तब पहाड़ों में जिन बच्चों से मैं मिला था उनमें से कोई क्या अभी भी ज़िंदा होंगे?

0

एडुआर्डो गैलियानों वह प्रकाश स्तम्भ हैं जिनकी रौशनाई की रौशनी में लैटिन अमेरिका का रेशा रेशा दिखता है. कुछ इस तरह कि इनकी 1971 में आई पुस्तक ‘ओपन वेंस ऑफ़ लैटिन अमेरिका’ को वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज ने 2009 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को गिफ्ट दिया था. चावेज का मानना था कि यह पुस्तक लैटिन अमेरिका के इतिहास में एक धरोहर है. प्रस्तुत है, उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक ‘डेज एंड नाईट ऑफ़ लव एंड वार’ की एक शानदार कहानी, जिसका अनुवाद डॉक्टर अनिल मिश्रा ने किया है. अनिल पेशे से तो जयपुर विश्विद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं लेकिन तबीयत से पढ़ाकू. उम्मीद है, आगे इनके अध्ययन का लाभ अनुवाद और अन्य माध्यमों से हम सबको मिलता रहेगा।

-1-

वे अभी अभी नौजवान हुए थे. देश के किसी इलाक़े से आए वे शहर के विद्यार्थी और किसान थे, जहाँ एक लीटर दूध की क़ीमत पूरे दो दिन की मेहनत होती थी. उनके निशाने पर सेना होती थी और वे गंदे मज़ाक़ करते थे और हंसी-ठट्ठों से गूंज उठते थे.

मैंने कुछ दिन उनके साथ बिताए थे. हमने साथ में रोटियाँ खाई थीं. ऊपरी ग्वाटेमाला के जंगलों में रातें बड़ी सर्द थीं. हम ज़मीन पर ही, एक दूसरे से चिपके हुए, सोए रहे ताकि हमारा शरीर गरम रह सके और सुबह की कड़कड़ाती ठंड हमें मार न सके.

 -2-

छापामार दस्ते में कुछेक ही इंडियन थे. दुश्मन सेना में अधिकतर इंडियन ही थे. जब उनका समारोह ख़त्म हुआ तो सेना ने उन्हें पकड़ लिया. शराब का नशा जब उतर गया तो वे छापामार सैनिक वाली वेशभूषा पहन चुके थे और अपनी बंदूक़े संभाल रहे थे. और तब वे पहाड़ों की ओर चल दिए, जहाँ उन्हें दुश्मन को मार कर अपने लिए मर गए लोगों का बदला लेना था.

-3-

एक रात एक लड़के ने मुझे बताया कि कास्तिलो अरामास ने कैसे एक दिन अपने एक ख़तरनाक सहयोगी से छुटकारा पाया. इस आदमी को सत्ता या महिलाओं को हड़पने से रोकने के लिए, कास्तिलो अरामास ने उसे एक गोपनीय मिशन पर मनागुआ भेज दिया. तानाशाह सिमोज़ा के लिए वह एक मुहरबंद पत्र लेकर जा रहा था.

सोमोज़ा ने उसे अपने महल में बुलाया. उसने चिट्ठी खोली, इसे उसके सामने ही अपने आप में ही पढ़ा और बोला,

“तुम्हारे अध्यक्ष ने जो निवेदन किया है, उसे पूरा किया जाएगा.”

उन्होंने एक साथ शराब पी.

एक लंबी, ख़ुशनुमा बातचीत के बाद, सोमोज़ा उसे दरवाज़े तक विदा करने आया. कास्तिलो अरामास के उस दूत ने अचानक उस वक़्त अपने आप को अकेले पाया, जब उसके पीछे दरवाज़ा बंद हो गया.

बंदूक़धारियों का दस्ता, जो कि पहले ही तैयार था, उसका इंतज़ार कर रहा था. सारे सैनिकों ने एक बार गोली दाग़ी.

-4-

बातचीत, उन दिनों, मैंने जो सुनीं या फिर जैसी उनकी कल्पना की:

“सागर से सागर तक क्रांति हो रही है. समूचा मुल्क हथियारबंद हो गया है. और मेरी ख़्वाहिश इसे ख़ुद अपनी आँखों से देखने की है….”

“फिर सब कुछ, सब कुछ बदल जाएगा.”

“अपनी बुनियाद से.”

“और हमें किसी दूसरे के लिए और काम नहीं करना होगा.”

“यक़ीनन नहीं.”

“जानवरों जैसा सलूक नहीं किया जाएगा, है न?”

“कोई, किसी का मालिक नहीं होगा.”

“और अमीर-रसूख वाले लोग?”

“कोई अमीर नहीं होंगे.”

“और तब ग़रीबों को उनकी उपज के लिए पैसे कौन देगा?”

“कोई ग़रीब नहीं रहेगा. तुम्हें नहीं लगता?”

“अमीर नहीं, ग़रीब नहीं.”

ग़रीब नहीं, अमीर नहीं.”

