हत्यारों का अभिनंदन और वाट्सएप्प नियंत्रण: क्या यह सरकार का अगला चुनावी पैंतरा है

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 बृजमोहन सिंह/

मंगलवार को वाट्सएप्प ने लगभग सारे अखबारों में पूरे पन्ने का का ऐड प्रकाशित करवाया. उद्देश्य था लोगों को यह बताना कि इस सोशल नेटवर्किंग साईट पर फैलाए जा रहे अफवाह से कैसे बचें. हाल ही में फेसबुक के स्वामित्व वाली इस कंपनी को सरकार ने आदेश दिया था कि इस प्लेटफ़ॉर्म के जरिये फैलाए जा रहे अफवाहों को रोकने की कोशिश की जाए. बदले में वाट्सएप्प ने सरकार से भी इसमें मदद करने की अपील की.

प्रथम दृष्टया सरकार की मंशा पर कोई संदेह नहीं होता क्योंकि इन अफवाहों की वजह से आजकल देश में कई जगह हत्यारी भीड़ ने जन्म ले लिया है, जो कानून व्यस्था में भरोसा नहीं करती. एक अफवाह फैलाई जाती है, जो सामान्यतः बच्चा चुराने या बीफ खाने इत्यादि का होता है और इस अफवाह के बिना पर कुछ लोग मिलकर किसी की हत्या कर देते हैं.

वैसे तो वर्ष 2014 से जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई, तभी से ऐसे वारदात हो रहे हैं. लेकिन हाल-फिलहाल हत्यारी भीड़ के द्वारा किसी को मारे जाने की घटनाएं  तेजी से बढ़ीं हैं. असम, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में बीते दो महीनों में लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या) की दो दर्जन से ज्यादा घटनाएं हुई हैं.

इंडियास्पेंड के एक अध्ययन के अनुसार 2017 के जनवरी से अब तक पूरे देश में अफवाह के आधार पर 33 लोगों की हत्या कर दी गई. इनलोगों के बारे में यह अफवाह फैलाई गई कि ये लोग बच्चा चुराने का प्रयास कर रहे थे. अभी गाय के नाम पर हो रही हत्याएं इसमें शामिल नहीं हैं.

2017 के जनवरी से अब तक पूरे देश में अफवाह के आधार पर 33 लोगों की हत्या कर दी गई

अब तक सरकार इन घटनाओं पर सामान्यतः चुप्पी साध लेती थी. मामला तूल पकड़ने पर सरकार की ओर से एक बयान आ जाता था कि ‘किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती’ और इसके बाद गंभीर चुप्पी. इसी आधार पर लोग भाजपा सरकार और इन मॉब लिंचर को जोड़ कर देखते थे.

इन्हें हत्यारे लोगों को ऐसे दिखाया जाता था कि यह एक सामान्य भीड़ है जो अपने आप अफवाहों के आधार पर इकठ्ठा हो जा रही है. लेकिन क्या सच में ऐसा है? अगर ऐसा होता तो कोई मंत्री निचली अदालत से सजा पाए इन लोगों को माला पहनाकर स्वागत क्यों करता?

बीते शुक्रवार को झारखण्ड से केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा का निचली अदालत से सजा पाए लोगों को फुल की माला से स्वागत करती तस्वीर वायरल हो चुकी है. सिन्हा की तस्वीर जिनके साथ है ये वो लोग हैं जिन्हें स्थानीय अदालत ने 11 मार्च को अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या करने के इल्जाम में सजा सुनाई थी. अंसारी झारखण्ड के रामगढ़ के रहने वाले थे. पिछले साल 29 जून को इनलोगों ने गाय रक्षा के नाम पर अंसारी की हत्या कर दी थी.

तो इन मॉब लिंचर को का स्वागत करते हुए तस्वीर खींचाकर देश का एक केंद्रीय मंत्री क्या सन्देश देना चाह रहा था!  दूसरी तरफ उसी सरकार का वाट्सएप्प को अफवाह को नियंत्रित करने के लिए कहना. कुछ अजीबो-गरीब नहीं लगता?

सामान्य समझ से देखेंगे तो लगेगा कि सरकार लोगों के दबाव में आकर झूठा ही सही पर मॉब-लिंचिंग की घटना को रोकने का प्रयास कर रही है. लेकिन ऐसा है नहीं. पिछले चार साल के अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट हो चुका है कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ऐसे किसी नैतिक और सामाजिक दबाव को तरजीह नहीं देती.

क्या वाट्सएप्प को नियंत्रित करने की कोशिश में लगी है सरकार!

