भाजपा के जीत की खबर सुनकर क्यों उछल पड़ता है शेयर बाज़ार?

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उमंग कुमार/

लोकसभा चुनाव का सातवाँ चरण ख़तम होते ही कई बड़े चैनलों ने यह बताना शुरू कर दिया कि किसकी सरकार बनेगी. सबने यह कहा कि नरेन्द्र मोदी वापस सत्ता में आ रहे हैं वो भी भारी बहुमत से. फिर क्या था शेयर बाज़ार ने एक हज़ार पॉइंट से ऊपर की छलांग लगाई और 38,711 पर पहुँच गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने 3.75 प्रतिशत की उछाल दर्ज की. इस तरह का उछाल शेयर बाज़ार को  2013 से नसीब नहीं हो पाया था. कहते हैं कि इस उछाल में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये के वारे न्यारे हो गए हैं.

सवाल उठता है कि क्या सारे एग्जिट पोल के बाद शेयर बाज़ार में उछाल दर्ज किया जाता है? इसका जवाब वरिष्ठ पत्रकार और इपीडब्ल्यू जैसी पत्रिका के संपादक रह चुके  परंजय गुहा ठाकुरता के एग्जिट पोल के दिन आने वाले ट्वीट में खोजा जा सकता है.

उन्होंने लिखा कि उन्हें जानकार सूत्रों से खबर मिली है कि शेयर बाज़ार को संचालित करने वाले लोग टीवी चैनलों को पैसा देकर ऐसा एग्जिट पोल दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे बाज़ार विपरीत दिशा में पर तेजी से आगे बढे. उन्होंने एग्जिट पोल के आने के पहले ही लिख दिया था कि इसपर आँख मूँद कर भरोसा न करें.

इस ट्वीट के अनुसार समाचार चैनलों ने मोदी सरकार के भारी बहुमत से पुनः वापसी की घोषणा कर दी. इंडिया टुडे और एक्सिस ने तो मोदी को 2014 से भी आगे ले जाकर साढ़े तीन सौ का आंकड़ा पार करा दिया. यह रविवार के शाम की बात है और सोमवार को सुबह से ही शेयर बाज़ार नईं ऊँचाई छूने लगा.

फिर सवाल था कि आखिर भाजपा को अधिक सीट देनें से शेयर बाज़ार ऊपर क्यों जाएगा? 1999 से अबतक का आंकड़ा देखा जाए तो यह आभास होता है कि अधिकतर मामलों में अगर भाजपा चुनाव में अच्छा कर रही है तो बाज़ार में उछाल देखा जाता है.

एक बार सयुंक्त प्रगतिशील गठबंधन के मामले में भी शेयर बाज़ार ने उछाल दिखाई थी लेकिन वह अन्य समय की तुलना में काफी कम रही. वहीँ ठीक इसके उलट 2004 के चुनाव में शेयर बाज़ार नकारात्मक जरुर रहा लेकिन वह गठबंधन की सरकार के लिए था न कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए. शेयर बाज़ार गठबंधन की सरकार के अनुमान से लुढ़क गया था.

अब सवाल यह है कि शेयर बाज़ार भाजपा के आने से उछाल क्यों मारता है? देश के अन्य राजनितिक दलों में ऐसा क्या है जो शेयर बाज़ार को सुस्त कर देता है?

इसका जवाब यह है कि भाजपा बाज़ार की शुभचिंतक मानी जाती है. ऐसे देखा जाता है कि अगर यह राजनितिक पार्टी सत्ता में आती है तो बाज़ार, निजी उद्योग और निजीकरण को बढ़ावा देगी. यद्यपि कांग्रेस सरकार की भी नीतियां कुछ ऐसी ही रही है लेकिन अभी भी बड़े स्तर पर इस पार्टी को गरीबों के हित की सोचने वाली पार्टी के तौर पर देखा जाता है. अपने पहले दौर में नरेन्द्र मोदी सरकार ने कांग्रेस पर ऐसा ही कुछ आरोप लगाया था कि कांग्रेस को लोगों को डोल देने में भरोसा करती है.

चूंकि बाज़ार और गरीबों का हित जिसमें मजदूरों का अधिकार, जमीन अधिग्रहण इत्यादि शामिल हैं एक दूसरे के खिलाफ खड़े पाए जाते हैं इसलिए यह कहा जा सकता है कि बाज़ार भाजपा को अधिक पसंद करता है. यही कारण है कि निवेशक भाजपा को अपने लिए फायदेमंद समझते हैं.

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