दलित राजनीति का हाथी फिर से सड़क पर, कितना हडकंप मचा पायेगा?

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  1. मायावती के अरमानो पर पानी फेरने का पूरा प्लान तैयार हो चुका है ! दरअसल योगी जी CM और केशव प्रसाद मौर्या जी डिप्टी CM बन जाने से गोरखपुर एंड फूलपुर सीट खाली हो गयी थी जिस पर उपचुनाव होने थे। गोरखपुर सीट तो पक्की थी बीजेपी की, लेकिन फूलपुर सीट पे थोड़ा डाउट था। कांग्रेस ने मायावती के साथ मिलकर चाल चली थी और उसी के तहत राज्यसभा से इस्तीफा दिया जो की अब एक्सेप्ट भी हो चुका है, ताकि मायावती फूलपुर सीट से चुनाव लड़े और जीत जाये। फिर दलित राजनीति की जाये। मायावती महागठबंधन की अकेली उम्मीदवार होंगी। सपा, बसपा, कांग्रेस तीनो ने मिलकर एक प्रयोग करने की सोचा है यदि इस प्रयोग में सफल रहे तो 2019 के लोकसभा चुनाव में इसी फार्मूले पर आगे बढ़ा जाएगा ।
    लकिन अमित शाह जी ने अपना पत्ता फेंक दिया। अपुष्ट खबरों के अनुसार अब रणनीति ये हैं की केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर सीट से इस्तीफा नहीं देंगे और दिल्ली बुलाया जाएगा और मंत्री बनाया जा सकता है । केशव की जगह किसी और बड़े दलित नेता को डिप्टी CM बनाया जाएगा।
    मायावती घर की रही ना घाट की, मतलब न इधर की रही न उधर की। .

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