क्या बच्चा पालने की ज़िम्मेदारी सिर्फ माँ की है, पिता की नहीं?

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Only Ôfraction' use paternity leave. Embargoed to 0001 Monday May 14. File photo dated 27/11/11 of a man with a pushchair as the number of men taking paternity leave has increased by 14% over the past year, but is still a 'very small fraction' of those entitled to time off, according to a new study. Issue date: Monday May 14, 2012. There is still a 'huge gap' between the number of men and women taking time off after the birth of a child, said international law firm Pinsent Masons. Many firms are critical of Government plans to extend paternity leave, said the report. See PA story INDUSTRY Leave. Photo credit should read: Yui Mok/PA Wire URN:13510330

शिखा कौशिक/

कामकाजी महिलाओं को बच्चा पैदा होने पर उन्हें छः महीने के मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) की बात तो सरकार ने मान ली. क्या इस देश के पिताओं के लिए भी कुछ ही दिन सही ऐसे अवकाश की सुविधा मिल सकेगी?

आने वाले सांसद सत्र में पितृत्व अवकाश के बाबत एक निजी बिल के आने की सम्भावना है जो आज के परिवार की संरचना को देखते हुए, नए पिताओं के लिए भी कुछ अवकाश की मांग करेगी. शहर में आज कल कामकाजी जोड़ो की संख्या बढ़ रही है.

अपने घर से मीलों दूर इन काम करने वाले जोड़ो को ऐसे समय में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. खैर माँओं की दृष्टि से देखा जाए तो वर्तमान सरकार ने बहुत ही अच्छा कदम उठाते हुए निजी क्षेत्र में भी महिलाओं के लिए छः महीने के अवकाश की व्यवस्था कर दी.

इसी तर्ज पर आने वाले संसद सत्र में एक प्राइवेट मेंबर्स विधेयक लाये जाने की सम्भावना है जो निजी ही नहीं बल्कि असंगठित क्षेत्र में भी नए पिताओं के लिए तीन माह के पितृत्व अवकाश की बात करता है.

पैटर्निटी बेनिफिट विधेयक 2017 को संसद में आनेवाले सत्र में पेश किये जाने की उम्मीद है. यह विधेयक माँ और पिता दोनों को बच्चे के पालन पोषण में अहम् भूमिका निभाने का अवसर देते हुए बराबर लाभ देने की बात करता है.

कांग्रेस के सांसद राजीव सातव जो इस बिल को ला रहे हैं, उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि “बच्चे के उज्जवल भविष्य और अच्छे स्वास्थय के लिए माता-पिता दोनों को उस बच्चे पर समय देना पड़ता है. क्योंकि बच्चे की देखभाल माता और पिता दोनों की ज़िम्मेदारी है.”

उन्होंने आगे कहा है कि यह विधेयक निजी और असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे से कम से कम 32 करोड़ पुरुषों को लाभ पहुंचाएगा.

फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 15 दिन के पितृत्व अवकाश का प्रावधान है. कई कॉर्पोरेट कम्पनियाँ भी अपने कर्मचारियों को इस तरह की सुविधा देते हैं. वर्तमान नियम के अनुसार, नए पिताओं को मिलने वाला यह अवकाश बच्चे के जन्म से सात दिन पहले शुरू होना चाहिए.

अगर यह बिल किसी भी तरह से कानून की शक्ल ले पाता है जिसकी सम्भावना कम है, तो निजी और सरकारी सभी संस्थानों को पितृत्व अवकाश का प्रावधान करना होगा.

यह विधेयक न केवल सरकारी नौकरी में दिए जा रहे अवकाश की सीमा बढ़ाने पर ज़ोर देता है बल्कि सभी क्षेत्रों में लागू करने पर भी ज़ोर देता है. नया विधेयक इस बात पर ज़ोर देता है कि यह अवकाश बच्चे के जन्म के दिन से अगले तीन माह तक में लिया जाना चाहिए.

इतना ही नहीं, यह विधेयक उन पिताओं के लिए भी इस अवकाश की बात करता है जिन्होंने बच्चा गोद लिया हो या सरोगेसी के तहत पाया हो.

इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन के एक रिपोर्ट की चर्चा करते हुए, सातव कहते हैं कि जो पिता अपने बच्चों के जन्म के समय एक या दो हफ्ते की छुट्टी लेते हैं, वे अपने बच्चों के बड़े होने पर भी उनके साथ ज़्यादा शामिल होते हैं. उनका कहना है कि ऐसा प्रावधान सामाजिक संरचना में भी अंतर लाएगा. घर से लेकर दफ्तर तक लिंग भेद की समस्या को को हल करेगा. और तो और समाज में स्त्री और पुरुष के तय रोल की अवधारणा को भी बदलेगा.

यह विधेयक मैटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट ) बिल 2016 की तर्ज़ पर ही है. इस साल की शुरुआत में लोकसभा ने मैटरनिटी बिल संशोधन करके मैटरनिटी लीव को बढाकर 12 से 26 हफ्ते कर दिया था. संसद में इस विधेयक पर चर्चा करते हुए कई सांसदों ने पैटर्निटी लीव की भी बात की थी.

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