वरिष्ठ कवि अमिताभ बच्चन की कुछ बेहतरीन कवितायें

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अमिताभ बच्चन

कविता के तमाम संघर्षों में एक समसमायिकी भी है। अपवाद स्वरूप ही कोई कवि सामयिक को उस अंदाज में अपनी कविता में साधने की कोशिश करता है, जिसे अँग्रेजी में कहा जाता है- टेकिंग बुल बाई इट्स हॉर्न। अमिताभ बच्चन वैसे ही विरल कवि हैं। कविता के उनके आकाश में यथार्थ, और वो भी वर्तमान, केंद्रीय नक्षत्र है। कहन का उनका रवाँ-दवाँ अंदाज, नित नए प्रयोग कहीं से भी उस यथार्थ को हावी नहीं होने देते, यह उनकी कविता का सबसे खूबसूरत पहलू है।

 

 

दिव्य ज्ञान

लाखों-लाख बरस में धरती ठंडी क्यों हुई
प्लॉट के रूप में बिकने केलिए

लाखों-लाख बरस में वायरस से घड़ियाल होते हुए
हम आदमी क्यों बने
ब्राह्मण, चमार या दुसाध कहलाने केलिए

रीछ की तरह बाल लेकर
लाखों-लाख साल हम पहाड़-जंगल में क्यों भटके
अयोध्या में राम मंदिर बनाने केलिए

लाखों-लाख साल तक प्रकृति को हमने क्यों निहारा
वेद-पुराण क्यों लिखा
पुष्पक विमान क्यों उड़ाया
गांडीव और सुदर्शन चक्र क्यों चलाया
मुसलमान और ईसाईयों को हिंदू बनाने केलिए

लाखों-लाख साल बारिश में भींगते
गुफाओं में छुपते
चट्टानों पर हिरण का चित्र बनाते
हम चतुर क्यों बने
स्विस बैंकों में पैसे छुपाने केलिए

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 लीची

कहीं भी रहूं लीची मुझे मेरे बचपन में रोसड़ा ले जाती है
जब घर के पीछे सियार बोलता और मैं डर से कांपता था
अमेरिका से सूखे दूध की बोरियां आती 
चपरासी मुझे कंधे पर लादकर मेला ले जाता
विशाल बरगद के नीचे बकरे की बलि दी जाती
खून से धरती लाल हो जाती
बहुत सारा मांस हमारे घर आता
खुली गुमटी पर चरवाहे कट जाते गाय कट जाती
धड़ से अलग हाथ पैर मुंड देखकर नींद गायब हो जाती
गेंदे के फूलों का बाग कुछ दूर तक साथ चलता 
बारिश के बाद की धूप में चमकती पेड़ पर लदी लीचियां
मेरा सारा डर चूस लेतीं 
कहीं भी रहूं लीची मुझे मेरे बचपन में रोसड़ा ले जाती है
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मैं शर्मिंदा हूं

मैं शर्मिंदा हूं कि मैं विवेकानंद कॉलोनी का बाशिंदा हूं
मैं शर्मिंदा हूं कि इसमें सिर्फ कायस्थ रहते हैं
मैं शर्मिंदा हूं इस बात से कि विवेकानंद कायस्थ थे
मैं शर्मिंदा हूं कि इस कॉलोनी को मेरे होश में पिता ने बसाया है
पिता के कायस्थ होने से मैं शर्मिंदा हूं
मैं शर्मिंदा हूं कि मैं कायस्थ हूं
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नीचे मत देखो

न्याय सबसे ऊपर है. उससे भी ऊपर है विधान. विधानों से भी ऊपर हैं राष्ट्रपति. राष्ट्रपति से ऊपर है उनका विवेक. उनके विवेक से ऊपर है गृहमंत्रालय. गृहमंत्रालय जिसके नीचे है उसके ऊपर है प्रधानमंत्री. नीचे मत देखिए जहां चारों तरफ गैरबराबरी और अन्याय पसरा हुआ है. सिर्फ ऊपर और ऊपर देखिए.