“लेकिन ग्वाटेमाला में तब लोग नहीं रहेंगे. क्योंकि यहाँ, तुम जानते हो, जो अमीर नहीं है वह ग़रीब है.”

-5-

उप-राष्ट्रपति का नाम क्लीमेंट मारोक़िन रोजाज़ था. वह एक विस्फोटक अख़बार चलाता था, और उसके दफ़्तर के दरवाज़े पर दो हट्टे-कट्टे आदमी मशीन गन लेकर सुरक्षा में तैनात रहते थे. मारोक़िन रोजाज़ ने बांहें फैलाते हुए मेरा स्वागत किया. उसने मेरे लिए कॉफ़ी मंगाई, मेरी पीठ थपथपाई और मेरी ओर मुलामियत से देख रहा था.

मैं, जो कि पिछले हफ़्ते तक पहाड़ों में गुरिल्लाओं के साथ था, कुछ समझ नहीं पा रहा था. “यह एक जाल है,” मैंने, ख़ुद को अहम समझने के सुख के लिए, सोचा.

तब मारोक़िन रोजाज़ ने बताया कि न्यूबेरी, मशहूर अर्जेंटीनी विमानक का भाई, नौजवानी में उसका बड़ा अच्छा यार हुआ करता था और कि मैं उसकी छोटी तस्वीर जैसा हूँ. वह भूल गया कि वह एक पत्रकार के सामने था. न्यूबेरी के रूप में, मैं अमेरिका के ख़िलाफ़ उसकी भड़ास को सुनता रहा कि वे कोई काम ठीक से नहीं करते हैं. अमेरिकी विमान का एक दस्ता, जो कि अमेरिकी पायलटों द्वारा उड़ाया जा रहा था, अभी-अभी पनामा से गया था और ग्वाटेमाला में एक पहाड़ के ऊपर नापाम बमों की बारिश की थी. मारोक़िन रोजाज़ बौखलाया हुआ था क्योंकि विमान ग्वाटेमालाई ज़मीन को छुए बग़ैर पनामा वापस लौट गया था.

“वे यहाँ उतर सकते थे, तुम्हें नहीं लगता?” उसने पूछा और मैं सहमत था.

“वे यहाँ उतर सकते थे, कम से कम इतना तो कर सकते थे.”

-6-

मैंने गुरिल्लाओं से यह सुन रखा था.

उन्होंने आसपास की पहाड़ियों के ऊपर आसमान में कई बार नापाम बम के विस्फोट देखे थे. वे अक्सर लाल धुएँ की लपटें खोज निकालते थे: पाते थे कि पेड़ जड़ से झुलस गए हैं, जानवर जलकर राख हो गए हैं, चट्टानें धुआँ गईं हैं.

-7-

1954 के मध्य में, संयुक्त राज्य ने सैगन में न्गो दिन्ह दिएम की ताज़पोशी करी और ग्वाटेमाला में कास्तिलो अरमास के विजयी आगमन का बंदोबस्त किया.

एक ही झटके में, यूनाइटेड फ़्रूट कंपनी का बचाव अभियान कृषि सुधारों के कारण भहरा गया, जिसमें इस कंपनी की जुताई-बुवाई नहीं की जाने वाली ज़मीन छीन कर भूमिहीन किसानों के बीच वितरित कर दी गई थी.

अपने माथे पे इस निशान को लेकर मेरी पीढ़ी के लोगों ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. नफ़रत और बेबसी के वे पल….मुझे एक गठीले वक्ता की याद है जो एक पल हमसे शांत-प्रशांत आवाज़ में बातें करता था और उसी वक़्त अपने मुँह से आग भी उगलता था, वह रात मोंटवीडियों में ग़ुस्सैल चीख़ों और बैनरों से पट गई थी.

“हम यहाँ अपराध की भर्त्सना करने के लिए इकट्ठे हुए हैं.”

वक्ता का नाम जुआन जोसे आरवेलो था. मैं तब चौहद बरस का था और उस वक़्त के प्रभाव को कभी नहीं क्षीण होना था.

आरवेलो ने ग्वाटेमाला में सामाजिक सुधारों की उस श्रृंखला की शुरुआत की जिसे जैकब आरबेंज़ ने आगे बढ़ाया और जिसे कास्तिलो अरमास ने ख़ून से सान दिया. अपनी हुकूमत के समय में, उसने हमें बताया कि वह बत्तीस तख़्तापलट से बचकर ज़िंदा है.

सालों बाद, आरवेलो एक सरकारी कारिंदा बन गया. एक ख़तरनाक प्रजाति, प्रायश्चित करने वाला: आरवेलो जनरल अराना, एक सामंती तानाशाह, ग्वाटेमाला का औपनिवेशिक शासक और मारकाट के संयोजक, के शासनकाल में राजदूत बन गया.

जब मुझे इसका पता चला, यद्यपि मैं अपनी मासूमियत काफ़ी पहले खो चुका था, तो मुझे एक छल लिए गए नन्हे बच्चे सा महसूस हुआ.

