चीन और जर्मनी के बीच गहरे होते सम्बन्ध पर होगी दुनियाभर की नजर

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सौतुक डेस्क/

हाल ही में चीन से भेजे गए दो पंडो ने बर्लिन के चिड़ियाघर की रौनक बढ़ाई. प्रगाढ़ होती दोस्ती के बाबत चीन ने यह तोहफा भेजा था.

यूरोप की यात्रा पर निकले चीन के राष्ट्रपति शी झिनपिंग जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के साथ इन दो सुघड़ जीवों को देखने वहाँ के चिड़ियाघर जायेंगे. ट्रम्प-काल में अपने रिश्ते को नए सिरे से गढ़ने में लगे ये दो देश आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे.

इस ट्रम्प-काल में चीन-जर्मनी के साथ विश्व के अन्य देशों खासकर यूरोपी देशों के लिए विचार करने के लिए बड़ा मशाला पड़ा हुआ है.

ट्रम्प के आने के बाद अमेरिकी राजनीति अप्रत्याशित होती जा रही है. ऐसे में चीन और जर्मनी में करीबी बढ़ने की सम्भावना काफी अधिक है. मुद्दों की तो कमी है नहीं. ये आर्थिक, सामरिक तथा जलवायु परिवर्तन कुछ भी हो सकता है.

इसी साल फ़रवरी महीने में जारी आंकड़ो के हिसाब से चीन जर्मनी के सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी देश बना और अमेरिका फिसल कर तीसरे स्थान पर पहुँच गया. जर्मनी और चीन के बीच पिछले साल यानि वर्ष 2016 में कुल 170 बिलियन यूरो का व्यापार हुआ.

वाजिब है जर्मनी ने इसका स्वागत भी किया. खासकर ऐसे मौके पर जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वैश्वीकरण और मुक्त व्यापार के नियमों को मानने से इनकार कर रहे हैं, सबको नए व्यापारिक सम्बन्ध बनाने और पुराने सम्बन्ध को मजबूत करने की चिंता पड़ी है. सनद रहे कि कुछ महीने पहले ट्रम्प ने जर्मनी से माल आयात पर नए कर लगाने की धमकी तक दे डाली थी. ट्रम्प के सहयोगी ने तो जर्मनी पर कमजोर यूरो का इस्तेमाल कर निर्यात बढाने का आरोप लगाया था.

ऐसे ही नहीं जर्मनी के वाईस चांसलर सिगमार गैब्रिअल ने यूरोपियन यूनियन को व्यापार को नजर में रखते हुए पुनः एशिया की तरफ रुख करने की सलाह दे डाली.

लेकिन इन मीठी बातों के साथ कुछ कड़वे सत्य भी हैं जो इस रिश्ते को और प्रगाढ़ बनाने के दरम्यान जर्मनी और अन्य यूरोपी देशों के माथे पर बल डालता रहेगा.

जर्मनी के लिए पहला डर है चीन का उच्च मूल्य वाले उद्योगों में बढती क्षमता. पिछले साल के चीन के यूरोप में निवेश के मुकाबले यूरोप का चीन में निवेश लगभग चौथाई रहा है. दूसरे चीन हमेशा से यूरोपियन यूनियन की एकता को कठघरे में रखा है. इस नए ताकतवर देश ने कुछ देशों को खास तवज्जोह दी है और बाकियों को ठेंगे पर रखा है.

जो भी हो विश्व के लगभग सभी देश जर्मनी और चीन के इस सम्बन्ध की दिशा पर नजर रखेंगे.

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