मार्क जकरबर्ग के बारे में 13 ऐसी बातें जो आप नहीं जानते

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मार्क जकरबर्ग एक ऐसे प्रतिभाशील व्यक्ति हैं जिन्होंने फेसबुक के साथ साथ अन्य कई सॉफ्टवेयर और प्लेटफार्म बनाए हैं, हालाँकि, फेसबुक ऐसा सॉफ्टवेयर है जिसने सबसे ज्यादा लोकप्रियता हासिल की है तथा जिसने वैश्विक स्तर पर बहुत अधिक मुनाफा कमाया है जो कि सभी के द्वारा इस्तेमाल किया गया है, चाहे वह कोई हाई स्कूल का छात्र हो या कोई राजनेता जो कि अपना प्रचार करने तथा लोगो तक पहुँचने के लिए इस मंच का इस्तेमाल करते हैं। इसके द्वारा एक ऐसा माध्यम सामने आया है जिसके द्वारा हम प्रचार और क्रय-विक्रय के क्षेत्र में अलग मुकाम हसिल कर सकते हैं। मार्क जकरबर्ग की कहानी बहुत ही मजेदार और प्रेरणादायक है। सोशल नेटवर्किंग आन्दोलन फेसबुक के साथ ही शुरू हुआ था जिसका विचार मार्क ही दुनिया के सामने लाये थे।

आज जानिये कुछ ऐसी बातें जो आप मार्क जकरबर्ग के बारे में नहीं जानते:

मार्क कलर ब्लाइंड हैं

फेसबुक की सारी ब्रांडिंग रणनीति और एप का कलर  नीला है इसका एकमात्र कारण यही है कि मार्क रंग पहचानने में अक्षम हैं। जन्म के बाद ही, मार्क लाल, हरे रंग को पहचानने में सक्षम नहीं थे , वह पूर्ण रूप से सिर्फ नीले रंग को ही पहचान सकते हैं। नतीजतन, फेसबुक को नीले रंग का ही बनाया गया, जिसे मार्क को आसानी से देख सकते थे। तब से ही नीला रंग, फेसबुक की हर ब्रांडिंग रणनीति का समानार्थी बन गया है। इन्टरनेट पर इस बात को लेकर कई अफवाहें थी कि मर्क के चेहरे से नीला रंग झलकता है इसलिए फेसबुक का रंग नीला रखा गया है। उनकी रंग पहचानने की अक्षमता ने इन सारी अफवाहों को ठंडा कर दिया है।

मार्क शाकाहारी हैं

इस प्राइवेट आइलैंड पर अगर आप भुने मांस के साथ दिखाई दिए तो आपको छोड़ा नहीं जाएगा, कृतज्ञता के अभ्यास को ध्यान में रखते हुए मार्क ने वर्ष 2011 में अपने दैनिक आहार से मांस को हटा दिया था। वह उस खाने से और जुड़ाव महसूस करना चाह रहे थे जिसे वह खा रहे हैं,। इसलिए, वह उन जानवरों को खाना नहीं चाहते, जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी त्याग दी, जिससे हम उनके शरीर का उपभोग कर सकें ।

साझेदारी में बनाया गया सिनैप्स मीडिया प्लेयर

जब जकरबर्ग हाई स्कूल में थे, तब उन्होंने synapse मीडिया प्लेयर नाम से एक संगीत(म्यूजिक) एप बनाया था जो आर्टिफिशियल इंटेलिजंस से उपयोगकर्ता के संगीत सुनने की आदतों का विश्लेषण करता था। एओएल और माइक्रोसॉफ्ट ने मिल कर उनसे संपर्क किया तथा कई मिलियन डॉलर की पेशकश इस आग्रह के साथ की, कि वे इस एप्लीकेशन को और डेवलप करे। जकरबर्ग ने इन ऑफरों को ठुकरा दिया तथा और हावर्ड विश्वविध्यालय में जाने का फैसला किया और कॉलेज में प्रवेश करने के बाद उन्होंने इस प्रोजेक्ट को वहीं छोड़ दिया।

