आरानामा: शहर में जॉर्ज पंचम

0

जितेन्द्र कुमार/

(जितेन्द्र कुमार स्वतंत्र लेखन करते हैं. बिहार के भोजपुर जिले में  जन्मे कुमार अब तक दो कविता संग्रह और दो कहानी संग्रह ,एक हिंदी और एक भोजपुरी में लिख चुके हैं.)

जितेन्द्र कुमार

मैं अपने शहर के शिल्प को खोज रहा हूँ. मेरे शहर का शिल्प इतना अनगढ़ क्यों है? ताड़ के वृक्ष का शिल्प सममित है. आम्रपाली के वृक्ष का शिल्प सममित है. मछली का शरीर सममित है. मनुष्य का शरीर सममित है. यहाँ तक कि शहर के कुछ मशहूर भवनों का शिल्प सुकल्पित और सुगठित है: अमीर चंद कोठी, चमकीली कोठी, सिंचाई भवन, आरा कचहरी भवन, रिगेल होटल, बड़ी मठिया मंदिर, पार्वती चन्द्रा होटल, दी होली सेवियर चर्च आदि सुकल्पित शिल्प के नमूने हैं. लेकिन अब मेरा शहर अमीबा की तरह अपने कूटपादों पर चतुर्दिक क्यों पसर रहा है. सड़कें टेढ़ी-मेढ़ी, बेतरतीब उगते कंक्रीट के जंगल. ऐसा लगता है जैसे शहर में कोई नियंत्रणकारी व्यवस्थापिका नहीं है जिसके मानस में शहर के विकास की कोई योजना हो, कोई इच्छा शक्ति हो. क्या आपके शहर का भी इसी तरह विकास हो रहा है(?) जहाँ कोई विकास प्राधिकरण नहीं है और जहाँ भू-माफियाओं की जमात पैदा हो गई है जो किसानों से जमीन खरीद कर, बिना खेल के मैदान के, बिना पार्क के, बिना सामुदायिक भवन के, बिना स्कूल-कॉलेज हेतु जमीन निकाले निजी खरीदारों को दुगने–तिगुने दाम पर मकान बनाने के लिए जमीन बेच रहे हैं. सत्ता के गलियारे में इनके संरक्षक बैठे हैं.

मैं अपने शहर के सांस्कृतिक-शैक्षिक शिल्प की तलाश करना चाहता हूँ. इस खोज के क्रम में शहर का सबसे पुराना हाई स्कूल मिला टाउन स्कूल आरा जिसका निर्माण सन् 1882 में सैयद लुकमान हैदर ने किया था. शहर में बहुत कम लोग इस शख्सियत के बारे में जानते हैं. अब उनके परिवार का अता-पता शहर में नहीं है. वे शिया मुसलमान थे. शहर में कुछ शिया मुस्लिम परिवार हैं, लेकिन वे गुमनाम रहना चाहते हैं. वे बात करने से कतराते हैं.

सौ साल पहले, सन् 1917 में हित नारायण क्षत्रिय उच्च विद्यालय की स्थापना जमीरा के जमींदार परिवार ने की. आरा स्टेशन के निकट इतना बड़ा भूखंड जिसकी कीमत आज अरबों रुपये है, शिक्षा के लिए दान कर दिया. बाद में हर प्रसाद दास जैन के परिवार ने स्टेशन के निकट ही एच डी जैन कालेज का निर्माण कराया जो विशाल परिसर में स्थित है.

