अबकी बार लौटा तो बृहत्तर लौटूंगा -कुंवर नारायण

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सौतुक डेस्क/

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित और हिंदी के वरिष्ठ कवि कुंवर नारायण का आज 90 साल की अवस्था में निधन हो गया. उनका अंतिम संस्कार लोधी शवदाह गृह में किया गया. सन्1927 में उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में जन्मे कुंवर नारायण ने हमें कई कविता संग्रह दिए जिनमें चक्रव्यूह, आत्मजयी, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों और हाशिये का गवाह  शामिल हैं. कुंवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के कवियों में शुमार थे. उन्होंने एक कहानी संग्रह भी लिखा. उनकी रचनाओं का कई विदेशी और स्थानीय भाषाओँ में अनुवाद हुआ है.  हिंदी के तमाम प्रतिष्ठित पुरस्कारों से ये नवाज़े जा चुके थे. कुंवर नारायण के निधन की खबर उनके प्रशंसको को विचलित करने वाली रही. सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लोग उनकी कविताओं के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. इसी मौके पर हिंदी के कहानीकार और पेशे से शिक्षक शशिभूषण ने आपके लिए उनकी कविताओं का पाठ किया है.



अबकी बार लौटा तो

अबकी बार लौटा तो
बृहत्तर लौटूंगा
चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं
कमर में बांधें लोहे की पूँछे नहीं
जगह दूंगा साथ चल रहे लोगों को
तरेर कर न देखूंगा उन्हें
भूखी शेर-आँखों से

अबकी बार लौटा तो
मनुष्यतर लौटूंगा
घर से निकलते
सड़को पर चलते
बसों पर चढ़ते
ट्रेनें पकड़ते
जगह बेजगह कुचला पड़ा
पिद्दी-सा जानवर नहीं

अगर बचा रहा तो
कृतज्ञतर लौटूंगा

अबकी बार लौटा तो
हताहत नहीं
सबके हिताहित को सोचता
पूर्णतर लौटूंगा

बात सीधी थी पर


बात सीधी थी पर एक बार
भाषा के चक्कर में
ज़रा टेढ़ी फँस गई ।

उसे पाने की कोशिश में
भाषा को उलटा पलटा
तोड़ा मरोड़ा
घुमाया फिराया
कि बात या तो बने
या फिर भाषा से बाहर आये-
लेकिन इससे भाषा के साथ साथ
बात और भी पेचीदा होती चली गई ।

सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना
मैं पेंच को खोलने के बजाय
उसे बेतरह कसता चला जा रहा था
क्यों कि इस करतब पर मुझे
साफ़ सुनायी दे रही थी
तमाशाबीनों की शाबाशी और वाह वाह ।

आख़िरकार वही हुआ जिसका मुझे डर था –
ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी ।

हार कर मैंने उसे कील की तरह
उसी जगह ठोंक दिया ।
ऊपर से ठीकठाक
पर अन्दर से
न तो उसमें कसाव था
न ताक़त ।

बात ने, जो एक शरारती बच्चे की तरह
मुझसे खेल रही थी,
मुझे पसीना पोंछती देख कर पूछा –
“क्या तुमने भाषा को
सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा ?”

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