छींक रोकना आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है

0

 सौतुक डेस्क/

छींक रोकना आपके के लिए कितना खतरनाक हो सकता है इसका अंदाजा आप इस घटना से लगा सकते हैं. हाल ही में एक शख्स ने जब नाक और मुंह पर जोर लगाकर छींक रोकी तो उसके सिर के पिछले हिस्से में छेद हो गया.

अभी ठंढ के मौसम में जब सर्दी और छींक इत्यादि सामान्य बात है तभी एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है. इस अध्ययन में डॉक्टरों ने बताया है कि एक 34 साल के शख्स को असहनीय दर्द के साथ इमरजेंसी चिकित्सा वार्ड में भर्ती किया गया. वह शख्स न तो ठीक से बोल पा रहा था और न ही कुछ निगल पा रहा था. इसकी शुरुआत तब हुई जब उसने छींक रोकने के लिए जबरन अपने नाक और मुंह दबा दिए.

उस शख्स को अस्पताल में करीब एक सप्ताह रखना पड़ा और इस दरम्यान उसे ट्यूब के माध्यम से खाना खिलाया जाता रहा. इस पूरे मामले को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में लिखने वाले डॉक्टर के अनुसार, स्थिति और बुरी हो सकती थी.बल्कि छींक में हवा का जोर इतना अधिक होता है कि अगर कोई इसे जबरदस्ती रोकने की कोशिश करे तो जान भी जा सकती है.

एनएचएस ट्रस्ट के लिसेस्टर यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने लिखा है कि नाक और मुंह दबाकर छींक रोकने की कोशिश बहुत खतरनाक साबित हो सकती है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. इससे फेंफड़ो के बीच में हवा फंस सकती है, कान के परदे फट सकते हैं या दिमाग की नसें भी फट सकती हैं.

छींक में हवा करीब 100 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से निकलती है. कभी-कभी गति इससे अधिक भी हो सकती है

इनके अनुसार, एक मरीज जो एकदम तंदरुस्त था वह एक दिन अस्पताल आया और बताया कि कुछ भी निगलने मे उसे असह्य पीड़ा हो रही है. उसने बताया कि जब से उसने एक बार छींक रोकने की कोशिश की है उसकी आवाज भी बदल गयी है और बोलने में दिक्कत भी हो रही है.

डॉक्टरों का कहना है कि यह सब जबरदस्ती छींक रोकने से हुआ था. छींक में हवा करीब 100 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से निकलती है. कभी-कभी गति इससे अधिक भी हो सकती है.

मरीज ने बताया कि उसके गले में एक अलग तरह की सनसनाहट हो रही है और गले में सूजन भी है. तब से जब उसने नाक और मुंह दबाकर छींक रोकने की कोशिश की थी.

जब डॉक्टरों ने जांच की तो पाया कि मरीज के शरीर में अलग किस्म की आवाज उत्पन्न हो रही है जो गले से निकल कर सीने तक जा रही है. सीटी स्कैन किया गया और पता चला कि उस शख्स के गले के पिछले हिस्से में कुछ टूटा हुआ है.

उस शख्स को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया और उसे ट्यूब के माध्यम से खिलाया गया. करीब एक सप्ताह इलाज चला तब जाकर उसके गले का जख्म ठीक हुआ, और उसे आगे कभी भी छींक न रोकने की हिदायत के साथ हॉस्पिटल से घर भेजा गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here