अल्बर्ट आइंस्टाइन का चोरी हुआ दिमाग

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सौतुक डेस्क/

जर्मन मूल के अमरीकी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन जीनियस थे. जब सन् 1955 में उनकी मृत्यु हुई तब उनके शव का परीक्षण प्रिन्सटन हॉस्पिटल में डॉ.थॉमस स्तोल्टज़ हार्वे द्वारा किया गया जहाँ उन्होंने अवैध रूप से आइंस्टाइन का मष्तिष्क निकाल लिया तथा उसके कई टुकड़े कर दिए. उन टुकड़ों को पेंसिलविनिया विश्विद्यालय ले जाया गया जहाँ इसके कुछ हिस्से डॉ. हार्वे ने अपने लिए रखे जबकि कुछ हिस्सों को अन्य रोग विज्ञानियों को दे दिया।

हार्वे ने मष्तिष्क के टुकड़ों के लगभग हर संभव कोण से फोटोग्राफ लिए थे, फिर उन टुकड़ों को उन्होंने फोर्मल्डीहाईड के मिश्रण में संगृहीत किया था। जब 2007 में डॉ. हार्वे की मृत्यु हो गई तब उनके परिवार ने उनकी  सारी सम्पत्ति दान कर दी थी, इसी कड़ी में आइंस्टाइन के मष्तिष्क की तस्वीरों और मष्तिष्क के टुकड़े चांदी के धागों में लपेटकर मेरीलैंड स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा संग्रहालय को दान में दे दिए गए थे।

हार्वे ने काफी पहले अल्बर्ट आइंस्टीन के मष्तिष्क पर हुई खोजों को लेकर अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक पेपर प्रकशित करने का वादा किया था। परन्तु परिणाम के रूप में वर्ष 1978 तक ऐसा कोई पेपर प्रकाशित नहीं हुआ था जिसकी पुष्टि प्रेस रिपोर्टर स्टीवन लेवी द्वारा की गयी थी जिन्हें आइंस्टाइन के मष्तिष्क से जुड़ी चीज़ों को खोजने के लिए नियुक्त किया गया था।

पोसेसिंग जीनियस: द बिज्ज़ार ओडिसी ऑफ़ आइंस्टीन’स ब्रेन के लेखक कैरोलिन अब्राहम का मानना है कि, हार्वे इस सबसे नाम कमाना चाहते थे परन्तु इस चोरी के कृत्य के कारण येल में प्रशिक्षित डॉ हार्वे को प्रिंसटन में रोग विज्ञानी(पैथोलोजिस्ट) की नौकरी से निकाल दिया गया और उनकी पत्नी भी इसी कारणवश उन्हें छोड़ कर चली गयीं। उन्होनें अपना बाकी जीवन एक प्लास्टिक कारखाने में काम करते हुए बिताया।

बाद में कई वैज्ञानिकों ने आइंस्टीन के मष्तिष्क के नमूनों का परीक्षण किया तथा उसपर लिखित पेपर भी प्रस्तुत किये। कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले  की न्यूरो-एनाटॉमिस्ट,मैरियन डायमंड ने भी इस विषय पर अपने शोध के परिणाम साझा किये थे जिसमें उन्होंने बताया कि आइंस्टाइन के मष्तिष्क में अन्य मष्तिष्कों की तुलना में अधिक ग्लियल कोशिकाएं मौजूद थी। ग्लियल कोशिकाएं नयूरोन्स को उनके स्थान पर स्थित रखने का काम करती हैं तथा उन्हें ऑक्सीजन एवं पोषक तत्व भी प्रदान करती हैं। वर्ष 1996 में बर्मिंघम स्थित अल्बामा यूनिवर्सिटी के ब्रिट एंडरसन ने भी एक अध्ययन प्रकशित किया, जिसमें उन्होनें बताया कि आइंस्टाइन की प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स में नयूरोन्स नियंत्रण से अधिक कसकर पैक किये गए थे, जो की किसी अन्य मष्तिष्क से बहुत ज्यादा थे जिस वजह से आइंस्टाइन का मष्तिष्क तेज़ी से सूचना प्रसारित करने में सक्षम बन सकता था।