-8-

मैं मिज़ांगोज़ से 1967 में ग्वाटेमाला में मिला. उन्होंने अपने घर में मेरा स्वागत किया, कोई सवाल नहीं पूछे, उस वक़्त मैं पहाड़ों से शहर आया था.

उन्हें संगीत पसंद था, वे अच्छी शराब पीते थे और ज़िंदगी में भरपूर डूबे हुए थे. नृत्य के लिए उनके पैर नहीं थे, लेकिन पार्टियों में वे ज़िंदादिली से अपने हाथों को ऊपर उठाते हुए तालियाँ बजाते थे.

कुछ समय बाद, अरावेले जब राजदूत था, अडॉल्फ़ मिज़ांगोज़ कांग्रेस के सदस्य थे.

एक दोपहर, मिज़ांगोज़ ने कांग्रेस के भीतर चल रही धोखाधड़ी का पर्दाफ़ाश किया. हाना खनन कंपनी, जिसने ब्राज़ील में दो सरकारों को गिराया था, अपने एक कर्मचारी को ग्वाटेमाला का वित्तमंत्री बनाने में सफल हो गई थी. जल्द ही एक ठेके पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अनुसार हाना कंपनी, सरकार की साझेदारी में, ईज़ाबेल झील के तट पर संचयित निकिल, कोबाल्ट, तांबे और क्रोम का खनन करेगी. समझौते के मुताबिक़, सरकार को अपने प्रयासों के लिए कुछ रस्मी ईनाम राशि मिलेगी, जबकि कंपनी को अरबों डॉलर का फ़ायदा होगा. देश निर्माण में एक भागीदार की भूमिका के कारण हाना को किसी भी तरह के आयकर का भुगतान नहीं करना होगा और वो आधे दाम पर पत्तनों का इस्तेमाल कर सकेगी.

मिज़ांगोज़ ने प्रतिरोध में अपनी आवाज़ उठाई.

कुछ ही समय बाद, जब वे अपनी पिऊगिऊत कार में बैठने जा रहे थे, उनकी पीठ पर गोलियों की बौछार की गई. वे अपनी व्हीलचेयर से गिर पड़े और उनका शरीर छलनी हो गया.

  -9-

उपनगरीय इलाक़े की एक दुकान में, मैं ग्वाटेमाला की सैन्य पुलिस द्वारा सर्वाधिक वांछित व्यक्ति का इंतज़ार कर रहा था. उसका नाम रुआनो पिंजॉन था, और वह भी कभी सैन्य पुलिस में था या हुआ करता था.

“इस दीवार को देखो. कूदो. कूद सकते हो..?”

मैंने अपनी गर्दन उठाई. दुकान के पीछे की दीवार ऊपर और ऊपर खिंचती चली जाती थी.

“नहीं” मैंने कहा.

“लेकिन, अगर वे आते हैं तो तुम कूद सकते हो…?”

कुछ और नहीं किया जा सकता. अगर वे यहाँ आते हैं, तो मुझे उड़ना पड़ेगा. घबराहट किसी को भी ओलंपिक चैंपियन बना देती है.

लेकिन वे नहीं आए. रुआनो पिंजॉन उस रात आया और मैं उससे लंबी बातचीत कर सका था. वह काले चमड़े का जैकेट पहने था और उसकी धड़कनें उसकी आँखों को नचा रहीं थीं. रुआनो पिंजॉन का परित्याग कर दिया गया था.

चुनाव की पूर्व संध्या पर तक़रीबन बीस राजनीतिक नेताओं की हत्या का वह इकलौता जीवित गवाह था.

माटामोरस छावनी में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था. पिंजॉन उन चार पुलिसकर्मियों में था, जिन्होंने लंबी, भारी-भरकम बोरियाँ ट्रक में ठूँसी थीं. उसका ध्यान इसलिए गया क्यूंकि उसकी बांहें ख़ून से लथपथ हो गई थीं. औरोरा हवाई अड्डे पर उन्होंने लाश की इन बोरियों को वायुसेना के एक विमान “500” में रखा था. बाद में, इन बोरियों को प्रशांत महासागर में फेंक दिया गया.

उसने उन लोगों को छावनी में वापस आते हुए देखा था, उन्हें बुरी तरह पीटा गया था, और उसने देखा कि रक्षा मंत्री निजी तौर पर सारे अभियान का मार्गदर्शन कर रहा था.

जिन लोगों ने लाशें ढोई थीं, उनमें रुआनो पिंजॉन अकेला था, जो जीवित बच पाया था. एक आदमी को पेंसियॉन ला पोसादा’ नामक अस्पताल के बिस्तर में उसकी छाती में चाक़ू के साथ पाया गया. दूसरे को ज़कापा के एक शराबख़ाने में पीछे से गोलियों से छलनी कर दिया गया था, और एक अन्य को केंद्रीय स्टेशन के पीछे के एक शराबख़ाने में मार गिराया गया था.

———–

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here