सऊदी के क्राउन प्रिंस सलमान का स्वागत, इस वीभत्स हत्या को याद करते हुए कीजिये

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शिखा कौशिक/

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पाकिस्तान होते हुए आजकल भारत दौरे पर आये हुए हैं. उनके लिए इन दोनों देशों में भव्य स्वागत हो ही रहा है. लेकिन इस मौके पर यह बताना जरुरी है कि यही वह सलमान हैं जिनके ऊपर आरोप है कि इन्होंने करीब चार महीने पहले जमाल खशोगी नाम के पत्रकार की वीभत्स हत्या करवाई. वह भी इतनी नृशंस हत्या कि ब्यौरा जानने पर रूह तक काँप जाए. हत्या की जगह दूसरे देश में स्थित दूतावास के भीतर.

जमाल, क्राउन प्रिंस मोहम्मद की नीतियों के एक बड़े आलोचक थे और इसलिए इस्तांबुल में सऊदी के वाणिज्य दूतावास में जमाल की हत्या कर दी गई थी. जमाल वहां एक तुर्की महिला से विवाह करने के लिए जरुरी दस्तावेज़ हासिल करने आये थे जब सऊदी के अधिकारियों ने उनको मारकर उनके शरीर को छोटे छोटे टुकड़े में काट दिया.

जमाल एक स्थापित पत्रकार थे. उन्होंने सोवियत यूनियन, ओसामा बिन लादेन से सम्बंधित कई खबरें सऊदी के अखबारों के लिए लिखी थीं. 59 साल का यह पत्रकार सऊदी अरब में शाही परिवार के काफी करीबी भी रहा और कई सालों तक स्थानीय सरकार के सलाहकार पद पर भी बना रहा. लेकिन करीब दो साल पहले उन्होंने खुद ही अमेरिका में निर्वासन की जिंदगी जीने का निर्णय लिया. उन्हें डर था कि प्रिंस मोहम्मद पुरानी सरकार के बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही कर रहे हैं तो उनके खिलाफ भी करेंगे. अमेरिका में रहते हुए उन्होंने वासिंगटन पोस्ट के लिए महीने में एक कॉलम लिखने की शुरुआत की और उस कॉलम में प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नीतियों के खिलाफ खूब लिखा.

यह बात सऊदी के प्रिंस को नागवार गुजारी और रिपोर्ट के अनुसार 15 सऊदी एजेंटों के एक टीम अक्टूबर में सरकारी विमान से इस्तांबुल पहुंची और जमाल की हत्या कर दी.

करीब दो हफ्ते तक सऊदी अरब की सरकार ने हत्या में अपनी भूमिका से इनकार करती रही. बल्कि क्राउन प्रिंस तो मीडिया से बात करते हुए यह तक कह दिए कि जमाल दूतावास आये और कुछ ही मिनट में वहाँ से चले भी गए.

जमाल खशोगी

लेकिन बाद में तुर्की की सरकार ने कई सबूत जारी किये और अमेरिकी एजेंसी सीआईए ने भी दावा किया कि सऊदी के राजकुमार जमाल की हत्या में शामिल थे.  इस जांच के अनुसार सऊदी के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान ने इस्तांबुल में पत्रकार जमाल की हत्या का आदेश दिया था. बाद में सऊदी अरब के अधिकारियों ने भी माना कि दूतावास में ही जमाल की हत्या की गई थी पर साथ में यह भी जोड़ दिया कि हत्या किसी बदमाश अधिकारी के कहने पर हुई थी.

लेकिन सीअईए की जांच में यह निकला कि मोहम्मद के भाई खालिद उल सलमान संयुक्त राज्य अमेरिका में सऊदी के राजदूत हैं. उन्होंने पत्रकार जमाल को कुछ दिनों पहले ही एक फ़ोन कॉल किया था और जमाल को उनकी सुरक्षा हेतु विश्वास दिलाया था. इस खालिद उल सलमान ने जमाल को कहा था कि वे इस्तांबुल स्थित दूतावास से कागजात हासिल कर सकते हैं. उनकी बात मानकर जमाल जब इस्तांबुल के दूतावास पहुंचे तो बहुत ही सुनियोजित तरीके से उनकी हत्या की गई. अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी ने दावा किया था कि खालिद ने यह फ़ोन अपने भाई जमाल के कहने पर किया था तथा वह भी जमाल की हत्या की साजिश में शामिल थे.

तुर्की के अधिकारी ने भी दावा किया था कि उनके पास पर्याप्त सुबूत है जिससे स्पष्ट होता है कि हत्या में सऊदी के प्रिंस शामिल थे. जैसे हत्या करते हुए कई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग इत्यादि. तुर्की का कहना है कि जमाल की हत्या सऊदी के कुछ एजेंट के द्वारा की गई थी और उन्हें इसके लिए सऊदी के शीर्ष नेताओं से आदेश दिया गया था.

देश के शीर्ष के कहने पर जघन्य हत्या

जमाल के हत्या की गुत्थी जब सुलझी तो कुछ इस तरह के ब्योरे आये. 28 सितम्बर 20 18 को जमाल पहली बार इस्तांबुल में सऊदी के दूतावास में गए. उन्हें अपनी प्रेमिका से शादी करने के लिए पुरानी शादी के तलाक के कागज़ चाहिए थे. वहाँ उनसे कहा गया कि आप 2 अक्टूबर को आईये. तुर्की मूल कि उनकी प्रेमिका हतिस सन्गिज़ ने एक पोस्ट में लिखा था कि जमाल को लगता था कि तुर्की में उनके खिलाफ कुछ नहीं किया जा सकता.

आखिरी बार उन्हें दोपहर के 1:14 बजे सीसीटीवी कैमरा में देखा गया जब वो दूतावास में अन्दर गए. कहा जाता है कि उन्होंने अपने मित्र को दूतावास के पहले दिन के अनुभव के बारे में बताया था कि उनकी बड़ी अच्छी आव-भगत की गई. लेकिन इसके बावजूद भी जब वो दूसरी बार दूतावास में गए तो अपनी प्रेमिका को दो मोबाईल फ़ोन देकर गए और साथ में यह भी कहा कि अगर वो बाहर नहीं आते हैं तो तुर्की के राष्ट्रपति के सलाहकार को फ़ोन कर इत्तला कर दिया जाए.

जमाल की प्रेमिका दूतावास के सामने करीब 10 घंटे तक इंतज़ार करती रही लेकिन जमाल बाहर नहीं आये. वह अगले दिन पुनः दूतावास पर पहुँच गई. पर जमाल का कुछ पता नहीं चला. सऊदी के अधिकारियों ने बाद में माना कि दूतावास में जमाल को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया. दूतावास में ही उनके शरीर के छोटे छोटे टूकड़े किये गए. और यह सब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के इशारे पर किया गया.

वैसे नरेन्द्र मोदी इस घटना के करीब एक महीने बाद ही प्रिंस मोहम्मद के साथ तस्वीर खिंचाने को राजी हुए जब विश्व का कोई और नेता इनके साथ कैमरे के सामने खड़े होने को तैयार नहीं था. ऐसे में भारत में प्रिंस को कोई उनके गुनाह की याद दिलाएगा यह उम्मीद करना बेमानी होगा. फिर भी..

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