कौन है मोईन अख्तर कुरैशी जिसकी वजह से तीन सीबीआई निदेशकों पर गाज गिर चुकी है

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अनिमेष नाथ/

देश में अभी सबसे बड़ा मुद्दा है सीबीआई में मचा घमासान और उसके बाद आनन-फानन में सरकार की कार्यवाही जिसे राफेल जांच से जोड़कर देखा जा रहा है.  लेकिन जो आदमी इन दोनों निदेशकों के विवाद का केंद्र बनकर उभरा है या उभारा गया है, उसका नाम है मोईन अख्तर कुरैशी. कौन है यह?

मोईन एक करोड़पति मीट व्यापारी हैं जिसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं. मोईन के लिए सुर्खियाँ नई चीज नहीं है. पूर्व सीबीआई निदेशकों ए.पी. सिंह और रंजीत सिन्हा की साख गिरने की वजह भी मोईन को ही बताया जाता है.

मोईन का नाम सबसे पहले तब सुर्ख़ियों में आया था जब 2014 में वह तत्कालीन सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा से 15 महीनों में 70 बार उनके घर पर मिलने गया था.

इस खबर ने रातोरात मोईन कुरैशी को चर्चा का विषय बना दिया था.

हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना, जो कि अलोक वर्मा और अस्थाना के बीच छिड़ी जंग की वजह सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं, उन्होनें पिछले वर्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बताया कि कुरैशी के पूर्व सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा से सम्बन्ध देखते हुए मैंने एक सीबीआई मामले में अपने दोस्त की ज़मानत कराने के लिए कुरैशी को 1 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.

बीते बुधवार को ही वर्मा को छुट्टी पर भेज उन्हें सारी शक्तियों और कर्तव्यों से वंचित कर दिया गया है

बाद में वर्ष 2014 में यह भी खबर सामने आई कि कुरैशी वर्ष 2010 से लेकर 2012 तक सीबीआई निदेशक रहे ए.पी.सिंह से भी संदेशों का आदान प्रदान करता रहा है. जिस कारण आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जांच शुरू की थी और सीबीआई ने भी पिछले वर्ष फरवरी में इस मामले की जांच करते हुए सिंह के खिलाफ मामला भी दर्ज किया. इन्हीं आरोपों की कीमत के रूप में सिंह को केन्द्रीय लोक सेवा आयोग में ‘सदस्य’ के पद से भी हाथ धोना पड़ा था.

हालाँकि सिंह ने भी उन पर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि सीबीआई ने अभी तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है.

और अब आलोक वर्मा को भी कुरैशी के मामले में कीमत चुकानी पड़ी है. बीते बुधवार को ही वर्मा को छुट्टी पर भेज उन्हें सारी शक्तियों और कर्तव्यों से वंचित कर दिया गया है. अस्थाना ने वर्मा पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने कुरैशी को राहत देने के लिए सना से 2 करोड़ रुपये की रिश्वत ली है. जबकि वर्मा पिछले हफ्ते ही अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा चुके हैं. इस एफआईआर में आरोप लगाया है कि अस्थाना ने व्यापारी सना से 3 करोड़ रुपये की रिश्वत ली है.

कुरैशी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर से 1993 में एक बूचड़खाने से मीट के धंधे की शुरुआत की थी और आज कुरैशी को भारत के सबसे बड़े मीट व्यापारी के रूप में जाना जाता है. कुरैशी ने पिछले 25 वर्षों में अपने व्यापार को बढ़ाते हुए निर्माण और फैशन के क्षेत्र में 25 से भी ज्यादा कंपनियां खोली हैं.

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