किसी बच्चे के पैदा होने के लिए सबसे असुरक्षित देश पाकिस्तान, भारत भी श्रीलंका से पीछे

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उमंग कुमार/

किसी बच्चे के लिए पकिस्तान में पैदा होना सबसे खतरनाक है. लेकिन इसे आतंकवाद या सुरक्षा से जोड़ कर न देखिये. यह सीधा स्वास्थय सुविधाओं  के उपलब्ध होने का मामला है. हमेशा गलत वजहों से चर्चा में रहने वाले इस मुल्क में हर 22 बच्चों में से एक बच्चा जन्म होने के तीस दिन के पहले ही इस दुनिया से विदा हो जाता है. इसी सप्ताह प्रकाशित यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है.

नवजात मृत्यु दर भारत की स्थिति कुछ ख़ास बेहतर नहीं है. यहाँ प्रति हज़ार पैदा होने वाले बच्चों में से करीब 25 जीवन का एक महीना भी इस दुनिया में नहीं गुजार पाते. इस तरह भारत उन 52 लोअर मिडिल इनकम देशों के बीच बारहवें स्थान पर है.

भारत कुछ देर के लिए यह सोच कर खुश हो सकता है कि वह पाकिस्तान से बेहतर है पर कई कई आर्थिक रूप से कमजोर पड़ोसी देशों के मुकाबले इस देश की स्थिति काफी ख़राब है.

उदाहरण के लिए श्रीलंका को ही ले लें. यहाँ नवजात मृत्यु दर करीब 5.2 है यानी प्रत्येक हज़ार जन्मे बच्चों में वहां मरने वाले बच्चों की संख्या 5.2 है. यह छोटा सा देश इस मामले में विकसित देशों के समकक्ष है.

भारत के पड़ोसी देशों में बांग्लादेश, नेपाल और भूटान भी इस मामले में बेहतर स्थिति में है.

दुनिया में किसी बच्चे के पैदा होने के लिए सबसे सुरक्षित देश है जापान जहां प्रत्येक हज़ार में से एक ही बच्चा ख़त्म होता है.

यूनिसेफ के आंकड़ो के अनुसार विश्व में करीब 26 लाख बच्चे पैदा होने के एक महीने के अन्दर मर जाते हैं. यह बस एक साल का आंकड़ा है. इस तरह रोज करीब सात हज़ार बच्चे मरते हैं. वे बच्चे जिन्होंने अपने जीवन का एक महीना भी पूरा नहीं किया होता है.

भारत में प्रत्येक साल करीब ढाई करोड़ बच्चे पैदा होते हैं जिनमे से साढ़े छ लाख के करीब तीस दिन पूरा होने पहले ही ख़त्म हो जाते हैं.

भारत ने शिशु मृत्यु दर (पांच साल से कम उम्र के बच्चे) को कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है. लेकिन नवजात मृत्यु दर के मामले में कुछ ख़ास सुधार नहीं हो रहा है.

नवजात बच्चों के मरने की संख्या में भारत के राज्यों की स्थिति भी अलग अलग है. जैसे केरल में प्रति हज़ार महज दस बच्चों को जान गंवानी पड़ती है वहीँ बिहार और उत्तराखंड में ऐसे अभागे बच्चों के संख्या  44 के करीब है.

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