Monday, August 10, 2020
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गांधी पर प्रश्नचिन्ह लगाने की तैयारी?

सत्य नारायण निशोद/ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को लेकर दक्षिणपंथी नेताओं के बयान पहली बार नहीं आए है। इससे पहले भी कई...

यार तूने ये क्या किया!

रजनीश जे जैन/ यह लेख जब आप पढ़ रहे हैं तब देश, चुनाव की मेराथन प्रक्रिया से मुक्त हो परिणामों के आंकलन में जुट गया है।...

नई सरकार की सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?

उमंग कुमार/ भारत जैसे देश के लिए सही नीतियाँ बहुत ज़रूरी हैं. वजह यह कि जितने बड़े स्तर पर इन नीतियों का क्रियान्वयन होता है...

राजनीति में उर्मिला मतोंडकर!

 रजनीश जे जैन/ कोई भी अभिनेता हमेशा दो छवियों के सहारे अपना जीवन बिताने को बाध्य होता है। पहली उसकी सिनेमाई छवि और दूसरी, परदे...

हर्षवर्धन के हिसाब से वायु प्रदुषण की समस्या विकराल नहीं है

उमंग कुमार/ इस लोकसभा चुनाव में लोग, खासकर दिल्ली वासी थोड़ी राहत महसूस कर रहे थे कि सभी राजनितिक दलों ने अपने मैनिफेस्टो में वायु...

भाजपा और कांग्रेस के मैनिफेस्टो की पड़ताल

उमंग कुमार/ वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले चरण में दो दिन बाकी हैं और आखिरी समय में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी ने भी अपना मैनिफेस्टो जारी किया. संकल्प पत्र के नाम से जारी इस मैनिफेस्टो में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसपर चर्चा होगी, जैसा कि कांग्रेस के मैनिफेस्टो के साथ हुआ. पिछले सप्ताह जारी अपनेमैनिफेस्टो में कांग्रेस पार्टी ने न्याय स्कीम की घोषणा की और कहा कि देश के गरीबों को सालाना 72 हज़ार की आय सुनिश्चित की जायेगी. इस योजना की वजह से कांग्रेस के मैनिफेस्टो पर लागातार बात हुई. पक्ष और विपक्ष दोनों में. यहाँ तक भाजपा के कई नेता और नीति आयोग के राजीव कुमार तक को इसकेखिलाफ बोलने की जरुरत आन पड़ी, जिसके लिए निर्वाचन आयोग ने उनकी खिंचाई भी की. देश में बेरोजगारी चरम पर है. मोदी सरकार के कार्यकाल में किसानों ने लागातार प्रदर्शन किया है. ऐसे में सवाल है कि भाजपा के मैनिफेस्टो में इतनी उदासी क्यों! इन समस्याओं से निपटने के लिए इस मैनिफेस्टो में कोई दूरदृष्टि क्यों नहीं दिखाई गई है!  इसकी मुख्य वजह है, मोदी सरकार की मजबूरी, जिसमें वहयह मान नहीं सकते कि देश में कोई बड़ी समस्या है. जैसा कि अमित शाह ने मैनिफेस्टो के जारी होने के मौके पर बोला कि देश अब महाशक्ति बन चुका है. अब, जब महाशक्ति बन ही चुका है तो कोई बड़ा विज़न लाने की जरुरत ही क्यों है. नरेंद्र मोदी की मजबूरी यह है कि अगर इन समस्याओं को ग़लती से मान लिया तो देश के लोग उनसे हिसाब मांगेंगे कि आपने अपने कार्यकाल में इन सब मुद्दों पर क्या किया. इसीलिए मोदी अपने चुनाव प्रचार में भी सिर्फ पकिस्तान, राष्ट्रवाद या फिर कांग्रेस के कार्यकाल की बातें कर रहे हैं. उन्हें मालूम है कि अगरगलती से लोगों का ध्यान देश की समस्याओं की तरफ आ गया तो भारी मुश्किल हो जायेगी. दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में न केवल देश में व्याप्त भीषण बेरोजगारी, कृषि संकट, स्वास्थय और शिक्षा से जुड़ी समस्या को उठाया बल्कि इन समस्याओं से निपटने के लिए निदान भी बताये. इसमें किसानों के लिए अलग से किसान बजट, गरीबों को 72,000 की सालाना आमदनी सुनिश्चित करना, मृदाक्षरण को देखते हुए युवाओं को पंचायत से जोड़ने की बात जिससे न केवल मृदा क्षरण रुकेगा बल्कि युवाओं को रोजगार भी मिलेगा. स्वास्थ्य के लिए जीडीपी का तीन प्रतिशत और शिक्षा के लिए जीडीपी का 6 प्रतिशत निर्धारित करने का वादा. ये सब लोकलुभावने वादे हो सकते हैं पर मैनिफेस्टो के मामले में कम सेकम कांग्रेस ने बाजी मार ली है. मैनिफेस्टो में भाजपा का वादा राम मंदिर का निर्माण धारा 370 हटाना 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना धारा 35 ए  को जिसके तहत कोई बाहरी कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था मैनिफेस्टो में कांग्रेस का वादा न्याय योजना के अंतर्गत गरीबों के लिए न्यूनतम 72 , 000 सालाना आय सुनिश्चित करना शिक्षा के क्षेत्र में बजट को  बढ़ाकर 2023-24 तक जीडीपी का 6% करना महिला आरक्षण बिल को 17 वीं लोकसभा के पहले सत्र  में पास करना राइट टू हैल्थ केयर अधिनियम लागु करना किसानों के लिए एक अलग किसान बजट बेरोजगारी से निपटने के लिए मार्च 2020  तक सभी सरकारी रिक्त पदों पर बहाली

विवादित अधिकारी के सेवानिवृत होने के बाद प्रधानमंत्री ने किया हस्तक्षेप,...

शिखा कौशिक/ कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष असीम खुराना जिनके इस्तीफे की मांग दो साल से चल रही है, को कार्यकाल पूरा होने के बाद, प्रधानमंत्री...

इस चुनाव ग्रामीण जनता बनेगी भाग्य विधाता!

शिखा कौशिक/ दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक उत्सव का दिन तय हो चुका है और भारत के आम चुनाव (2019) में लगभग 90 करोड़ (900 मिलियन) मतदाता भाग...

महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने को लेकर कांग्रेस और भाजपा कब आगे...

उमंग कुमार/ राजनितिक दलों के लिए अब महिलाओं को नज़रअंदाज करना मुश्किल होगा. यह तो तय है. लेकिन क्या दो बड़े राजनितिक दल कांग्रेस पार्टी...

क्या जनवरी में भाजपा को नया पार्टी अध्यक्ष मिलने वाला है?

उमंग कुमार/ क्या अमित शाह की पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी खतरे में हैं? क्या 2019 का लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी, गुजरात के दो धुरंधर-...

13 ऐसे सूत्र जो बता रहे हैं कि भाजपा 2019 में...

जितेन्द्र राजाराम/  क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे पता चल पाए कि भारत में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में किस दल की सरकार...

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