मैं भी चौकीदार: क्या यह एयरटेल के मजबूत नेटवर्क और सलमान के बीइंग ह्यूमन की अगली कड़ी है!

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उमंग कुमार/

बतौर एयरट्रेल के ग्राहक आप उस समय अपने ऊपर हंस रहे होते हैं जब देश की राजधानी में कॉल ड्राप की वजह से आप परेशान हो रहे हों और ठीक उसी समय आपके सामने एयरटेल का एक विज्ञापन दिखता है कि कैसे इसके नेटवर्क की वजह से लोग जंगल और दूर-दराज़ पहाड़ों पर भी  निर्बाध फ़ोन  सेवा का आनंद उठा रहे हैं.  आपके फ़ोन पर नेटवर्क दिखाने वाली चार खूंटियों में से एक भी मौजूद नहीं होती और उसी समय टीवी और बड़े-बड़े पोस्टरों पर छोटे बालों वाली एक लड़की उपस्थित होती है और आपको बताती है कि कैसे आपका नेटवर्क सबसे बेहतर है.

यह वही दौर है जब बॉलीवुड के सितारे सलमान खान हिट एंड रन केस में आरोपी बनते हैं. आरोप के अनुसार, उनकी गाड़ी के नीचे सड़क पर सो रहे कई कमजोर लोग आ जाते हैं. इन्हीं दिनों सलमान विलुप्तप्राय जानवरों के शिकार में शामिल होने के आरोपी बनते हैं. ठीक उसी समय सलमान का एक नया ब्रांड आता है जिसका नाम है ‘बीइंग ह्यूमन’, जो मानवीयता का पाठ पढ़ाता है. खैर सलमान कई आरोपों में बरी हो चुके हैं पर यह इस आलेख का विषय नहीं है.

यहाँ यह समझने की कोशिश हो रही है कि क्या सलमान खान और एयरटेल अपने टारगेट समूह को यह समझाने में सफल हुए कि जो दिख रहा है वह सही नहीं है? क्या भारतीय जनता पार्टी या उसके नेता नरेन्द्र मोदी देश के लोगों को यह समझा पाने में सफल होंगे कि जो दिख रहा है वह सही नहीं है. क्या प्रचार तंत्र का उपयोग कर वह साबित किया जा सकता है जो है ही नहीं.

ऐसा इसलिए, क्योंकि नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम अभी वही कर रही है. मोदी ने देश में भ्रष्टाचार को मिटाने का वादा किया और तब जाकर गद्दी मिली. उन्होंने एक बार रैली में कहा भी था कि आप देश का प्रधानमंत्री नहीं चौकीदार चुनिए. लेकिन मोदी के सत्ता में आने के बाद जो हुआ वह उनके वादे के विपरीत था.

मोदी के कार्यकाल में ही देश के कई उद्योगपति बैंको का लाखों करोड़ रूपया लेकर चम्पत हो गए. देश में बढ़ती आतंकवाद की घटना देखी गई और साथ ही साथ यह सब महत्वपूर्ण जगहों पर हुआ जैसे सेना के कैंप, कारवां इत्यादि. स्त्रियों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार दिखे. किसानों की बढ़ती आत्महत्या दिखी.

देश छोड़कर भागे उद्योगपतियों में विजय माल्या, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी जैसे और ढेरों नाम हैं जो इस सरकार के कार्यकाल के दौरान देश का लाखो करोड़ लेकर चम्पत हो गए. उनके नाम निम्नलिखित है.

इस सरकार के कार्यकाल में बैंक का पैसा लेकर भागे उद्योगपतियों के नाम

नाम देनदारी (रुपये में)
जतिन मेहता 4,625 करोड़
विजय माल्या 6,203 करोड़
पुष्पेश वैद 3.75 करोड़
चेतन जयंतीलाल संदेसरा 5,383 करोड़
नितिन जयंतीलाल संदेसरा
दिप्तिबेन चेतनकुमार संदेसरा
एकलव्य गर्ग 12.83 करोड़
संजय कुमार कालरा 6 करोड़
सब्या सेठ 389.85 करोड़
राजीव गोयल 621 करोड़
अलका गोयल
सन्नी कालरा 10.99 करोड़
आरती कालरा
संजय कालरा 8.77 करोड़
वर्षा कालरा
विजय माल्या 1,301.67 करोड़
सुधीर कुमार कौरा 32.38 करोड़
सुरेन्द्र सिंह 5.92 करोड़
अंगद सिंह
हरसाहिब सिंह
हरलीन कौर
विनय मित्तल 43. 81 करोड़
नीरव मोदी 6,498 करोड़
मेहुल चोकसी 7,080 करोड़
विक्रम कोठारी 800 करोड़

स्रोत: ब्लूमबर्ग और अन्य मीडिया रिपोर्ट

अभी यह लिस्ट पूरी नहीं है. दूसरी तरफ राफेल नाम के सुरक्षा सौदे में भी नरेन्द्र मोदी की भूमिका सवालों के घेरे में हैं और सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर अपील की गई है. ऐसी खबरें प्रकाशित हुई हैं कि नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप पर फ़्रांस के साथ हुए इस राफेल सौदे में भारतीय सरकारी कंपनी एचएएल को हटाकार अनिल अम्बानी की नई कंपनी को शामिल करना पड़ा.

इन सब बातों को ध्यान में रखकर विपक्ष ने नारा निकाला ‘चौकीदार ही चोर है’. यह नारा चल निकला और लोगों को अपील करने लगा. अब मोदी के पास इसे काटने के सिवा और कोई तरीका नहीं बचा था. इसलिए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे ‘मैं भी चौकीदार’ कैंपेन में शामिल हों.

अब देखना यह है कि एयरटेल, सलमान खान के तर्ज पर नरेन्द्र मोदी का अपनी रीब्रांडिंग करने वाला यह कैंपेन उनके चुनावी अभियान में साथ देता है या इसका असर उल्टा पड़ता है.

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