भाजपा के शासन में सामरिक महत्व की जगह आतंकियों के निशाने पर क्यों रहती है?

0

उमंग कुमार/

पुलवामा के आतंकी हमले के बाद यह तो स्पष्ट हो गया नरेन्द्र मोदी की सरकार कश्मीर में आतंकवाद को रोकने में विफल रही है. पर गौर से देखा जाए तो यह दिखेगा कि कांग्रेस की सरकार के शासनकाल में होने वाले आतंकवादी हमले और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन में होने वाले आतंकी हमलों में एक ख़ास अंतर है.

कांग्रेस के शासन में आतंकवादी जहां आम आदमी और सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाते हैं वहीँ भाजपा के समय में ये आतंकवादी शासकीय और बड़े प्रतीकों पर हमला करते हैं. जैसे नरेन्द्र मोदी की सरकार में तीन बड़े हमले सुरक्षा बलों के ऊपर हो चुका है. जैसे 18 सितम्बर 2016 को चार आतंकियों ने उरी स्थित सेना के 12वीं बटालियन के कैंप पर हमला किया. इसमें 13 जवान जिन्दा जल गए. कुल मिलकर 18 जवान शहीद और 19 घायल हुए. इसी तरह 2 जनवरी 2016 को पठानकोट के एयर फ़ोर्स बेस पर आतंकियों ने हमला किया जिसमें सात जवान शहीद हुए. पुलवामा के हमले में तो 44 जवान शहीद हो गए. ये सारे हमले ऐसे थे जो भारत की तैयारी की पोल खोलते हैं. आतंकवादी सुरक्षा की दृष्टि से लगभग असंभव सी लगने वाली जगह पर भी पहुँच जा रहे हैं.

यही हाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार के समय था जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे. तब आतंकवादियों ने न केवल जम्मू कश्मीर के विधान सभा को निशाना बनाया बल्कि देश की संसद तक पहुँचने में सफल हो गए. वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान लाल किले को भी निशाना बनाया गया. यद्यपि इन हादसों में जानमाल की अधिक क्षति नहीं हुई पर इन हादसों के प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़े हैं.

दूसरी तरफ मनमोहन सिंह सरकार के समय भी ढेर आतंकवादी हमले हुए पर ये हमले सामान्य बाज़ार, रेल गाडी, होटल इत्यादि में हुए . ऐसे हमले मुंबई, दिल्ली, अयोध्या, वाराणसी जैसे शहरों के भीड़भाड वाले इलाके में हुए और सामान्य लोगों को निशाना बनाया गया.

आखिर क्यों? एक ही देश में एक मुद्दे की हिंसात्मक राजनीति में आतंकियों ने अलग अलग निशाना क्यों चुना? इस सवाल का कोई समुचित जवाब नहीं खोजा जा सकता बल्कि अनुमान ही लगाया जा सकता है.

वर्तमान सरकार के पक्ष में बात करने वाले लोग इसे सरकार की उपलब्धि मानते हैं कि देश के अन्य हिस्सों में आतंकी हमले नहीं हुए हैं और आतंकी हमला कश्मीर और पंजाब तक ही सीमित रहा है. जब इस मुद्दे पर कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों से बात की गई तो उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि जब आतंकी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जगहों को निशाना बना ले रहे हैं तो भीड़भाड़ वाली जगह को क्यों चुनें. भीड़भाड़ वाली जगहों को निशाना बनाना काफी आसान है पर सुरक्षा की दृष्टि से सेना का काफिला, कैंप इत्यादि ऐसे क्षेत्र में गिने जायेंगे जहां सुरक्षा बल काफी चौकन्ने रहते हैं. कोई भी आतंकी समूह चाहेगा कि ऐसी जगहों को निशाना बनाया जाये. इससे आतंक का माहौल तो बनता ही है दूसरे सेना पर मनोवैज्ञानिक बढ़त भी मिलती है. इन सब बातों के मद्देनज़र वो इन्हीं महत्वपूर्ण जगहों पर हमला करना चाहते होंगे और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसे ढेरों हमले हुए हैं.

अगर इस तर्क से देखा जाए तो कांग्रेस सरकार सामरिक महत्व के स्थानों तक इन आतंकियों को नहीं पहुँचने देती और ये इसलिए वाराणसी, अयोध्या, रेल गाडी और मुंबई के ताज होटल को निशाना बनाते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here