‘फोर्टिस में बच्ची की मौत अस्पताल द्वारा की गयी हत्या है’

0

सौतुक डेस्क/

फोर्टिस अस्पताल में सात साल की बच्ची की मौत हादसा नहीं ‘हत्या’ है, ऐसा कहना है हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का.

यह निजी अस्पतालों की स्थिति बयान करता एक केस है. गंभीर स्थिति में परिजन मरीज को अस्पताल ले जाते हैं, वहाँ दस-बीस हजार में ठीक हो जाने वाले रोग के लिए इतनी रकम मांगी जाने लगती है कि परिजन घबरा जाते हैं और दूसरे अस्पताल भागना चाहते हैं. पहले अस्पताल वाले परिजनों से नाराज होकर उन्हें यह तक नहीं बताते कि ऐसे ले जाने पर मरीज की जान जा सकती है. और रास्ते में मरीज की मौत हो जाती है.

यह सच्चाई है.आपको याद होगा सितम्बर महीने में फोर्टिस अस्पताल, गुरुग्राम में एक सात साल की लड़की के परिजनों से अस्पताल ने 16 लाख रुपये वसूल लिए थे. लड़की डेंगू से पीड़ित थी जिसका खर्च निजी अस्पताल में 35 से 70 हजार रुपये के करीब आता है. लेकिन फोर्टिस अस्पताल ने बच्ची के परिजनों से 16 लाख रुपये वसूल लिया और लड़की की जान भी चली गयी. इस केस में हरियाणा सरकार ने जांच के आदेश दिए थे. अब जांच की रिपोर्ट में पता चला है कि इस अस्पताल ने एक इस मरीज लड़की के परिजनों को दवा और अन्य चीजों के अधिक दाम बताकर एक दो नहीं सौ प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाया है. कई चीजों पर 1,700 प्रतिशत अधिक दाम लिया गया है.

हरियाणा के स्वास्थय मंत्री अनिल विज ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उनके विभाग ने इस अस्पताल और इस गलती के लिए जिम्मेदार डॉक्टर के खिलाफ ऍफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. फोर्टिस अस्पताल में जो हुआ वह सामान्य मौत नहीं बल्कि हत्या की श्रेणी में आएगा, अनिल विज ने कहा.

बच्ची के माता-पिता ,डॉक्टर के  सलाह के खिलाफ जाते हुए खुद एम्बुलेंस बुलाकार मरीज को लेकर चले गए थे. अस्पताल ने भी उस मरीज को जाने दिया और इसके लिए उसको वेंटीलेटर सपोर्ट भी हटा दिया. दूसरे अस्पताल में जाने पर लड़की को मृत घोषित कर दिया गया

बुधवार की सुबह स्वास्थ्य विभाग के प्रमिख सचिव अमित झा ने 50 पेज की जांच रिपोर्ट जमा की जिसमें अस्पताल बहुत सारी गलतियां करता हुआ पाया गया है. जांच में पाया गया है कि अस्पताल ने एक ही दवा के लिए दो भिन्न-भिन्न दाम वसूले. कई चीजों के बढ़ा-चढ़ा कर दाम वसूले गए. उस नामी-गिरामी अस्पताल के द्वारा कुछ ऐसी गलतियाँ की गईं हैं कि एक बारगी मरीज वहाँ जाने से डरेगा.

बच्ची के माता-पिता, डॉक्टर के  सलाह के खिलाफ जाते हुए खुद एम्बुलेंस बुलाकार मरीज को लेकर चले गए थे. अस्पताल ने भी उस मरीज को जाने दिया और इसके लिए उसको वेंटीलेटर सपोर्ट भी हटा दिया. दूसरे अस्पताल में जाने पर लड़की को मृत घोषित कर दिया गया.  किसी अस्पताल के लिए अनैतिक माना जाएगा. नियम यह है कि मरीज को वेंटिलेशनसे हटाकार दूसरे विशेषज्ञ के हाथ में ही मरीज को सुपुर्द कर सकते हैं. या मरीज के परिजनों को अच्छे से समझकर कि कैसे अम्बु बैग के सहारे से ले जाया जा सकता है.

अस्पताल ने यह भी नहीं बताया कि एक डेंगू का मरीज मरीज भर्ती हुआ है जबकि ऐसा करना एपिडेमिक डिजीज एक्ट के तहत करना जरुरी है. ताकि सरकार को ऐसी बिमारी से पीड़ित लोगों की असली संख्या का पता चल सके.

और तो और जब लड़की के परिवार वालों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर न्याय पाने कि कोशिश की, तो मामले को तूल पकड़ता देख,अस्पताल प्रशासन ने लड़की के परिजनों को पैसे का लालच देकर कोर्ट से दूर रखने की कोशिश भी की. आउटलुक में छपी एक खबर के अनुसार लड़की के परिजनों को करीब 35 लाख रुपये देने की पेशकश की गयी थी. ताकि वो सोशल मीडिया पर से अपना अभियान बंद कर दें और न्यायालय तक ना जाएँ.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here