आप के 20 विधायक अयोग्य घोषित, क्या इससे पार्टी को फायदा होगा?

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मीडिया से बात करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता

सौतुक डेस्क/

क्या सच में आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाना इस पार्टी को मदद करने वाला है? रविवार को राष्ट्रपति भवन से लिए गए इस फैसले के बाद कांग्रेस ने तो यही आरोप लगाया है. इस पार्टी का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग दोनों मिलकर आप को मदद कर रहे हैं. कांग्रेस के अनुसार आप को इसके बाद जनता की सहानुभूति मिलेगी.

सनद रहे कि बड़े ही आनन फानन में यह फैसला लिया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति के कार्यकाल सम्पान होने के महज तीन दिन पहले, भारतीय चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया और राष्ट्रपति को भेज दिया. राष्ट्रपति ने भी बहुत ही कम समय में (दो दिन ) में अपना फैसला सुना दिया है.

रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आप के 20 विधायकों को आयोग्य घोषित किए जाने की निर्वाचन आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के बाद, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति ने दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार अधिनियम (जीएनसीटीडी) के तहत अयोग्य ठहराया है.

यह 20 विधायक हैं; अलका लांबा, आदर्श शास्त्री, संजीव झा, राजेश गुप्ता, कैलाश गहलोत, विजेंदर गर्ग, प्रवीण कुमार, शरद कुमार, मदन लाल खुफिया, शिव चरण गोयल, सरिता सिंह, नरेश यादव, राजेश ऋषि, अनिल कुमार, सोम दत्त, अवतार सिंह, सुखवीर सिंह दाला, मनोज कुमार, नितिन त्यागी और जनरैल सिंह.

निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को आप के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने की सिफारिश की थी. इन सभी पर बतौर संसदीय सचिव लाभ के पद पर आसीन होने के आरोप लगाए गए थे.

आयोग ने राष्ट्रपति को अपना सुझाव वकील प्रशांत पटेल की शिकायत पर दिया था. हिंदू लीगल सेल के सदस्य पटेल ने जून 2015 में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के समक्ष याचिका दाखिल की थी.

पटेल द्वारा दाखिल शिकायत में कहा गया कि जरनैल सिंह समेत आप के 21 विधायकों को दिल्ली सरकार में मंत्रियों के लिए संसदीय सचिव नियुक्त करके संविधान का उल्लंघन किया गया है. जरनैल सिंह ने पिछले साल पंजाब विधानसभा चुनाव में भाग लेने के लिए राजौरी गार्डन सीट से इस्तीफा दे दिया था.

इस फैसले के बाद आप के सयोंजक अरविन्द केजरीवाल तो ट्वीटर पर सहानुभूति बटोरते ही दिखे. उन्होंने इस मौके पर भगवान्, ईमानदारी, सच्चाई सबका जिक्र कर दिया.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि भगवान की कृपा से आप को दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से 67 सीटें इसीलिए मिली थी, क्योंकि तीन साल बाद उनकी पार्टी के 20 विधायक अयोग्य घोषित होने वाले थे. आम आदमी पार्टी (आप) के ट्विटर हैंडल पर जारी एक बयान में केजरीवाल ने कहा है, “मैंने हमेशा कहा कि यह सब भगवान की कृपा है. उन्हें यह भी पता था कि तीन साल बाद ये लोग हमारे 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर देंगे. इसलिए उन्होंने हमें दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें दी.”

केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आप के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की निर्वाचन आयोग की सिफारिश को मंजूरी दे दी है. इन विधायकों पर लाभ के पद धारण करने के आरोप थे.

केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “उन्होंने (भाजपा नीत केंद्र सरकार) हमारे विधायकों पर झूठे आरोप लगाकर हमें काफी परेशान किया. उन्होंने मेरे ऊपर सीबीआई के छापे डलवाए और उन्हें कुछ नहीं मिला. आज उन्होंने हमारे 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया.”

केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी निर्वाचन आयोग के इस एकतरफा, अनैतिक और असंवैधानिक फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी.

उन्होंने कहा, “अगर जरूरत पड़ी तो हम सर्वोच्च न्यायालय भी जाएंगे. संविधान सर्वोच्च है, जिसकी रक्षा हमारी न्याय प्रणाली ने समय समय पर की है.”

कोविंद की मंजूरी के बाद, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति ने दिल्ली विधानसभा के 20 सदस्यों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम (जीएनसीटीडी) के तहत अयोग्य ठहरा दिया है.

(आईएनएएस)

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