मार्क द्वारा बनाया गया फेसमाश

वर्ष 2003 में, हावर्ड विश्वविध्यालय में रहते हुए जकरबर्ग ने facemash नाम की वेबसाइट बनाई थी। ये ‘hot or not’ (सुन्दर या असुंदर), तरीके के वेबसाइट थी, जिसमें हावर्ड के छात्रावास के छात्रों की विभिन्न छवियाँ (फोटोग्राफ) थे, और इसके माध्यम से सर्वश्रेष्ठ दिखने वाले छात्र के चुनाव को लेकर मतदान किया जा सकता था। लाँच के कुछ दिनों के भीतर ही, स्कूल ने इसे बन्द कर दिया तथा कारण दिया कि यह व्यक्तिगत सुरक्षा और गोपनीयता का उल्लघन था। वेबसाइट को रद्द करने के वाबजूद, जकरबर्ग को सार्वजनिक रूप से माफ़ी भी मंगनी पड़ी facemash में उपयोग किये गये कोड ही फेसबुक के निर्माण का पहला चरण थे। यह वेबसाइट, नीलामी में लगभग 30,000 डॉलर में बेचीं गई।

फेसबुक मार्क के छात्रावास के कमरे से लाँच किया गया था

हावर्ड के facemash  बन्द करने के बाद, जकरबर्ग ने फरवरी,2004 में अपने छात्रावास के कमरे से ही the facebook.com नाम की नई वेबसाइट विकसित की थी। इस साईट का आधार कॉलेज के छात्रों को डिजिटल क्षेत्र में जुड़े रहने में सक्षम बनाना था। जब मार्क कैलिफ़ोर्निया के पालो आल्टो तकनीकी केंद्र में पहुँचे तभी उन्होंने वेबसाइट के मान से ‘द’ हटाने का फेसला किया, और इस प्रकार ‘फेसबुक’ का निर्माण हुआ।

विन्कल्वास जुड़वाँ भाइयों के साथ लम्बी क़ानूनी लड़ाई

जकरबर्ग फेसबुक को लेकर कई क़ानूनी विवादों में शामिल रहे हैं। उनका सबसे लम्बा क़ानूनी विवाद कैमरुन उर टाइलर विन्क्लवास भाइयों के साथ चला था जिन्होने उनपर फेसबुक का आईडिया(विचार) चुराने का आरोप लगाया था। उन्होंने ने मार्क को सीज एंड देजिस्ट(cease and desist) लैटर भेजा था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्होंन मार्क को हार्वर्ड कनेक्शन नामक सोशल नेटवर्किंग प्रोजेक्ट के लिए किराये पर रखा था परन्तु जकरबर्ग ने इसी समयकाल में thefacebook।com वेबसाइट को विकसित किया था। यह लड़ाई आखिरकार 2009  में ख़त्म हुई और इसके निपटारे के लिये मार्क को लगभग 60 मिलियन डॉलर देने पड़े। इस क़ानूनी युद्ध में लगभग पांच साल लग गए और  इसके लिए उन्हें कई न्यायलयों के चक्कर भी लगाने पड़े।

फोर्ब्स के सबसे अमीर लोगो की सूची में

मार्क, वर्ष 2011 में, जकरबर्ग 17।5 बिलयन डॉलर की कीमत के साथ, फोर्ब्स द्वारा जारी की गयी युनाइटेड स्टेटस के 20 सबसे अमीरी लोगो की सूंची में शामिल हो गए। वर्ष 2016 में जारी सूंची के अनुसार वे 34।5 बिलियन डॉलर की दौलत के साथ वे इस सूची में 16वें स्थान पर रहे।

‘सोशल नेटवर्क’ फिल्म को लेकर ऐतराज़

‘सोशल नेटवर्क’ एक ऐसी फिल्म थी जो उनके जीवन पर आधारित थी परन्तु जिसका निर्माण बहुत ही ढीलेपन से हुआ था। मार्क को इस फिल्म की उस बात से सबसे ज्यादा शिकायत थी कि फिल्म में यह दिखाया गया है कि उन्होंने फेसबुक इसलिए बनाया था कि वे लड़कियों को आकर्षित कर उन्हें महेंगे क्लबों में ले जा सके। उन्होंने बाद में यह कहा कि शायद निर्देशक इस बात को समझ ही नहीं सकते कि कोई कुछ नया कुछ अच्छा बनाने की कोशिश भी कर सकता है।

