गूगल के बारे में 10 मजेदार बातें

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सौतुक डेस्क/

ज़्यादातर  छात्र शोध पत्रों में मात्र उत्तीर्ण होकर ही खुश हो जाते हैं। लैरी पेज औए सर्जे ब्रिन ने इन छात्रों के लिए एक पूरे साम्राज्य की स्थापना की है।

जब वर्ष 1995 में पेज और ब्रिन ने इन्टरनेट के गणितीय गुणों पर शोध प्रारंभ किया था तब उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनका यह शोध एक डिजिटल क्रांति के अविष्कार के रूप में जाना जायेगा जिसे अब हम ‘गूगल’ के नाम से जानते हैं।

आज के जिस अंतर्राष्टीय तकनीकी(टेक) कम्पनी की कीमत कई देशो के जीडीपी से भी अधिक हैं, उस गूगल की शुरुआत बहुत ही सामान्य तरीके से हुई थी।

आप शायद इसे हर दिन इस्तेमाल करते हों, लेकिन शायद ही आप गूगल के बारे में यह जानते हों. एसईओ ब्रिस्ब्रेन एजेंसी ने गूगल के शीर्ष तथ्यों को एक साथ सामने रखा है.

गूगल असल में ‘प्रोजेक्ट बैकरब’ था

जब ब्रिन और पेज ने पहले इंटरनेट पर सर्च करने के लिए पहला एल्गोरिथ्म विकसित किया तो उन्होंने इसे ‘बैकरब’ का नाम दिया। यह गूगल सर्च इंजन का शुरूआती ढांचा भर था.

ऐसा कहा जा सकता है कि ‘बैकरब’ के नाम को ‘गूगल’ में बदलना एक बेहतर फैसला था.  आप सोच कर देखिये, आप को कुछ सवालों के उत्तर चाहिए हों और आपको लगातार कहना पड़े “जरा इसे बैकरब करके देखते हैं।” सोचिये ऐसा हर रोज़ करना पड़े तो कैसा लगेगा।

गूगल की वर्तनी (स्पेलिंग)  की गलती है

यह सच है कि, गूगल शायद अब तक की सबसे बड़ी और सार्वजानिक गलती है। पेज और ब्रिन,सर्च इंजन का नाम “GOOGOL” रखने पर सहमति बना चुके थे, जो कि  एक लम्बे अंक(एक अंक संख्या 1 के आगे असंख्य शून्य लगे हो) को ध्यान में रखते हुए रखा गया था।

जब डोमेन नाम को रजिस्टर करने की बात आयी तब वे यह जानकर बहुत खुश हुए (GOOGLE.COM) ही उपलब्ध था, इससे पहले तोGOOGLE  कोई शब्द ही नहीं था.

गूगल के संस्थापक मूल रूप से एक साथ नहीं थे

वर्ल्ड वाइड वेब में समान तरह के दृष्टिकोण और रुचियों के बावजूद, पेज और ब्रिन शुरू से दोस्त नहीं थे। दोनों जब भी मिलते हर विषय पर चर्चा करते और भिड़ते रहे. तमाम बहसों के बावजूद, जूनून को लेकर, वे दोनों दोस्त बन गए और अंत में एक शोध के लिए एक ही टीम के साथ जुड़ गए जिसने इन्टरनेट की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया।

पहला गूगल कंप्यूटर, लीगो इंटों से बना था

यह सुनने में एक बहुत पुरानी किवदंती की तरह लगता है पर कई मुश्किलों का सामना करने की वजह से गूगल टीम ने, (गूगल के संस्थापक भी एक वक़्त पर गरीब छात्र थे ) लेगो A इंटों द्वारा कस्टम मेड सर्वर टैंकों को तैयार किया गया था। आज ,गूगल डाटा केन्द्रों में एक बिलियन से भी ज्यादा सर्वरों का संचालन करता है। जो कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर हर रोज की जाने वाली 3.5 बिलियन वेब खोजों को संभालता है।