ऐसे में घटती घटनाओं से जो तस्वीर बन रही है वह एकदम उलट है. एकतरफ  केंद्रीय मंत्री माला पहनाकर अपने गुर्गे, ट्रॉल्स, गौ-भक्त या कहें गौ-गुंडे इत्यादि को सन्देश दे रहे हैं कि पार्टी तुमलोगों के साथ है. खासकर गाय के नाम पर की जा रही हत्या से पार्टी के बहु-संख्यक बनाम अल्प-संख्यक की पारंपरिक राजनीति को बढ़ावा मिलता है. जाहिर बात है कि 2019 में सरकार के पास विकास तो मुद्दा रहा नहीं ऐसे में इसी पारंपरिक राजनीति का इस्तेमाल होना है.

दूसरी तरफ वही सरकार इन मॉब-लिंचिंग की घटनाओं का हवाला देते हुए वाट्सएप्प से अपील करती है कि अफवाहों को नियंत्रित करो. यह एक ऐसा व्यावहारिक कदम है कि जन साधारण समर्थन  ही करेगा. इस समर्थन की आड़ में सरकार 2019 चुनाव के मद्देनज़र एक नया खेल भी खेल रही है.

सरकार की नज़र वाट्सएप्प की उस अपार सम्भावना को नियंत्रित करना भी है जिसका फायदा अन्य राजनितिक दल भी उठा रहे हैं.

इस खेल को समझना है तो यह मत देखिये कि सरकार ने वाट्सएप्प से क्या कहा. इस पर गौर करिए कि वाट्सएप्प ने सरकार को कहा कि इन अफवाहों को रोकने के लिए सरकार को भी मदद करनी होगी. आखिर सरकार इसमें क्या मदद कर सकती है? कहीं आईबी जैसे सरकारी एजेंसी को वाट्सएप्प पर निगरानी का जिम्मा सौंपने की तैयारी तो नहीं हो रही!

मॉब-लिंचर से परहेज होता तो उन्हें फूलों की माला नहीं पहनाई जाती

जाहिर है कि मॉब-लिंचर से परहेज होता तो उन्हें फूलों की माला नहीं पहनाई जाती. तो फिर यह अफवाह रोकने का प्रयास किसके लिए है? उनके लिए जो इन अफवाहों के शिकार हो रहे हैं. यह एक बड़े खेल की शुरुआत भी हो सकती है.

इसको समझने के लिए आज के राजनितिक परिदृश्य को समझना होगा. हाल ही  में कांग्रेस पार्टी के एक प्रवक्ता ने बताया कि आज के समय में भाजपा से लड़ाई करना किसी भी पार्टी के लिए मुश्किल साबित हो रहा है. वजह है फंडिंग का कम होना. प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया पूरी तरह भाजपा के साथ हो चला है. उसे सत्य और प्रोपगैंडा में कोई फर्क नज़र नहीं आ रहा है. ऐसे में कांग्रेस के पास सिर्फ सोशल नेटवर्किंग साइट्स ही बचती हैं जिसके तहत लोगों से संवाद किया जा सके. उस प्रवक्ता ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स में भी फेसबुक आजकल पैसे मांगने लगा है और इस तरह यह विकल्प भी कांग्रेस के लिए सस्ता और सुलभ नहीं रहा. ऐसे में वाट्सअप ही एक मात्र ऐसा प्लेटफार्म है जिससे विपक्ष जनता तक अपनी बात पहुंचा पा रहा है.

इसके जवाब में यह भी कहा जा सकता है कि फेसबुक ही वाट्सएप्प का मालिक है पर अभी तक इस सर्व-सुलभ प्लेटफार्म ने पैसे लेना शुरू नहीं किया है.

ऐसे में यह संदेह होना लाजिमी है कि सरकार की नज़र वाट्सएप्प पर विरोधियों को नियंत्रित करना है. यह सन्देश तब और पुख्ता हो जाता है जब नोटबंदी की कहानी याद आती है. सरकार ने भले नोटबंदी के लिए मुख्य वजह कालाधन को वापस लाना, आतंकवादी घटनाओं को कम करना और जाली नोटों को पकड़ना बताया था. पर जो निकलकर आया वह कुछ और ही था. ये सारी घटनाएँ तो नहीं रुकीं लेकिन भाजपा को छोड़कर अन्य राजनितिक दल, उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य के चुनाव में आर्थिक तंगी से जूझते पाए गए. परिणाम यह हुआ कि वह  चुनावी लड़ाई एकतरफा साबित हुई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने.

1 COMMENT

  1. Algorithm to count infliction caused by a forwarded post will be shared with the intelligence of Indian Government. Probably this will used as a electoral thermostat of the forth coming Gen Election.
    Suppose
    I want to measure which type of emotions are triggering the forwards and which type of forwards are accelerating the mob and weather that acceleration translates into anger for the government or for the minorities or for the middle class etc… Then I can figure out what should be the content of the speech my leader should deliver in public rallies and what kind breaking news will media run. Also what should be rhe strategy of trolling.

    This means
    Just by sharing the algorithm of forward counters government can inflict the election results.

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