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कुबौल में

कुबौल गांव में मुझे पता चला
कि गाय-बैल अगर पांच दिनों तक लगातार पानी में खड़े रहे
तो उनके खुर इस तरह सड़ जाते हैं 
कि बाद में उनकी मौत हो जाती है

कुबौल गांव में मुझे पता चला कि
दिल्ली के सरोजनी नगर मार्केट की दो दुकानों की कमाई से
गांव में पचास कमरों वाली कोठी बनाई जा सकती है

कुबौल गांव में मुझे पता चला कि एक बड़े गांव में
इतने छोटे-छोटे काम होते हैं कि वह
सत्तर पार कर चुकी करीब सवा सौ विधवा औरतों को
औलादों द्वारा छोड़ दिए जाने के बावजूद
सालों जिंदा रख सकता है

कुबौल गांव में मुझे पता चला कि बूढ़ी विधवाएं
परदेस जा बसे
निर्दयी बच्चों से अंत तक मदद की उम्मीद नहीं छोड़तीं
उनकी छुट्टियों और पर्व-त्योहार पर मिलने की आस कभी नहीं मरती
वे बिना रोए-गाए और आपा खोए आदमी की निष्ठुरता का
घंटों बखान कर सकती हैं

कुबौल गांव में मुझे पता चला कि इंसान
मरने के पहले तक उन बुरी शक्तियों का पता लगाता है
जो उनके बच्चों को निर्दयी बनाती हैं

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 शीर्ष पर बैठे लोगों का गीत

शीर्ष पर पहुंचना आसान नहीं है
शीर्ष पर सारी दौलत है
शीर्ष पर वितरण, आवंटन, अधिग्रहण है
शीर्ष पर भारी प्रतियोगिता है
शीर्ष पर सब टनाटन है
शीर्ष पर बैठे लोग कहते हैं
अगर कुछ बदलना है
तो सबसे पहले उसे शीर्ष पर बदलना है
शीर्ष पर बैठे लोगों को बेहद प्रिय है बदलाव
शीर्ष पर बैठे लोग ही ऐसा शीर्ष मांगते हैं
जिस पर कोई ऊंगली न उठा सके
शीर्ष पर बैठे लोग ही कहते हैं
उन्हें अंधा और बहरा शीर्ष नहीं चाहिए
शीर्ष पर बैठे लोग चाहते हैं
शीर्ष को सफाई देने की नौबत नहीं आनी चाहिए
शीर्ष को सुस्त नहीं पड़ जाना चाहिए
शीर्ष पर फाइल तेज दौड़नी चाहिए
शीर्ष को पूरी ताकत से अपना बचाव करना चाहिए
शीर्ष पर सुधार कभी स्थगित और लंबित नहीं रहना चाहिए 
शीर्ष पर बैठे लोग 
सबसे ज्यादा पवित्र सक्षम शीर्ष की खोज में लगे रहते हैं
शीर्ष पर बैठे लोग कहते हैं
पसीना बहाने वालों केलिए
एक शीर्ष तो चाहिए ही चाहिए

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सितारा हस्पताल

तुम्हारा ये सितारा हस्पताल
हम ले लेंगे

ये दरअसल हमारा है
इसे अभी हमने लिया नहीं है

ये खूबसूरत इमारत
फूलों का बाग
ओह, ये जन्नत हमारी
इसे हम ले लेंगे

वृद्ध मां हमारी यहां मुस्कुराएगी
ये आलीशान, ठंडा, सुंदर, शालीन है
इसे हम ले लेंगे

चोरी-छुपे इसमें दाखिल होना
असंभव है

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खोपड़ी

सचमुच बुरे दिन आए हैं
खोपड़ी में जैसे लीद ही लीद भर गयी है
जरा देखो कि बैठा-बैठा मैं क्या कर रहा हूं
बचपन के शहर और
तमाम मुहल्लों के नाम याद कर रहा हूं
पर याद आ रहे हैं सिर्फ मुस्लिमबहुल मुहल्लों के मुस्लिम नाम
कुछ शामियाने-घर 
आम की नर्सरियां 
आंटे के गुलगुले 
कुछ बेकरियां और कब्रगाह याद आ रहे हैं
मुस्लिमबहुल मुहल्लों के हिंदुओं के घर नहीं याद आ रहे हैं
सिर्फ मुसलमानों के मकान और दालान चमक रहे हैं आंखों में
शहर फिसल गया है मेरे हाथों से
खोपड़ी घूम गयी है मेरी

