Tuesday, September 17, 2019
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मानवाधिकार की लड़ाई के लिए इस महिला को मिली 38 साल...

शिखा कौशिक/ दुनिया में कुछ मिसालें ऐसी मिलती रहती हैं जो बुरे वक्त में भी आगे बढ़ने का हौसला देती हैं. यह मिसाल भी उनमें से एक है. ईरान की जेल में कैद अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मानवाधिकार की लड़ाईलड़ने वाली अधिवक्ता नसरीन सोतौदेह को हाल ही में वहाँ की सरकार ने 38 साल की कैद और 148 कोड़े मारने की सज़ा सुनाई. ईरान में धार्मिक ताकतें सत्तारूढ़ हैं और किसी भी विपक्ष की आवाज को कुचलने में भरोसा करती हैं. ऐसे में सोतौदेह वहाँ के कई विपक्ष के नेताओं का केस लड़ चुकी हैं. वे उन महिलाओं का केसआगे बढ़कर लड़ रही थीं जिन्हें हिजाब नहीं लगाने के लिए सरकार ने सजा दे दी है. इसके अतिरिक्त नाबालिगों को मृत्यु की सजा के खिलाफ भी नसरीन आवाज बुलंद कर चुकी हैं. किसी भी धर्म आधारित सत्ता के लिए यह बर्दाश्त करना बड़ी बात है, सो इनको देश के खिलाफ जासूसी करने और ईरान के सर्वोच्च नेता के खिलाफ प्रोपगंडा के आरोप में जून में गिरफ्तार कर लियागया था. इसके पहले इनको 2010 में भी गिरफ्तार किया गया था. उस समय भी उनके ऊपर राष्ट्र के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया था. जेल में उन्होंने भूख हड़ताल किया. इनको जेल भेजने काअंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी विरोध हुआ. आखिरकार ईरानी सरकार ने आधी सजा के बाद ही उन्हें रिहा कर दिया. यूरोप के संसद ने उन्हें सखारोव मानवाधिकार अवार्ड से भी नवाज़ा. हाल में हुए सजा पर सोतौदेह के पति रेज़ा खंडन ने फेसबुक पर लिखा कि उनकी पत्नी को कई दशकों के लिए जेल और 148 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है. यह ईरान के हिसाब से भी देखें तोबहुत कड़ी सजा है. इसके पहले इनको 2010 में भी गिरफ्तार किया गया था. इनको जेल भेजने का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी विरोध हुआ. आखिरकार ईरानी सरकार ने आधी सजा के बाद ही उन्हें रिहा कर दिया. यूरोप के संसद ने उन्हें सखारोव मानवाधिकार अवार्ड से भी नवाज़ा ईरान सरकार का आरोप है कि यह महिला वकील देश की  राष्ट्र के खिलाफ प्रोपगंडा कर रही है. सरकार ने इनपर हिजाब नहीं पहनने का भी आरोप लगाया था. हिजाब ईरान में महिलाओं के सरढकने का पारंपरिक तरीका है. नसरीन डिफेंडर्स ऑफ़ ह्यूमन राईट सेंटर संस्था की सदस्य रही हैं. यह संस्था 2001 में स्थापित हुई थी और जरुरतमंदो को कानूनी सहायता देने का काम करती थी. न्यायालय में प्रैक्टिस करने के साथ-साथ उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता शीरीन अबादी के साथ मिलकर यह गैर-लाभकारी संस्था शुरू  की थी.  इस संस्था को वहाँ की सरकार ने 2008 में बंद कर दियाथा. पचास से अधिक की उम्र में ईरान में मानवाधिकार के लिए संघर्ष कर रही इस महिला के दो छोटे बच्चे हैं. ईरान में कई लोगों को मानवाधिकार के बारे में बोलने के लिए सजा दी गई है और नसरीनसोतौदेह उनमें से एक हैं. महिलाएं ईरानी शासन के निशाने पर अधिक रही हैं. नसरीन सोतौडेह से ईरान सरकार इतना क्यों डरती है? ऐसा इसलिए कि नसरीन लागातार ईरान में विकट होती मानवाधिकार की समस्या पर प्रकाश डालती रही हैं. नसरीन उन मामलों को लेने के लिए तैयार हो जाती हैं जिनको अन्य वकील अमूमन लेने सेबचते हैं. नसरीन ने चर्चित ज़ाहरा बहरामि का भी केस लड़ा था. जाहरा एक डच-ईरानी महिला थीं जो 2009 में चुनाव के बाद के प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए गिरफ्तार कर ली गईं थीं. जाहरा कोआखिरकार बिना किसी अग्रिम सूचना के ईरानी सरकार ने मृत्यु की सजा दे दी थी. इन बड़े हाई प्रोफाइल मामलों के अतिरिक्त नसरीन ने कई बच्चों के केस भी लड़े. ईरान दुनिया के कुछेक देशों में है जहां बच्चों (अठारह साल से कम) को भी मृत्यु दंड दिया जाता है. उनके इस तरहके केस लड़ने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान के मानवाधिकार को लेकर बुरे रिकॉर्ड की पोल खोलती है. गिरफ्तार होने के पहले उन्होंने सुधारवादी पत्रकार हेश्मत ताबर्ज़ादी, विपक्ष के नेता परवीन अर्दालान इत्यादि के भी केस अपने हाथ में लिए थे.

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