अपनी तो सुना ली, अब विद्यार्थियों की भी सुन लीजिये प्रधानमंत्री जी!

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बिहार के भोजपुर जिला मुख्यालय के आरा रेलवे स्टेशन के समीप शुक्रवार को हजारों बेरोजगार छात्रों ने रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा के नियम में बदलाव किए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया

आशुतोष कुमार पाण्डेय/

महज़ संयोग कहिये या कुछ और. जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में देश भर के छात्रों से ‘परीक्षा पर चर्चा’ कर रहे थे, उसी दिन बिहार  और बंगाल के विभिन्न इलाकों में प्रतियोगी छात्र नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का विरोध करने सड़क पर उतरे हुए थे.

काश कि देश के प्रधानमंत्री अपने संबोधन में उन छात्रों को यह भी बताते कि इनके पूर्व के छात्रों की अभी क्या स्थिति है. यह भी समझाते कि दसवीं और बारहवीं के ये छात्र परीक्षा पास कर जायेंगे तो उनको ऐसे ही कहीं विरोध प्रदर्शन करना होगा. क्योंकि इन छात्रों का असली लक्ष्य परीक्षा पास करना नहीं बल्कि इसके सर्टिफिकेट की मदद से कहीं रोजगार प्राप्त करना है. ताकि वे इज्जत के साथ अपनी जिंदगी गुजार सकें.

प्रधानमंत्री थोडा बड़प्पन दिखाते तो यह भी बताते कि पढ़े लिखे युवा को  बेरोजगार रखने के लिए कोई और नहीं बल्कि खुद नरेन्द्र मोदी सरकार की नीतियाँ हैं.

यह तो सबको मालूम है कि देश के प्रधानमंत्री के लिए आम जनता और उससे सम्बंधित मामले मायने नहीं रखते. वरना जो प्रधानमंत्री ‘रोजगार’ का नारा देते हुए सत्ता में आया था क्या वह अपने शासन के चार सालों तक लगभग सारी सरकारी नौकरियों में भर्ती पर पाबंदी लगा कर रखता. अब सरकार को अपने चौथे साल में नौकरियों की भर्ती याद आई . तब जब चुनाव सर पर आ खड़े हुए हैं और इन्हें फिर से जनता के बीच जाना है.

अपने दो बड़े गलत फैसलों से निजी क्षेत्र में नौकरियों को लगभग समाप्त करने वाली इस सरकार ने गुजरात चुनाव में अपनी भद्द पीटने के बाद आनन-फानन में कुछ सरकारी भर्तियाँ निकाली ही हैं. लेकिन उसमें भी पेंच हैं.

चूंकि सरकार की नियत में ही नौकरी देना नहीं है तो इस सरकार की प्राथमिकता नौकरी देकर नहीं बल्कि लोगों को यह एहसास कराकर जीतना है कि यह सरकार नौकरी को लेकर चिंतित है. इसलिए भर्तियाँ निकाली जरुर गई हैं लेकिन उसमें ऐसी शर्ते लगा दी गई हैं कि बड़ी संख्या में युवा शामिल ही न हो पाएं.

बिहार के भोजपुर जिला मुख्यालय के आरा रेलवे स्टेशन के समीप शुक्रवार को हजारों बेरोजगार छात्रों ने रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा के नियम में बदलाव किए जाने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। इस दौरान पुलिस और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया.

इसका एक उदाहरण रेलवे में निकली भर्ती से देखा जा सकता है. चार साल बाद रेलवे में बड़े पैमाने पर विभिन्न पदों के लिए बहाली आयी हुई है. ड्राइवर, तकनीशियन के अलाव ग्रुप ‘डी’ में भी विभिन्न पद शामिल हैं. पिछले कई सालों से चली आ रही बहाली की प्रक्रिया में भारी बदलाव आया है. जिसके चलते चार-पांच वर्षों से तैयारी कर रहे प्रतियोगी छात्र सकते में आ गए हैं. जिन पदों के लिए ITI अनिवार्य नहीं था, उसमें 23 पदों के लिये ITI माँगा जा रहा है. साथ ही उम्र सीमा भी घटा दी गयी है.

अब छात्र मजबूर होकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार को इससे अवगत करना चाह रहे हैं. हालिया उदाहरण बिहार और बंगाल का है.

बिहार के आरा में प्रतियोगी छात्र शुक्रवार 16 फरवरी को रेल रोककर परीक्षा के टर्म में हुए बदलाव का विरोध कर रहे थे.बिहार के भोजपुर जिला मुख्यालय के आरा रेलवे स्टेशन के समीप शुक्रवार को हजारों बेरोजगार छात्रों ने रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा के नियम में बदलाव किए जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हुई.

इसके लिए छात्रों ने पहले ही जिला और रेल प्रशासन को पत्र दे दिया था. जिसमें बताया गया था कि हम सवेरे आठ बजे से अपना विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे. छात्र पहले स्टेशन के बाहर परिसर में पहले प्रदर्शन कर रहे थे। जब छात्रों का एक बड़ा जत्था स्टेशन पर पहुँचा तब रेलवे ट्रैक पर सभी छात्र बैठ गये. जहाँ राज्य और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाये जाने लगे थे. सदर एसडीओ के मौजूदगी में यह सब हो रहा था. भारी मात्रा में पुलिस भी वहां मौजूद थी.

छात्रों ने पोस्टर बना रखे थे और प्रधानमंत्री की सरल भाषा में ही उनको अपनी समस्या से अवगत कराना चाह रहे थे. जैसे कईयों ने लिख रखा था, ‘हम पकौड़ा नहीं बेचेंगे.’ कुछ छात्र नरेन्द्र मोदी के 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार में इस्तेमाल हुए नारों को इस्तेमाल करते हुए अपनी बात कहना चाह रहे थे जैसे  बहुत हुआ जुमलों का वार, हमें अब चाहिए रोजगार.

जो सबसे बड़ा बैनर था उसपर लिखा हुआ था, रेलवे परीक्षार्थियों पर सर्जिकल स्ट्राईक वापस लो.’

(आशुतोष कुमार पाण्डेय बक्सर जिले के रहने वाले हैं और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सामाजिक मुद्दों को लेकर काफी सक्रिय हैं)

 

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