बेल्जियम दुनिया का पहला देश जिसने सऊदी अरब में महिला राजदूत नियुक्त किया

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सौतुक डेस्क/

महिलाओं की खराब स्थिति को इंगित करते हुए, बेल्जियम दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने  सऊदी अरब में एक महिला को अपना राजदूत चुना है. सऊदी अरब महिला अधिकारों के हनन के लिए कुख्यात है.

डोमिनिक मनोर जो अभी सयुंक्त अरब अमीरात में बेल्जियम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं उनको सऊदी अरब के राजधानी रियाद भेजने का फैसला किया गया है. इनकी रियाद में पोस्टिंग आने वाली गर्मियों में होगी.

बेल्जियम के सरकारी टीवी VRT के अनुसार बेल्जियम का यह फैसला सऊदी अरब को यह बताने के उद्देश्य से लिया गया है कि वह महिला अधिकारों की सुरक्षा करने में नाकाम रहा है और पड़ोस के सभी देशों की तुलना में वहाँ पर महिलाओं की स्थिति बुरी है. बेल्जियम यह बताना चाहता है कि महिलाओं के अधिकार को लेकर सऊदी अरब में जो प्रयास हो रहे हैं, वे काफी नहीं हैं.

सऊदी अरब में महिलाओं को सामान्यतः काम करने की छूट नहीं है. साथ ही वे खुल कर पुरुषों के साथ बातचीत नहीं कर सकतीं. उनको अकेले यात्रा करने के लिए अपनी अभिभावक से हस्ताक्षर कराना पड़ता है. अधिकतर सरकारी बिल्डिंग, कार्यालय, विश्वविद्यालय इत्यादि में महिलाओं के प्रवेश के लिए अलग दरवाजा होता है. महिलाओं के लिए सामान्यतः अलग रेस्टोरेंट होते हैं.

उनको अकेले यात्रा करने के लिए अपनी अभिभावक से हस्ताक्षर कराना पड़ता है. अधिकतर सरकारी बिल्डिंग, कार्यालय, विश्वविद्यालय इत्यादि में महिलाओं के प्रवेश के लिए अलग दरवाजा होता है.

महिलाओं के गाड़ी चलाने और खेल-कूद में भाग लेने पर भी प्रतिबन्ध था पर बीते अक्टूबर माह में सरकार ने इन नियमों में कुछ सुधार किये और महिलाओं को गाडी चलाने की छूट दी. महिलाओं पर पर्दा करने का दबाव तोरहता ही है और यहाँ वे बिना हिजाब के बाहर नहीं जा सकतीं.

बेल्जियम दुनिया का पहला ऐसा देश बना है जिसने एक महिला को सऊदी अरब में राजदूत नियुक्त कर वहाँ की राजधानी रियाद में पोस्टिंग देने की बात सोची है. इसके पहले जॉर्जिया ने भी वर्ष 2010 में एक महिला कीनियुक्ति की थी पर उनको कुवैत से काम करने को कहा गया था. कुवैत में बैठकर उनको सऊदी अरब सहित अन्य कई देशों की जिम्मेदारी दी गयी थी. इसके बाद, 2015 में जॉर्जिया ने जब सऊदी अरब में राजदूत नियुक्तकरने की सोची तो पुरुष को ही नियुक्त किया.

बेल्जियम ने ईरान में भी एक महिला को ही राजदूत बनाने का फैसला किया है. इनका नाम वेरोनिक पेटेट है. वहाँ भी महिलाओं के अधिकार काफी सीमित हैं. यद्यपि वहाँ स्थिति सऊदी अरब जितनी बुरी नहीं है.

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