नौकरी नहीं मिल पायी.

उच्च न्यायालय ने राज्य के वर्तमान कानून जिसकी वजह से महिलाओं के शराब की रिटेल दुकानों पर काम करने की मनाही है, को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उलंघन माना

फिर इन्होने संविधान का सहारा लिया जिसके अनुसार यह सीधा-सीधा जेंडर के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया. इन्होने BEVCO के खिलाफ 2013 में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

BEVCO का कहना था कि महिलाओं को ऐसे काम पर रखना उनके सुरक्षा के हिसाब से सही नहीं है. यह भी तर्क दिया गया कि इन शराब की दुकानों पर काम करने वाले स्टाफ को सुबह 10 बजे से लेकर रात नौ बजे तक नौकरी करनी होती है. BEVCO ने यह भी तर्क दिया कि मेरिट लिस्ट अब पुरानी हो गयी है इसलिए शैनी को किसी और छोटे पद पर कार्य कर रहे पुरुष को हटाकर इनको नौकरी पर रखा जा सकता है.   लेकिन शैनी ने इसे मानने से इनकार कर दिया.

इस तरह अप्रैल महीने में केरल के उच्च न्यायालय ने राज्य के वर्तमान कानून जिसकी वजह से महिलाओं के शराब की रिटेल दुकानों पर काम करने की मनाही है, को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उलंघन माना.

शैनी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए कहा है कि वह पहले दुविधा में थीं कि यह काम शुरू करें या नहीं करें. पर उन्होंने सोचा कि उनके शुरू करने से आने वाले सालों में बहुत सी महिलाओं को नौकरी मिलने में आसानी होगी. इसलिए कम से कम काम शुरू तो करना चाहिए. और इस तरह शैनी ने यह नई शुरुआत की. 

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