शहर में अनेक सड़कें हैं जिनका नामकरण तक नगर निगम ने नहीं किया है. सड़कों से फूटती, मोहल्लों में समाती गलियाँ हैं, लेकिन उन सरणियों की नम्बरिंग तक नहीं हो पायी है. कुछ पुरानी सड़कों और मोहल्लों के नाम मुझे चौंकाते रहे हैं; जैसे के जी रोड, महादेवा रोड, मिल रोड, सी के रोड, मनसा पांड़े बाग, मौलाबाग, कतिरा, करमन टोला, दूध कटोरा, मिल्की, नवादा, पकड़ी, आनंद नगर, क्लब रोड, महादेवा रोड, बाबू बाजार, महावीर टोला, शिवगंज, शीतल टोला, अनाईठ, आनंद नगर, अबर पुल, जवाहर टोला आदि. ये कौन थे जिनके नाम पर सड़कों-मोहल्लों का नामकरण हुआ? यह इतिहास के नव-लेखन का युग है. नई सत्ता चाहती है कि पुराने नामों की स्मृतियाँ जनमानस की स्मृतियों से पोंछ दी जाएं. पुराने नामों को खलनायकों के रूप में याद किया जाये. कुछ मशहूर भवनों के नाम बदले जा रहे हैं. कुछ सड़कों और शहरों के नाम बदले जा रहे हैं. ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ा जा रहा है. बस इसी तरह क्रांतिकारी बदलाव आयेगा. और हमारी शैक्षिक-सांस्कृतिक समस्याओं का समाधान हो जायेगा.

कुछ सड़कों के नाम में दिलचस्प इतिहास छिपा है. शहर के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक शिल्प की खोज के क्रम में एक सड़क मिली: के जी रोड. इसकी लंबाई मात्र एक किलोमीटर होगी: राजकीय कन्या इंटरस्तरीय स्कूल नवादा(आरा) से जज कोठी तिमुहान तक. कायदे से यह आरा रेलवे स्टेशन से ‘दी होली सेवियर चर्च’ तक लंबी होनी चाहिए क्योंकि जिनके नाम पर इसका नामकरण हुआ वो आरा स्टेशन उतरे थे और उनकी शाही बग्घी स्टेशन से ‘होली सेवियर चर्च’ तक गई थी/होगी. इस लंबाई में से मंगल पांडे पथ की लंबाई काट ली गई.

मैं उस के जी को जानना चाहता था जिसके नाम पर शहर ने अपने एक सड़क का नामकरण कर दिया. उस रोड के लोगों से पूछा. सामान्य आदमी नहीं जानता है. लगभग 75% प्रतिशत युवा पीढ़ी नहीं जानती है. पता चला ब्रिटेन का कोई सम्राट आरा आया था, उसी के नाम पर के जी रोड है. ब्रिटेन का सम्राट आरा जैसी छोटी जगह में क्यों आया था? और इतनी छोटी दूरी तय कर वापस चला गया! उस सम्राट की स्मृति में शहर वासियों ने एक सड़क का नाम रख दिया जबकि शहर में किसी स्वतंत्रता सेनानी या कवि-लेखक, शहीद अथवा कलाकार के नाम पर किसी सड़क का नाम नहीं रखा.

जब मैं ब्रिटिश सम्राट के, के जी को खोजने लगा इतिहास की पुस्तकों में, गूगल पर तो वह किंग जॉर्ज पंचम मिले. पर उनके आरा आगमन का विवरण पुस्तकों में या गूगल पर नहीं मिला. सम्राट जॉर्ज पंचम 6 मई, 1910 से 20 जनवरी, 1936 तक ब्रिटिश सम्राट थे. उस नाते वे ब्रिटिश भारत के भी सम्राट (Emperor) थे. उन्हीं के शासन काल में ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट हुई थी.