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अफसोस

मां उस रात अंधेरे में
न जाने कहां
अकेली चली गई थी

उसमें डर से अधिक साहस था
जब वह तेज कदमों से मुझे वापस आती हुई मिली

उसने कहा लो ये टीशर्ट
मैं भूल ही गई थी
आज तुम्हारा जन्मदिन है

मां के पीछे
कुछ बड़बड़ाते-चिल्लाते शराबी चले आ रहे थे

आज मुझे अफसोस होता है उस दिन
मैंने शायद उसकी यात्रा का रोमांच
कम कर दिया था

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फोन

कुछ दिनों में मैं गुजर जाऊंगा
उसके बाद भी मुझे एकाध फोन आएंगे
निश्चय ही उसमें एक उस नौजवान का भी होगा
जो पटना सिटी में रहता है
शहनाई बजाता है
जिसे हमेशा काम की तलाश रहती है
जो हर बार शर्मिंदगी के साथ पूछता है
भाई साहब, कैसे हैं आप ?
ध्यान रखना भाई
उसका एक फोन जरूर आएगा
उसे स्पष्ट हो जाए कि मैं नहीं रहा.

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 कहानी

तुमने क्या खोया जिसका तुम्हें दुख है
मैंने रिक्शा खींचते आदमी से पूछा

उसने कहा वह तीन भाई है
मां बचपन में ही मर गई
वह चाहता था तीनों में प्यार बना रहे
मगर उसकी हर कोशिश बेकार गई

मैंने देखा उसकी कहानी पूरी हो चुकी है
पर वह चाहता है कुछ देर मैं और रूकूं
उसका शरीर अभी उत्तेजना से हिल ही रहा था

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अफसोस

मां उस रात अंधेरे में
न जाने कहां
अकेली चली गई थी

उसमें डर से अधिक साहस था
जब वह तेज कदमों से मुझे वापस आती हुई मिली

उसने कहा लो ये टीशर्ट
मैं भूल ही गई थी
आज तुम्हारा जन्मदिन है

मां के पीछे
कुछ बड़बड़ाते-चिल्लाते शराबी चले आ रहे थे

आज मुझे अफसोस होता है उस दिन
मैंने शायद उसकी यात्रा का रोमांच
कम कर दिया था

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 खारिज करना

लोग एक-दूसरे को खारिज करने केलिए
समोसे-मिठाई का सहारा लेते हैं

इससे पता चलता है
खारिज करना आसान काम नहीं है

मगर मुझे ऐसा क्यों लगता है
कि अब ये धड़ल्ले से हो रहा है
जबकि लोग संभल कर, धैर्य रखकर, आधार जुटाकर,
झूठ और फरेब के पक्के सबूत के साथ
एक-दूसरे को खारिज कर रहे हैं

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विश्वयुद्ध

मैंने देखा फिर से विश्वयुद्ध छिड़ गया है
और मैं पता नहीं किस मुल्क में हूं

मैंने देखा मैं एक भागते हुए रेल इंजन में हूं
तुड़ी-मुड़ी बिखरी हुई रेल पटरियों के बीच
सारा आकाश आग की लपटों में घिरा था
रेलवे स्टेशन की टीन की विशाल छतरी उड़ी जा रही थी

मैंने अपनी आवाज सुनी बचना अब मुश्किल है
किसी ने कहा, नहीं, कुछ ही पल में बम के धमाकों से
हम बहुत दूर निकल चुके होंगे

मैंने कहा ऊपर देखो हमारे सर पर बम फटा है

आंखें मेरी दिमाग की नसों को फटते हुए देख रही थी
जिनसे तेज रफ्तार से खून बाहर आ रहा था

मैं तो मर रहा हूं यार, मैंने कहा
मैंने कहा, देखो, मैं क्या देख रहा हूं

हम दो ही थे इस विश्वयुद्ध में
और वह दूसरा भी पता नहीं कौन था
जो आशा की डोर पकड़े हुए था
धुआंती हुई इस युद्धरत दुनिया में

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बच्चे

ओपा जर्मनी गया है क्योंकि उसे अमेरिका जाना है.
नमा भी जर्मनी जाएगी और वहां से अमेरिका जाने की कोशिश करेगी. 
बंटी और शुभा अमेरिका में बस गए हैं.
उनके बच्चे बिल्कुल अमरीकियों की तरह अंग्रेजी बोलते हैं 
जीतू स्थायी अमेरिकी विजा के इंतजार में है. वह एक बार अमेरिका हो आया है. 

