EVM से सम्बंधित सात महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी

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सौतुक डेस्क/

जैसे-जैसे चुनाव करीब आता है, EVM को लेकर बातचीत शुरू हो जाती है. EVM छेड़छाड़ के आरोप लगने शुरू हो जाते हैं. लेकिन यह भी एक जरुरी तथ्य है कि अब देश में वापस पेपर वैलेट पर चुनाव कराना संभव नहीं है. तकनिकी को इस्तेमाल कर वापस लौटना आसान नहीं होता. इसलिए अब जो होगा या तो EVM या इससे आगे की कोई चीज होगी. इसलिए यह जरुरी है कि हम EVM को जाने-समझें. इस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में प्रस्तुत है सात रोचक और जरुरी सवाल और उनके जवाब:

1.  EVM का पहली बार इस्तेमाल कब हुआ था?

1989-90 में बनाए गए EVM का इस्तेमाल पहली बार प्रयोग के ध्येय से 16 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव में किया गया था. इनमें पांच मध्य प्रदेश के, पांच राजस्थान के, छः दिल्ली के थे. इसके बाद, इन्हीं सीटों के लोकसभा चुनाव के लिए नवम्बर 1998 में भी इनका प्रयोगकिया गया हुआ था.

2. एक EVM से अधिकतम कितने वोट डाले जा सकते हैं?

एक EVM से अधिकतम 3,840 वोटर अपना मतदान कर सकते हैं. सामान्यतः एक पोलिंग स्टेशन में 1,500 के करीब वोटर होते हैं. इस लिहाज से एक EVM एक वोटिंग स्टेशन के लिए काफी होता है.

3. एक EVM अधिकतम कितने उम्मीदवार के लिए मतदान करवा सकता है?

एक EVM में अधिकतम 64 उम्मीदवारों के लिए वोटिंग हो सकती है. एक सामान्य नियम के अनुसार एक बैलेटिंग ईकाई में 16 उम्मीदवारों के लिए वोटिंग कराई जाती है. अगर 16 से अधिक और 32 से कम उम्मीदवार हुए तो एक और बैलेटिंग ईकाई उसमें जोड़ी जातीहै. ऐसे ही 32 से 48 के लिए एक तीसरी और उससे भी अधिक  लिए चौथी बैलेटिंग ईकाई जोड़ी जाती है. लेकिन अगर एक चुनाव क्षेत्र में 64 से अधिक उम्मीदवार हो गए तो वहाँ EVM से चुनाव नहीं होता.  ऐसे क्षेत्र में फिर वही पुराने तरीके के बैलट बॉक्स इत्यादि काप्रयोग किया जाता है.

4. अगर एक चुनाव क्षेत्र में सोलह से कम उम्मीदवार हुए जैसे, दस उमीदवार हुए तो मतदान कैसे होता है? और यदि कोई बिना प्रत्याशी नाम वाला बटन दबा दे तो ये वोट बेकार तो नहीं चले जाते?

अगर ऐसी स्थिति बनती है तो ग्यारह से सोलह तक के बटन को ढँक दिया जाता है. इसके अतिरिक्त 11 से 16 तक के वोट शून्य हो जाते हैं. इस तरह 11 से 16 तक के बटन पर मतदान पड़ने की सम्भावना ख़त्म हो जाती है.

5. ये EVM किसके द्वारा बनाए जाते है?

EVM को डिज़ाइन करना और उसको तैयार करवाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है. इसके लिए चुनाव आयोग का दो सरकारी संस्था भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड, बंगलुरु, और इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया, हैदराबाद के साथ अनुबंध है. चुनाव आयोग अपनेEVM का प्रोटोटाइप तैयार करवाकर, ट्रायल करवाकर इनको बनाने की जिम्मेदारी इन दोनों संस्थाओं को देता है.

 6.  पारंपरिक तरीकों में मतदान के पहले पीठासीन अधिकारी पोलिंग एजेंट को बैलेट बॉक्स दिखाता है. यह सुनिश्चित करने के लिए कि इसमें पहले से कुछ भी नहीं है. क्या EVM के साथ भी ऐसा कुछ होता है?

हाँ. मतदान के पहले, पीठासीन अधिकारी मौजूद पोलिंग एजेंट को यह दिखाता है कि इस मशीन से पहले कोई मतदान नहीं हुआ है जिसकी गणना होने वाले मतदान के साथ हो जाए. ऐसा करने के लिए यह अधिकारी रिजल्ट का बटन दबाता है जिससे पता चल जाता हैकि अब तक कितने वोट पड़े हैं.  इसके लिए पीठासीन अधिकारी एक झूठ का मतदान करवाता है जिसमें वहाँ मौजूद एजेंट कोई एक बटन दबाता है. इसके बाद पीठासीन अधिकारी रिजल्ट बटन दबाकर दिखाता है कि कुल कितने वोट पड़े. सब जब इसे सही पाते हैं तोउस वोट को क्लीन बटन दबाकर ख़तम कर दिया जाता है. इसके बाद वास्तविक मतदान शुरू होता है.

7. कोई यह सुनिश्चित कैसे कर सकता है कि वास्तविक मतदान के बाद उस EVM में वोट डाले जाएँ.

जैसे ही मतदान का आखिरी मत पड़ता है, मतदान कराने वाला अधिकारी क्लोज बटन दबा देता है. इसके बाद यह मशीन कोई और मत स्वीकार ही नहीं करता. मतदान ख़त्म  होने के बाद बैलटिंग ईकाई का कंट्रोलिंग ईकाई से कनेक्शन काट दिया जाता है. वहाँ मौजूद अधिकारी उसी समय वहां मौजूद पोलिंग एजेंट को कुल वोट की गणना भी बताता है. आखिरी मतगणना के समय इससे गिनती से मिलान भी किया जाता है.

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