सन् 1911 में 12 दिसंबर को. उन्होंने 12 दिसंबर, 1911 को दिल्ली दरबार में ब्रिटिश भारत के सम्राट के रूप भार ग्रहण किया था. उनकी पत्नी सम्राज्ञी मेरी ने ब्रिटिश भारत की सम्राज्ञी के रूप में शपथ लिया था. वे लोग कलकत्ता से दिल्ली रेलमार्ग से पहुँचे थे. लंबी यात्रा में बीच में रविवार था. किंग जॉर्ज रविवार की प्रार्थना के बाद दिल्ली की यात्रा पर आगे जाना चाहते थे. आरा स्टेशन पड़ाव बना. आरा में सम्राट की प्रार्थना लायक चर्च नहीं था. आनन-फानन में वर्तमान सांस्कृतिक भवन के सामने उत्तर कैसरे हिन्द के विशाल मैदान में ‘दी होली सेवियर चर्च’ का निर्माण किया गया. किंग जॉर्ज और महारानी मेरी ने इस चर्च में रविवार को प्रार्थना के बाद विशेष ट्रेन से दिल्ली के लिए प्रस्थान किया. मेरे अनुमान से तब आरा स्टेशन से जज कोठी तक का इलाका बाग-बगीचों से भरा होगा, रिहायशी इलाका विकसित नहीं हुआ होगा. पच्चीस वर्ष पूर्व तक सूर्यास्त के बाद जज कोठी इलाके में सन्नाटे की वजह से लोग आना जाना पसंद नहीं करते थे. चर्च के लिए यही ज़मीन क्यों चुनी गई? आरा स्टेशन से सटे उत्तर से लेकर राजकीय कन्या इंटरस्तरीय स्कूल तक सब सरकारी भूमि थी. स्टेशन परिसर से उत्तर शाहाबाद पथ प्रमंडल का निरीक्षण भवन परिसर, उसके उत्तर अनुमंडलीय पुलिस पदाधिकारी का आवासीय परिसर, उससे सटे उत्तर पुलिस अधीक्षक का विशाल आवासीय परिसर, इसके बाद सोन नहर प्रमंडल का कार्यालय एवं कार्यपालक अभियंता का कार्यालय परिसर–सब एक दूसरे से सटे-सटे. क्या कोई अँग्रेज किसी सरकारी कार्यालय परिसर में किसी चर्च के निर्माण की आज्ञा दे सकता था? कदापि नहीं. अब तो बिहार स्टेट पथ परिवहन निगम के बस पड़ाव परिसर में हनुमान जी और माँ काली का मंदिर बन गया. किसी ने कुछ नहीं बोला. मुख्य डाकघर परिसर में हनुमान जी का मंदिर बन गया. बिना किसी इजाजत के. विश्वविद्यालय परिसर में हनुमान जी का मंदिर बन गया.

पुलिस अधीक्षक आवास के पश्चिम डुमरावँ महाराज का विशाल परिसर था. एकदम खाली. सन् 1970 के बाद प्लाटिंग कर बिका. इसमें चर्च नहीं बन सकता था. के जी रोड के पूरब नवादा गाँव था जो अब आरा शहर में नवादा मोहल्ले के रूप में समाहित हो गया है. के जी रोड से पूरब राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय का निर्माण किंग जॉर्ज के आरा आगमन के छह वर्ष बाद सन् 1917 में हुआ. इस स्कूल के सामने रोड के पश्चिम का भूखंड आज भी खाली पड़ा है जिसमें पान की गुमटियाँ और चाय-पकौड़ी आदि की अस्थाई दुकानें हैं. नवादा मोहल्ले के पश्चिम के भूखंड में बाग बगीचा आबाद होगा. अभी भी भीतरी भाग में बाग बगीचे हैं. यह निजी जमीन रही है, इसमें चर्च बनना संभव नहीं रहा होगा. डॉ बी के शुक्ला के क्लीनिक के पास के जी रोड पश्चिम दिशा में मुड़ जाती है. आगे स्वामी सहजानंद स्वामी के स्मारक के पास के जी रोड उत्तर की ओर मुड़ जाती है और जज कोठी तिमुहान तक जाकर समाप्त हो जाती है. इसी रोड के पूरब आरा के प्रधान न्यायाधीश का आवास है. पहले इस आवास का मुख्य गेट उत्तर दिशा की ओर था, हाल-फिलहाल पश्चिम ओर के जी रोड में जज परिसर के तीन विशाल गेट खुल गये हैं. इसलिए’ दी होली सेवियर चर्च’ का निर्माण सन् 1911 में कैसरे हिंद के विशाल मैदान में वर्तमान सांस्कृतिक भवन के सामने उत्तर में बना.