मार्क को ‘स्लेयर’ उपनाम से बुलाया जाता था

बिलेनियर या “सर” कहलाये जाने से पहले उनके बंधुओं अल्फा एप्लिप्सन भाइयों ने उन्हें “स्लेयर” बुलाना शुरू किया। यह उपनाम उनके भाईचारे से उत्पन्न कर्तव्यों के कारण पड़ा था न कि उनकी डेटिंग को लेकर उनकी प्रतिष्ठा को लेकर। जकरबर्ग अपने छात्रवास में कोषाध्यक्ष का पद सँभालते थे और उनके ऊपर यह ज़िम्मेदारी थी की उन्हें अपने सभी सक्रिय भाइयों से बकाया राशि एकत्र करनी होती थी। स्पष्ट रूप से वह उन लोगों को ढूढ निकलने में बहुत निरंतर थे जिनको आने वाली तिमाही की बकाया राशि जमा करनी होती थी। समय पर भुगतान न करने की सजा के रूप में जकरबर्ग को हर पल अपनी खोज में लगाये रखना था।

google+ पर सबसे ज्यादा फॉलो किये जाने वाले व्यक्ति

फेसबुक लांच होने के कुछ सालों बाद ही गूगल ने सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में अपना एक संस्करण उतारने का फैसला किया। वेबसाइट के लांच होते ही मार्क ने गूगल प्लस पर अपनी आईडी बनायी। यह सोशल नेटवर्किंग की दुनिया को लेकर उनकी दृष्टि का सत्यापन था। विडंबना यह है की मार्क कुछ समय में ही गूगल प्लस पर सबसे ज्यादा फॉलो किये जाने वाले व्यक्ति बन गये। काफी मजेदार बात यह है कि जिस फोटोग्राफ से उन्होंने आर्थिक लाभांश कमाया उस पर लिखा था, “मैं चीजे बनाता हूँ।”

सबसे ख़राब कपड़े पहनने वाला पुरुष

वर्ष 2011 में जीक्यू ने एक लेख जारी किया था जिसका शीर्षक था “सिलिकॉन वैली का सबसे ख़राब कपड़े पहनने वाला व्यक्ति।” अपने सादे और साधारण ड्रेसिंग के कारण मार्क उस सूची में सबसे ऊपर थे उन्हें नियमित रूप से उनके ट्रेडमार्क टी शर्ट और जींस में देखा जाता रहा है जो की पहनने में बहुत आरामदायक है।

एओएल इंस्टेंट मैसेंजर की खोज

अपने पिता के दन्त चिकित्सा अभ्यास में काम करते समय मार्क को घर और कार्यालय के बीच संवाद हेतु एक साधन की आवश्यकता थी। मिडिल स्कूल में, मार्क ने ज़कनेट(ZUCKNET) एक पूरी तरीके से कार्यात्मक त्वरित सन्देश मंच बनाया जो की इंटरनेट कनेक्शन के माध्यम से दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच संचार की अनुमति देता था। विडंबना यह है कि, इस सॉफ्टवेयर को मार्क ने एओएल इंस्टेंट मैसेंजर से एक साल पहले ही विकसित कर लिया था। जकरबर्ग परिवार को यह अंदाजा नहीं था कि मार्क की यह खोज किसी और रूप में इतनी ज्यादा लोकप्रिय हो जाएगी।

जकरबर्ग का वार्षिक वेतन एक डॉलर है

जब सीईओ एक बेहद लाभदायक कंपनी के प्रभारी होते हैं, तो वे खुद को मानक रूप में सिर्फ 1 डॉलर का ही वेतन देते हैं। जकरबर्ग कर से बचने के लिए ऐसा नहीं करते हैं। वास्तव में तो वे स्टॉक विकल्पों और आयकरों का  काफी मात्रा में भुगतान करते हैं। वे 1 डॉलर का वेतन वह सिर्फ इसलिए लेते हैं कि वह उन्हें कुछ विशिष्ट करों की ज़िम्मेदारी से बचाता है तथा वे अपने प्रदर्शन के आधार पर कंपनी और शेयर धारकों से चेक के रूप में 1 डॉलर का वेतन लेते हैं।

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