एचआईवी से जंग: गरीबी और संक्रमण में सीधा रिश्ता

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अनिमेष नाथ/

भारत एक ऐसा देश है जिसने न केवल खुद के एचआईवी की समस्या से लोहा लिया है बल्कि अफ़्रीकी देशों में संक्रमण को रोकने में भी इसकी अहम भूमिका रही है. भारत ने संक्रमण के नए मामलों में गिरावट दर्ज की है, परन्तु नए अध्ययन बताते हैं कि गरीबी, एचआईवी के संक्रमण की सम्भावना को बढ़ा देती है. हाल ही में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान और पंचायती राज (NIRDPR) और जनसँख्या परिषद् द्वारा किये गए अध्ययन से इसका खुलासा होता है.

इस अध्ययन में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र की 4,089 महिला सेक्स वर्कर्स को शामिल किया गया. इस अध्ययन में पता चला कि ये महिलाऐं अपनी वित्तीय समस्या के कारण यौन सुरक्षा को लेकर कई सारे ज़ोखिम उठाती हैं.

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) द्वारा किये गए एक अलग अध्ययन में पाया गया कि, “भारत में अधिकांश महिलाएं वेश्यावृति में गरीबी की वजह से आती हैं. और इसी वजह से इन महिलाओं का यौन शोषण भी खूब होता है. इन्हें कई तरह की हिंसा का सामना करना पड़ता है.

इस रिपोर्ट से यह खुलासा होता है कि गरीबी और कमजोर स्थिति की वजह से ये महिलायें जोखिम भरे यौन संबंध में शामिल होती हैं और फिर उनको इसका खामियाजा उठाना पड़ता है. इसमें कई चीजें शामिल हैं जैसे कंडोम का उपयोग न करना, शराब पीकर यौन सम्बन्ध स्थापित करना, और गुदा यौन सम्बन्ध की अधिकता इत्यादि. इससे संक्रमण की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं.

गरीबी और कमजोर स्थिति की वजह से ये महिलाएं जोखिम भरे यौन संबंध में शामिल होती हैं और उनको इसका खामियाजा उठाना पड़ता है

इन महिलाओं की स्थिति का अंदाजा इन तथ्यों से लगाया जा सकता है जैसे इनमें से आधी महिलाएं  अपने सामजिक और क़ानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं थीं. इनमें से 21 प्रतिशत के पास राशन कार्ड नहीं थे और 17 प्रतिशत महिलाओं के पास मतदाता पत्र तक नहीं थे. सबसे दुखद यह कि इनमें से 13 प्रतिशत महिलाओं के पास दैनिक जीवन जीने हेतु पर्याप्त भोजन तक उपलब्ध नहीं था.

वैसे भारत ने पिछले दशक में इस बीमारी से लड़ने में अच्छी सफलता पायी है. NACO(National AIDS Control Organisation) के अनुसार देश में वर्ष 1995 से लेकर अब तक एचआईवी संक्रमण में 80 फीसदी की गिरावट आई है. हालाँकि हाल के वर्षों में सुधार की गति धीमी जरुर हुई है.

इस संस्था के अनुसार, वर्ष 2005 से अब तक एड्स से सम्बन्धित मौतों में 71 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी है. लेकिन यह सिक्के का एक पहलू है. दूसरा पहलू है कि इस सब के बावजूद एचआईवी संक्रमित देशों की सूची में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है.

वर्ष 2017 में, भारत में 21 लाख से अधिक लोग एचआईवी से पीड़ित थे जिसमें से 87,950 नए एचआईवी संक्रमण के मामले शामिल थे. एड्स से मरने वालों की कुल संख्या 69,110 रही.

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, मिजोरम में सबसे अधिक संक्रमण है. वहाँ के 2.04 प्रतिशत युवा इस बीमारी से संक्रमित हैं. इसके बाद तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का नाम आता है.

इन राज्यों में, महाराष्ट्र में एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा है. यहाँ 3.30 लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं. इसका तात्पर्य यह हुआ कि पूरे देश में इस बीमारी से प्रभावित लोगों की पंद्रह प्रतिशत आबादी महाराष्ट्र में रहती है.

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