पांच कानून महिलाओं के लिए

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सौतुक डेस्क/

देश में महिलाओं के खिलाफ दुर्व्यवहार या अपराध की वारदातें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं. क्या दूर-दराज के गाँव और क्या शहर, महिलाओं के प्रति अपराध की समस्या बढती जा रही है. इस तरह कि खबरें देश के हर कोने से आज आ रही हैं. हाल ही में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की लड़कियों ने ऐसे ही अपराधों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इधर हाल फिलहाल महिलायें भी इस सामाजिक और अपराध की समस्या के खिलाफ मुखर हुई हैं. विश्वव्यापी मी टू कैम्पेन हो या अभी चल रहा नेम एंड शेम कैम्पेन, जिसपर इस अपराध का विरोध कर रही महिलाओं में ही दो फाड़ देखा जा रहा है. जो भी हो महिलाओं की इस समस्या के प्रति मुखरता स्वागतयोग्य है. महिलाओं के साथ इस जुल्म में उन्हें अपनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. सामाजिक बंधन तोड़ने होंगे. कानून का सही इस्तेमाल करना होगा. इस विकराल समस्या का यही समाधान है. इन सबसे से निजात पाने का एक ही तरीका है. इन महिलाओं को अपनी सुरक्षा को देखते हुए नए और सख्त कानून की मांग करनी होगी. वर्तमान में संविधान से जो सुरक्षा मिली हुई है उसका बेहतर इस्तेमाल करना भी इस समस्या से निपटने का एक अच्छा तरीका है. ये हैं महिलाओं से जुड़े कुछ क़ानून जो हर महिला को जानना चाहिए:

  1. बराबर वेतन का अधिकार: यह अधिकार इक्वल रेम्युनरेशन एक्ट 1976 के अंतर्गत महिलाओं को दिया गया है. इस एक्ट के अनुच्छेद 4 के अनुसार एक ही काम के लिए महिलाओं को उनके पुरुष सहयोगियों से कम पैसा नहीं दिया जा सकता. कोई भी कम्पनी या मालिक एक ही तरीके के काम के लिए पुरुषों और महिलाओं में वेतन को लेकर भेदभाव नहीं कर सकता.

  2. यौन शोषण के खिलाफ अधिकार: यह अधिकार महिलाओं को सेक्सुअल हरासमेंट एक्ट 2013 के अंतर्गत दी गयी है. इस धारा के अनुच्छेद 4 के अंतर्गत अब 10 से अधिक कर्मचारियों वाली कमपनी के लिए एक आतंरिक शिकायत कमेटी (इन्टरनल कंप्लेंट कमेटी या आईसीसी) बनाना अनिवार्य है. यह कमिटी महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न के मामलों की अर्जी से लेकर सुनवाई तक सारी प्रक्रियाओं का ख्याल रखेगा. इसके अंतर्गत जुर्माना 50,000 से लेकर 1 लाख रुपये तक हो सकता है और यदि कोई संस्था पहले भी इस तरह के घटनाओं की दोषी पाई जाती है तो उनका लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है.

  3. महिला पुलिस के हाथों ही गिरफ़्तारी का अधिकार: हम अक्सर देखते हैं कि महिलाओं को पुरुष पुलिस अधिकारी धमकाते और कभी-कभी गिरफ्तार भी कर लेते हैं. पर अगर महिला को यह मालूम है तो पुरुष पुलिस अधिकारी के हाथों गिरफ्तारी से मना कर सकती है.  किसी भी महिला को गिरफ्तार करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ महिला पुलिस अधिकारी को होता है. सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय के बीच में भी किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

  4. पुश्तैनी संपत्ति में अधिकार: इसके अनुसार बेटियों का अपने  पिता संपत्ति में उतना ही अधिकार है जितना कि बेटों का. तब तक, जब तक कि उसे कानूनी तौर पर माता-पिता अपनी संपत्ति से बेदखल न कर दें. यदि महिला अविवाहित, विधवा या बेसहारा  हो तो उसे अपने माता पिता के घर में रहने का अधिकार प्राप्त है. 

  5. पहचान गुप्त रखने का अधिकार- सेक्सुअल हरासमेंट एक्ट की धारा 16 के अंतर्गत यौन शोषण की पीड़ित महिलाओं को पहचान गुप्त रखने का अधिकार है. इस कानून के मुताबिक निम्नलिखित विवरण जनता या मीडिया तक किसी भी तरह से नहीं जानी चाहिए और आगे उन्हें प्रकाशित नहीं किया जा सकता.

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