हार्वे इस सबसे नाम कमाना चाहते थे परन्तु इस चोरी के कृत्य के कारण येल में प्रशिक्षित डॉ हार्वे को प्रिंसटन में रोग विज्ञानी(पैथोलोजिस्ट) की नौकरी से निकाल दिया गया और उनकी पत्नी भी इसी कारणवश उन्हें छोड़ कर चली गयीं

कनाडा स्थित मैकमास्टर विश्वविद्यालय के सेंड्रा विटेलसन ने हार्वे की तस्वीरों को देखते हुए अपने निष्कर्ष प्रकाशित किये थे जिसमें उन्होंने बताया कि आइंस्टीन के मष्तिष्क की इन्फीरियर पैरीटेल(निचली पर्श्विका) सामान्य से अधिक चौड़ी एवं अधिक सुसज्जित थी। इन्फीरियर पैरीटेल(निचली पर्श्विका) लोबुल, मष्तिष्क का वह हिस्सा होता है जो स्थानिक संज्ञानों एवं गणितीय विचारों को नियंत्रित करने के किये जिम्मेदार होता है।

वर्ष 2012 में मानव वैज्ञानिक डीन फाल्क को हार्वे द्वारा ली गयी तस्वीरों में आइंस्टीन के मष्तिष्क की तस्वीरों में कुछ असामान्य मतभेद नज़र आये जो कि एक नियंत्रित मष्तिष्क से एकदम अलग थे। उन्हें आइंस्टीन के मष्तिष्क की दाहिनी मोटर पट्टी पर एक गाँठ मिली जो कि अक्सर बाएं हाथ के संगीतकारों में पायी जाती है, और आइंस्टाइन भी बाएं हाथ से वायलिन बजाते थे। उन्होंने आइंस्टाइन के मष्तिष्क के मिड फ्रंटल भाग पर एक अतिरिक्त रिज़ भी खोजा, जो कि काम करने की क्षमता और स्मृतियों को नियंत्रित करने का कार्य करता है, उन्हें आइंस्टीन के मस्तिष्क में कार्पस कैलोसम  नाम का ऊतक भी मिला जो कि मष्तिष्क के दो भागों को जोड़ने का कार्य करता है, परन्तु यह सामान्य से काफी मोटा था जो कि उन्हें सामान्य मष्तिष्क से कुछ अधिक सहायता प्रदान करता था

जब इन शोधों से जुड़े हुए लगभग सारे कागजात उपलब्ध हुए, तब प्रेस ने इन शोधों के आधार पर यह दावा किया कि आइंस्टाइन का मष्तिष्क E=mc^2  का सूत्र बनाने के अलावा और भी गणितीय सूत्रों  को बनाने की क्षमता रखता था।

परंतु न्यूयॉर्क स्थित पेस विश्विद्यालय के मनोवैज्ञानिक टेरेंस हिन के इन सभी अध्ययनों की आलोचना की है तथा इन्हें त्रुटिपूर्ण भी करार दिया। उनका मानना है कि किसी के भी मष्तिष्क में विषमता हो सकती है परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है की वह मष्तिष्क प्रतिभावान हो, उन्होंने यह भी सुझाव रखा की हमें प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के दिमाग को स्कैन कर उसकी अन्य दिमागों से तुलना, बेहतर परिणामों को हमारे सामने ला सकती है।

तो सवाल यह पैदा होता है आइंस्टीन अपने दिमाग में मतभेदों के कारण प्रतिभावान थे या वे एक प्रतिभावान व्यक्ति थे इसलिए उनके दिमाग में मतभेद थे।

उनकी मौत के बाद 1955 में उनकी आंखें भी निकालकर न्यूयॉर्क में एक सेफ़ में रख दी गईं थीं.

बाद में उनके दिमाग़ के टुकड़ों को उनकी आंखों के डॉक्टर हेनरी अब्राम्स को सौंप दिया गया था. हालांकि आइंस्टाइन के दिमाग़ के टुकड़े तो बाक़ी दुनिया ने देख लिए. मगर उनकी आंखें आज भी अंधेरे डब्बे में क़ैद हैं.

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