सर्वाइकल कैंसर में जानलेवा साबित हो रही है शर्म

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शिखा कौशिक/

शर्म और मौत का ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिलेगा. महिलाएं शर्मिंदगी से बचने के लिए सरवाइकल कैंसर के लिए जरुरी जांच नहीं करातीं. ऐसा करने वाली महिलाओं की संख्या काफी अधिक है. हाल ही में आये इस अध्ययन से पता चला है कि तकरीबन 35 प्रतिशत महिलाएं सिर्फ शर्म की वजह से जरुरी जांच नहीं कराती और इसका परिणाम तो खैर सब जानते हैं.

आज के समय में कैंसर सबसे बड़ी जानलेवा बिमारी के तौर पर उभरा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में कैंसर से मरने वाली महिलाओं में चौथा सबसे बड़ा कारण गर्भाशय ग्रीवा में होने वाला सर्वाइकल कैंसर ही है.

सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए समय-समय पर ‘स्मीर परीक्षण’ करना पड़ता है. इसमें नियमित रूप से पेणू का परीक्षण कर नमूना एकत्रित कर उसकी जांच की जाती है. खासकर 21 से 29 वर्ष की महिलाओं के लिए इस परीक्षण की सलाह दी जाती है. प्रति तीन वर्ष में कराए जाने वाले इस परीक्षण से कैंसर के मामलों में 75 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है.

ब्रिटेन में कैंसर के खिलाफ काम करने वाली एक संस्था ‘जो सर्वाइकल कैंसर ट्रस्ट’ द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक 35 प्रतिशत युवतियां स्मीर परीक्षण के दौरान यौन अंगों को डॉक्टर के सामने दिखाने से बचने के लिए इस परीक्षण से परहेज करती हैं. इस संस्था ने पिछले साल यानी 2017 में ही यह सर्वेक्षण किया जिसका परिणाम अभी प्रकाशित हुआ है.

इस संस्था के सदस्य रॉबर्ट म्यूजिक का कहना है कि जीवन रक्षक परीक्षण कराने के लिए अव्वल तो महिलाओं को किसी शर्म का अनुभव नहीं करना चाहिए और दूसरे इन महिलाओं को सहज महसूस कराने के लिए पेशेवर नर्सों को इस क्षेत्र में एक बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

भारत सरवाइकल कैंसर से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है. हर साल करीब  70,000 भारतीय महिलायें इस बिमारी की वजह से अपनी जान गंवाती हैं. इस बिमारी से मरने वालो की संख्या में भारत सबसे ज़्यादा है. यह स्तन कैंसर के बाद महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित  करने वाला कैंसर हैं. कैंसर से कुल प्रभावित महिलाओं में करीब 23 प्रतिशत महिलायें सरवाइकल कैंसर से प्रभावित हैं.

ऐसा माना जाता है कि सरवाइकल कैंसर का शुरुआत में पता नहीं चल पाता पर अगर कुछ सावधानी बरती जाए, तो इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस बिमारी के सबसे महत्वपूर्ण लक्षणों में से एक है महिला के गुप्तांग से समय-समय पर खून का रिसाव जो माहवारी से अलग होता है. रक्त का यह रिसाव सामान्यतः शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद होता है.

इसके अतिरिक्त कुछ लक्षण हैं शारीरिक सम्बन्ध के समय असामान्य दर्द होना. गुप्ताग से स्राव में बदबू होना. अगर बिमारी अधिक बढ़ जाती है तो हड्डियों में दर्द, भूख में कमी, पेशाब में रक्त इत्यादि भी शुरू हो जाता है. पीरियड के दौरान साफ सफाई भी इस बिमारी से बचने में मदद करता है.

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