दिल्ली की बिगड़ती हवा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ट्वीट की मोहताज

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यह दो फेफड़ो की तस्वीर है. बायीं तरफ की तस्वीर हिमाचल प्रदेश के एक 55 साल के व्यक्ति की है और दूसरी तरफ दिल्ली के 52 साल के व्यक्ति के फेफड़े की. इसे मशहूर डॉक्टर नरेश त्रेहान ने जारी किया था.

शिखा कौशिक/

अगर आपको याद हो, जून का महीना था और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेश दौरे पर थे. दिल्ली में एक ई-रिक्शा वाले ने खुले में शौच करने वालों को मना किया था. लोगों ने उस ई-रिक्शा के चालक को पीट-पीट कर मार डाला था. उस चालाक का नाम रविन्द्र था और वह बेचारा देश में भीड़ द्वारा न्याय किये जाने की बढती घटनाओं का शिकार हो गया.

इस घटना में जो सबसे अच्छी बात थी वह यह कि प्रधानमंत्री ने विदेश में रहते हुए भी इस घटना का संज्ञान लिया था और रविन्द्र को पचास हज़ार रुपये मुआवजा दिलवाया था. स्वच्छ भारत अभियान जो मोदी का  महत्वाकांक्षी कैंपेन है, उसके दुश्मनों को सख्त से सख्त सज़ा देने की बात कही थी.

हाल ही में जब मानुषी छिल्लर ने विश्व सुंदरी का ताज पहना तो भी देश के प्रधानमंत्री ने बिना देरी किये उनको ट्वीट कर बधाई दी. कुछ खास मुद्दों पर प्रधानमंत्री की त्वरित सक्रियता प्रभावित करती है. लेकिन इसी तरह कुछ जरुरी मुद्दों पर उनकी ख़ामोशी परेशान भी करती है.

हर बात में देश का गौरव याद करने वाले, कल दिल्ली में हुई घटना पर मौन है. दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट मैच चल रहा है. खेल के दूसरे दिन दो खिलाड़ियों ने अचानक से सांस लेने में दिक्कत महसूस की और पवेलियन लौट गए. श्रीलंका टीम के पास अतिरिक्त खिलाड़ी नहीं होने की वजह से खेल को करीब 20 -25 मिनट के लिए रोकना भी पड़ा. फिर जब खेल शुरू हुआ तो श्रीलंका के कुछ खिलाड़ी चेहरे पर मास्क लगा कर खेलने उतरे. श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने तो बीसीसीआई से दिल्ली में यह टेस्ट आयोजित करवाने के फैसले पर भी सवाल भी खड़ा किया है.

यह दिल्ली की खराब होती हवा का सार्वजनिक और अंतर्राष्ट्रीय बयान था जो किसी भी संवेदनशील भारतीय के लिए शर्म का विषय होना चाहिए. इससे अतिरिक्त यह भी बताता है कि दिल्ली के करोड़ो लोग किस तरह की हवा को अपने फेफड़ों में भरने के लिए बाध्य हैं. इसका दूरगामी प्रभाव बहुत बड़ा होने वाला है. कुछ दिन पहले तो दिल्ली की हवा ने स्कूल-कालेज बंद करवा दिए. न्यायालय को हस्तक्षेप तक करना पड़ गया. और ऐसा हर साल हो रहा है. पिछले साल या उसके पिछले साल, ठंढ में दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रहती और अंतर्राष्ट्रीय खबरों का हिस्सा बनती है.

जब हवा अत्यधिक ख़राब होगी और चौतरफा दबाव के मद्देनज़र वह स्वच्छ हवा अभियान चलाएंगे तभी शायद इसका संज्ञान लेंगे और ट्वीट करेंगे

इन सब के बावजूद देश के प्रधानमंत्री ने इस जरुरी मुद्दे पर गज़ब का मौन धारण कर रखा है. क्या बात-बात पर देश का गौरव और गौरवमयी इतिहास की शरण में जाने वाले प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी को वर्तमान का यह शर्मनाक पक्ष नहीं दिखता. या यह माना जाए कि चूंकि देश की हवा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए उन्होंने कोई स्वच्छ हवा अभियान जैसा कार्यक्रम नहीं चला रखा है इसलिए शायद वह इस बिगडती आबोहवा को अपनी जिम्मेदारी नहीं मानते. जब हवा अत्यधिक ख़राब होगी और चौतरफा दबाव के मद्देनज़र वह स्वच्छ हवा अभियान चलाएंगे तभी शायद इसका संज्ञान लेंगे और ट्वीट करेंगे.

या यह माना जाय कि उनके पास देश की इस बिगड़ती हवा का कोई इलाज़ ही नहीं है इसलिए प्रधानमंत्री इसमें शामिल नहीं होना चाहते. तो क्या ऐसे में लोग, छोटे-छोटे बच्चे जिनको जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ उर्जा के नाम पर नरेन्द्र मोदी बेहतर भविष्य देने की बात करते हैं, वो अपने काले फेफड़ो के साथ बड़े होंगे और जिंदगी भर तमाम बीमारियों से जूझते रहेंगे.

या प्रधानमंत्री अन्य काम जैसे गुजरात के विधानसभा चुनाव में इतने व्यस्त है कि उनको देश के अन्य हिस्सों यहाँ तक कि राजधानी की भी चिंता नहीं है.

अब तो यह मानी हुई बात है कि देश में प्रदूषित हवा ने विकराल रूप धारण कर लिया है और बिना सर्वोच्च स्तर के हस्तक्षेप के यह सुधरने वाला नहीं है.

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