सम्राट जॉर्ज पंचम का जीवन मुझे बड़ा दिलचस्प लगता है. कायदे से उसे ब्रिटेन का सम्राट नहीं होना था. उसका जन्म 3 जून, 1865 को क्वीन विक्टोरिया के दूसरे पोते के रूप में हुआ. क्वीन विक्टोरिया ब्रिटिश साम्राज्य की साम्राज्ञी थीं. उनके बाद उनका पुत्र एडवर्ड सप्तम सम्राट बना जिसका दूसरा पुत्र जॉर्ज फ्रेडरिक अर्न्स्ट था. प्रिंस अल्बर्ट विक्टर उसका बड़ा भाई था. बड़े भाई के रहते जॉर्ज सम्राट नहीं बन सकता था. सन् 1901 में महारानी विक्टोरिया की मृत्यु हो गई. एडवर्ड सप्तम सम्राट बने. जॉर्ज दोनों भाई 1877 से 1892 तक रॉयल नेवी में प्रशिक्षण में थे. उसी दरम्यान सन् 1892 में प्रिंस अल्बर्ट विक्टर का निधन न्यूमोनिया से हो गया. और प्रिंस जॉर्ज साम्राज्य के उत्तराधिकारी हो गये. प्रिंस जॉर्ज फ्रेडरिक अर्न्स्ट के पिता एडवर्ड सप्तम अधिक समय तक ब्रिटिश सम्राट के रूप में जीवित नहीं रहे, 6 मई 1910 को उनकी मृत्यु हो गई और प्रिंस जॉर्ज फ्रेडरिक अर्न्स्ट, जॉर्ज पंचम के नाम से ब्रिटिश सम्राट घोषित हुए. उनका राज्याभिषेक 22 जून, 1911 को हुआ.

यह दिलचस्प है कि प्रिंस जॉर्ज पिता की मृत्यु पर भारतीय पुत्र की तरह दुखी हुए और उद् गार व्यक्त किया कि उन्होंने एक अच्छा मित्र, सलाहकार और स्नेहिल पिता खो दिया. जॉर्ज पंचम की ऐसी भावाभिव्यक्ति ठीक ही लगती है क्योंकि सन् 1901 में एडवर्ड सप्तम जैसे ही सम्राट बने उन्होंने एकमात्र उत्तराधिकारी प्रिंस जॉर्ज और मेरी को साम्राज्य के देशों का दौरा कर शासनिक अनुभव प्राप्त करने के लिए कहा. प्रिंस जॉर्ज ने पत्नी मेरी के साथ साम्राज्य के उपनिवेशों जिब्राल्टर, माल्टा, पोर्ट सईद, अदन, श्रीलंका, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मॉरिशस, साऊथ अफ्रीका, कनाडा आदि देशों का दौरा किया. इस दौरे की परिकल्पना सचिव जोसेफ चैम्बरलेन और प्रधानमंत्री लॉर्ड सॉलिसबरी ने की थी. बाद में प्रिंस जॉर्ज और मेरी ने नवंबर1905 से मार्च 1906 तक भारत का दौरा किया. इस दौरे में प्रिंस जॉर्ज ने महसूस किया कि ब्रिटिश अधिकारी भारतीय लोगों के साथ जातीय(Racial) भेदभाव करते हैं. उन्होंने महसूस किया कि स्थानीय प्रशासन में भारतीयों से अपेक्षित सहयोग नहीं लिया जाता.

जॉर्ज पंचम के शासन काल (1910से20जनवरी,1936) में दिलचस्प घटनाएँ दुनिया में घटीं जो शताब्दियों में घटती हैं. सम्राट ने प्रथम विश्वयुद्ध, ऑटोमन अम्पायर का ध्वंस, रूस की जारशाही का अंत, जर्मनी में मित्र-रिश्तेदार विल्हेल्म द्वितीय की सत्ता का अंत, समाजवादी-साम्यवादी विचारधारा का प्रसार, रुस में साम्यवादी क्रांति के साथ जर्मनी में नाजीवाद और इटली में फासीवाद का उदय देखा. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन ने जोर पकड़ा. रिपब्लीकनवादी विचार का उदय हुआ. रुस का जार निकोलस द्वितीय सम्राट जॉर्ज पंचम का ममेरा भाई था. जारशाही के पतन के बाद वह ब्रिटेन में आश्रय चाहता था, लेकिन जॉर्ज ने मना कर दिया. जर्मनी का विल्हेल्म द्वितीय भी ब्रिटेन में आश्रय चाहता था, उसे भी मना कर दिया जॉर्ज ने.