लो अब वह भी स्थाई तौर पर चला गया, अप्रवासी बन गया.
सुमन और बोल्डी अमेरिका से लौटे हैं और किसी दिन वापस अमेरिका लौट सकते हैं. 
राहुल को भारत में ही एक अमेरिकी कार कंपनी ने नौकरी दे दी है.
अब अमेरिका जाना उस केलिए ज्यादा आसान है. 

कंपनी उसे जरमनी भेने वाली है
मंजूर पत्नी-बच्चों को दरभंगा में रखकर दिल्ली लौट आया है.
दुबई जाने का प्रयास कर रहा है.
वह दो बार दुबई पहले भी जा चुका है.
उसे उम्मीद है कंपनी उसे दुबई से अमेरिका भेज सकती है.
सुनील एक करोड़ देकर भारत में ही मेडिकल पीजी की सीट खरीद रहा है. 
सब उस पर हंस रहे हैं कि इतनी रकम देकर तो वह अमेरिका जा सकता था.
काव्या ने जिस लड़के से शादी की है वह अमेरिका में रहता है.
अगले महीने वह अमेरिका रवाना हो जाएगी.
मीसा ने अमेरिका में एक बच्चे को जन्म दिया है.
मीसा का पति आशुतोष भी अमेरिका में है.
मीसा की संतान को देखने उसके मां-पिता अमेरिका गए हैं. 
अजय का मेक्सिको से फोन आया था.
अजय ने प्रियंका से पूछा है क्या वह अब अमेरिका में ही बस जाएगी.
प्रियंका का कहना है कि अमेरिका में रहते हुए 
भारत में कमाने का वह कोई मौका गवांना नहीं चाहेगी.
गुंजन का बेटा लंदन से कल भारत लौटेगा.
हफ्ते भर बाद ही अमेरिका चला जाएगा.
ये सारे बच्चे और इनकी खुशियां मुझे प्रिय हैं.
ये जहां भी रहें सलामत रहें.
उन पर कोई आफत न आए.
युद्ध की उन पर छाया न पड़े.
फासिस्टों, हुलिगनों, स्किनहेडों से वे बचे रहें.
मैं उन्हें याद करते हुए दुआ करता हूं.

—–

 

रतन जी से मुलाकात

रतन जी का नाम
मुझे कैसे याद आया

रतन जी का नाम
मुझे कई दिनों बाद बड़ी मुश्किल से याद आया

पहले मलेरिया विभाग याद आया
फिर कुष्ट रोग उन्मूलन अभियान याद आया

फिर कुछ नहीं याद आया
तीन दिनों तक

नाम याद आते ही मैं बड़बड़ाने लगा
मलेरिया रोग की जय कुष्ट रोग की जय
भारत माता की जय

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 वेकेंसी

एक झगड़ालु औरत
उसके शराबी पति से
दुनिया को बचाना है

कोई दयालु ही कर सकता है
ये काम

जो दे सकेगा औरत को प्यार
शराबी को सम्मान

आखिरकार मिल ही गया
उपयुक्त आदमी
बची रही दुनिया

—–

पानी

एक तो पहले ही से दुनिया उस रास्ते पर नहीं थी
जहां सबको पानी नसीब है

ऊपर से
नफरतखोरों का राज आ गया है

पता नहीं कब सही से पानी बंटेगा
कब वे जाएंगे

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 दिक्कत

गरीब संविधान नहीं खरीद सकते
वह थोड़ा कम मोटा और सस्ता होता
तब भी नहीं
अगर कोई गरीब खरीद ही लेता तो क्या पढ़ पाता
समझने केलिए ट्युटर कहां से लाता

—– 

(इस पोस्ट में इस्तेमाल तस्वीरे और पेंटिंग महेश वर्मा के द्वारा बनायी गई हैं.)

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