गूगल का पहला बावर्ची

वर्ष 1999 में जब गूगल के कर्मचारियों ने यह जानने की कोशिश की, कि बावर्ची के रूप में किसे भर्ती किया जाये तो उन्हें पता चला कि इसके लिए आयोजित प्रतियोगिता चार्ली एयर्स ने जीता है जो इससे पहले अमेरिकन रॉक बैंड ‘द ग्रेटफुल डेड’ के लिए खाना पकाते थे। वे इस पद पर 7 वर्ष तक कार्यरत रहे।

गूगल ‘क्रिया’ के रूप में

ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने वर्ष 2006 में अधिकारिक तौर पर गूगल को एक क्रिया के रूप में शामिल किया। गूगल का प्रभाव जब इतना व्यापक हो गया तब ‘TO GOOGLE’ शब्द का प्रयोग इन्टरनेट से जानकारी प्राप्त करने के लिए लिया जाने लगा।

गूगल को लगभग एक मिलयन डॉलर से कम में बेचा गया था

जब वर्ष 1999 में, जॉर्ज बेल को एक मिलियन में गूगल को खरीदने का प्रस्ताव आया था तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया था। जब कीमत 750,000 डॉलर तक गिरा दी गई तब भी उन्होंने यह प्रस्ताव, यह कहकर ठुकरा दिया कि कीमत अभी भी बहुत ज्यादा है। बेल ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस कंपनी को उन्होंने ठुकराया है वह आगे चलकर हजारों मिलियन डॉलर की कीमत के साथ एक इतिहास बन जाएगी। बेल के इनकार का निर्णय विश्व इतिहास में सबसे ख़राब व्यवसायिक निर्णयों के रूप में स्थापित किया गया है।

एक ऐसा सर्च इंजन, जो आपके दिमाग को पढ़ सकता है

अप्रैल 2000 में, गूगल ने “मेंटलप्लेक्स” नाम के सर्च इंजन के विमोचन(रिलीज़) की घोषणा की, ऐसा सर्च इंजन जो कि आपके मस्तिष्क को पढ़कर आपके खोज के परिणामों को निर्धारित कर सकता है? यह अविश्वनीय मालूम पड़ता है न ?

मेंटलप्लेक्स वास्तव में गूगल पर उड़ने वाली पहली अफवाह थी जो लगभग हर साल अप्रैल फूल डे के दिन घोषित होती थी। गूगल से जुड़ी हुई ऐसी ही कुछ और अफवाहें भी थीं, जैसे एक पशु अनुवादक, एक गूगल मानचित्र खजाने की खोज, खाद्य केबल (तार) फाइबर और यह घोषणा की गूगल मंगल ग्रह पर एक कॉलोनी बना रहा है। आज गूगल की कीमत 350 बिलयन डॉलर से भी ज्यादा है, ऐसा ही रहा तो ऊपर गूगल के बारे में उड़ी आखिरी अफवाह अगर वास्तविक रूप धारण कर ले तो आश्चर्य की बात नहीं होगी।

मैदानों की देखरेख के लिए बकरियां

वर्ष 2009 से ही गूगल ने मैदानों की देखभाल करने की व्यक्तियों की जगह लगभग 200 बकरियों को किराये पर रखा जो कि हेडक्वार्टर की चोटी से दिखने वाले मैदान को हरा भरा रखने में मदद करती है। गूगल एक बार में बकरियों को लगभग एक हफ्ते के लिए किराये पर रखता है जो कि घास को खाते हुए मैदान से बीजों को हटाती थी तथा खाद को बढाती थी।

गूगल कार्यालय का कोई भी हिस्सा खाने के स्थलों से 150 फीट से अधिक दूर नहीं है

गूगल कर्मचारियों के भत्ते बहुत अच्छी तरह से जाने जाते हैं। उसके कार्यालयों में चलने वाले नैप पॉड्स और जिम के बारे में भी सबने सुना है जहाँ मुफ्त में नाश्ता और दिन का खाना भी दिया जाता है। यह ऐसे भत्ते और सुविधाएँ हैं जिनकी हम सिर्फ कल्पना कर सकते हैं। यहाँ पर कर्मचारी का ऑफिस कहीं भी हो, वे खाने (खाने के स्थानों) से 150 फीट से ज्यादा दूर नहीं हो सकते।

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