इतिहास का यह दिलचस्प अंतरविरोध है कि एक ओर प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ऑटोमन साम्राज्य का अंत हो गया, रुस में जारशाही का अंत हो गया, जर्मनी में शक्तिशाली विल्हेल्म द्वितीय की सत्ता जाती रही तो दूसरी ओर ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार हुआ और वह ताकतवर बन कर उभरा. अमेरिकी साम्राज्य भी ताकतवर बनकर उभरा. यह भी दिलचस्प है कि एशियाई-अफ्रीकी मुल्कों में स्वतंत्रता आंदोलन तेज़ हो गया. दुनिया में साम्राज्यवाद के खिलाफ प्रतिरोध आंदोलन तेज हो गया.

जॉर्ज पंचम ने मेरी से प्रेम विवाह किया था. मेरी रिश्ते में उसकी चचेरी बहन लगती थी. पहले मेरी जॉर्ज के बड़े भाई से प्यार करती थी,  जॉर्ज के बड़े भाई की मृत्यु के बाद, वह जॉर्ज से प्रेम करने लगी.

जॉर्ज को टिकट संग्रह की हॉबी थी. वह जबरदस्त फिलेटेलिस्ट था. जॉर्ज ने ब्रिटिश भारत के सम्राट के रूप में 12 दिसंबर, 1911 को दिल्ली दरबार में गण्यमान्य लोगों की उपस्थिति में उपाधि धारण की. वह अकेला ब्रिटिश सम्राट है जिसने भारत आकर भारतीय सम्राट की उपाधि धारण की. उसी के काल में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट हुई. वह एकमात्र ब्रिटिश सम्राट था जिसने मेरे कस्बाई शहर आरा की यात्रा की. सम्राट की उपाधि धारण करने के बाद उसने नेपाल में शिकार यात्रा की और बेमतलब पागलों की तरह उसने 21 बाघ, 8 गैंडा, एक भालू को मार डाला. शिकार के मामले में वह खब्ती था. 18 दिसंबर,1913को उसने छह घंटे में एक हजार तीतरों को मार डाला. यह उसके व्यक्तित्व का अंतरविरोध ही था, बेमतलब पशु पक्षियों को मारना.

कुछ भी हो, सम्राट जॉर्ज पंचम इतिहास का एक अविस्मरणीय व्यक्तित्व था. वह मेरे छोटे से शहर में आया था. “दि होली सेवियर चर्च”और के जी रोड, आरा उसकी याद दिलाते हैं।’दि होली सेवियर चर्च’ की ज़मीन पर भू-माफियाओं की नजर गड़ गई है. यह खूबसूरत चर्च पुस्तकालय के रूप में संरक्षित रह सकता है, लेकिन वर्तमान नौकरशाही और राजनीतिज्ञों के पास कोई सांस्कृतिक दृष्टि नहीं है. धन कहीं से मिले वे लूट लेंगे, विरासतों, धरोहरों को बेंच देंगे, ढहा देंगे. ‘दी होली सेवियर चर्च”की जिंदगी ज्यादा दिन नहीं बची है, हालाँकि इसका शिल्प और सौंदर्य आरा की शान है. एक स्टूडियो वाले से लगातार दस दिन इसका फोटो खींचने के लिए निहोरा करता रहा, वह टालता रहा. मैं समझ गया वो चर्च की फोटो नहीं खींचेगा. फिर भी फ़ोटो खींच लिया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here