महिलाएं जिनकी उपलब्धियों का जश्न देश मना रहा है

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सौतुक डेस्क/

शनिवार 20 जनवरी को देश उन 112 महिलाओं को सम्मानित करेगा जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में नई पहल की और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. पहली MBA के डिग्री वाली महिला सरपंच से लेकर पहली महिला विधायक जिसने पहला सेनेटरी पैड वाला डिजिटल बैंक खोला. पहली महिला पायलट से लेकर जीवन के अलग अलग क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल करने वाली इन ‘पहली महिलाओं’ को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद देश की राजधानी में सम्मानित करेंगे.  यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल है. मिलिए इनमें से कुछ महिलाओं से जिन्होंने कुछ नया कर गुजरने की चाह में एक नया मुकाम हासिल किया.

उपासना टकु, पहली महिला जिसने पेमेंट स्टार्टअप शुरू किया

सूरत में शुरूआती  शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कर उपासना टकु, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढाई करने जलंधर चली गयीं. इसके बाद मैनेजमेंट साइंस की पढाई इन्होंने अमेरिका में पूरी की. अच्छी पढाई की बदौलत उनको पहली नौकरी एचएसबीसी में मिली. यहाँ कई उप्लाबधियाँ हासिल करने के बाद उपासना ने पेपाल ज्वाइन कर लिया. यहीं पर उनको अमेरिका के पेमेंट सिस्टम की बारीकियां  में मदद मिली.

पर 2008 आते-आते नौकरी से इनका मन उचटने लगा. इन्होंने मीडिया को बताया है कि नौकरी बहुत आसान काम लगने लगा था. फिर इन्होंने भारत लौटने की सोची और यहाँ वैसा ही कुछ करने का विचार आया. वर्ष 2009 में उपासना भारत आईं और लोगों से बात-चीत कर यहाँ के मुद्दे समझने का प्रयास करने लगीं. इसी दौरान इनको पता चला कि पेपाल जैसी चीज यहाँ के लोगों के लिए एकदम नई है. और इस तरह यह भारत की पहली महिला बनी जिसने एक पेमेंट स्टार्टअप शुरू किया.

मिशेले काकडे: स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क को सबसे कम समय में पैदल चलकर पूरा किया

मिशेले काकडे 46 साल की हैं और पुणे के व्यसवायी से उनका विवाह हुआ है. उनके दो बच्चे भी हैं जिनकी उम्र 25 और  22 साल है. मिशेले भोपाल में पैदा हुई थीं और इंग्लैण्ड मूल से आती हैं. इनकी शुरूआती शिक्षा-दीक्षा सेंट मैरी स्कूल नैनीताल से हुई है. बीए की पढाई उन्होंने वाडिया कॉलेज से की है. मिशेले ने ट्रैकिंग की शुरुआत पैंतीस साल की उम्र से शुरू कर दिया.

वर्ष 2015 के 21 अक्टूबर को मिशेले ने पैदल चलकर एक ऐसी ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत की जो अब तक किसी ने सोची भी नहीं थी. इन्होंने पूरे भारत को पैदल देखा और इसके लिए इनको करीब 5,968.4 किलोमीटर की यात्रा पूरी करनी पड़ी. चतुर्भुज राजमार्ग पर चलते हुए यह देश के चार महानगरो में गईं. रोज करीब 35 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने वाली मिशेले को इस पूरी यात्रा में 194 दिन लगे. इसके लिए इनका नाम गिनीज बुक में भी दर्ज हुआ.

स्नेहा कामत: भारत में महिलाओं के लिए कार ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की संस्थापक

चार भाई-बहनों में सबसे छोटी स्नेहा कामत एक मारवाड़ी परिवार में पैदा हुई थीं. पुराने ख्यालों के बीच पैदा हुई स्नेहा हमेशा से कुछ अलग करना चाहती थीं जो अन्य लड़कियां नहीं करती थीं. अर्थशास्त्र से स्नाताक की पढाई पूरी करने वाली स्नेह मुंबई में पली-बढ़ी हैं. स्नेहा का बचपन बहुत अच्छा नहीं गुजरा. उनके माता-पिता के तलाक  की वजह से स्नेहा का अधिकतर बचपन अपने दादी के साथ ही गुजरा और इस तरह वो अपने भाई-बहनों से भी अलग रहीं.

कार ड्राइविंग में गज़ब की कौशल रखने वाली स्नेहा ने ‘शी कैन ड्राइव’ की शुरुआत 2012 में ही की थी तब से अब तक वे करीब 400 महिलाओं को ड्राइविंग सीखा चुकीं हैं. अपने अनोखे तरीके से कार चलाना सिखाने के लिए स्नेहा काफी मशहूर हैं.

नीरू चड्ढा: इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ सी में न्यायधीश बनीं

अंतर्राष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ नीरू चड्डा का इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ सी में न्यायधीश के रूप में चयन भारत के लिए बड़े ही गौरव की बात थी. संयुक्त राष्ट्र का न्यायिक निकाय जो कि समुद्र से सबंधित विवादों का निपटारा करता है, नीरू उस निकाय में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त होने वाली पहली महिला बनीं.

जानी मानी वकील, नीरू विदेश मंत्रालय में मुख्य कानूनी सलाहकार बनने वाली पहली भारतीय महिला भी थीं.

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