केरल की बलात्कार पीड़िता को न्याय तो नहीं मिला रहा पर चरित्र हनन जारी है

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उमंग कुमार/

पिछले ढाई महीनों से बलात्कार पीड़ित एक महिला केरल में संघर्ष कर रही है और समाज उसका चरित्रहनन करने में लगा हुआ है. विधायक से लेकर धार्मिक संस्था तक पीड़ित महिला के चरित्र को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं लेकिन फिर भी इस मुद्दे पर घनघोर चुप्पी दिख रही रही है. खासकर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर. सनद रहे कि आसाराम और राम रहीम को भी सरकारें बचाना चाहतीं थी पर लोगों के विरोध की वजह से ही इनकी गिरफ्तारी संभव हुई थी पर केरल के आरोपी बिशप पर वैसा कोई बवाल होता नहीं दिख रहा है.

आपको शायद मालूम न हो कि केरल में एक बिशप के ऊपर एक नन का बलात्कार करने का आरोप लगा है. इस आरोप को ढाई महीने से अधिक हो गए पर केरल सरकार ने आरोपी बिशप के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है. इसके उलट केरल की पूरी व्यवस्था ही पीड़ित नन के खिलाफ हो गई है और उस महिला का चरित्र हनन जारी है.

दो दिन पहले वहाँ के एक विधायक पीसी जॉर्ज ने तो उस पीड़ित नन को वैश्या करार दिया. ये हैं इस विधायक के कथन, “इसमें किसी को शक नहीं कि यह नन वैश्या है. इसने बिशप के साथ 12 बार यौन संबंधों के मजे लिए और तेरहवीं बार में इसने बलात्कार करार दिया.” इस आरोपी बिशप से जुड़े मिशनरी ने भी नन के आरोप को गलत बताया है. यहाँ तक कि जीसस की मिशनरी ने 11 सितम्बर को मीडिया में बयान जारी किया और पीड़ित नन के चरित्र पर ही सवाल खड़ा कर दिया.

ढाई महीने पहले 43-वर्षीय एक नन ने जालंधर बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर आरोप लगाया कि 2014 में एक गंभीर बात करने के नाम पर इस बिशप ने महिला को बुलाया और उसका बलात्कार किया. तब से 2016 तक इस आरोपी बिशप ने 13 बार इस कुकृत्य को अंजाम दिया.

“12 बार यौन संबंधों के मजे लिए और तेरहवीं बार में इसने बलात्कार करार दिया”

इस आरोप पर जांच भी हुई जिसमें इस आरोपी बिशप के खिलाफ पुख्ता सबूत होने की बात सामने आई. इस जांच रिपोर्ट को आये भी एक महीना से ऊपर हो गया. मीडिया ने सूत्रों के हवाले से अगस्त महीने में ही इसकी पुष्टि कर दी थी. लेकिन बुधवार को कई मीडिया संस्थानों को इस जांच रिपोर्ट को देखने का मौका मिला. इसमें स्पष्ट हुआ कि जांच अधिकारी ने कई लोगों से बात की. हाजिरी वाले रजिस्टर में मौजूद ब्योरे से पीड़िता के बयान का मिलान किया और पाया कि इस बिशप के खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं.

सहायक पुलिस अधीक्षक के सुभाष ने इस मामले में जांच अधिकारी हैं. उन्होंने 13 अगस्त को ही उच्च न्यायालय में रिपोर्ट जमा करा दी थी. उस रिपोर्ट में यह स्पष्ट कहा गया है कि समुचित जांच और लोगों से बातचीत के बाद यह स्पष्ट है कि बिशप फ्रैंको ने पीड़ित महिला के साथ कई बार बलात्कार किया. यह सब मई 2014 और सितम्बर 2016 के बीच किया. कई बार उसे जबरन कमरे में कैद रखा गया. यह रिपोर्ट उच्च न्यायालय में जमा है फिर भी पीड़ित नन न्याय के लिए संघर्ष कर रही है.

पांच कैथोलिक नन केरल के उच्च न्यायालय के सामने कई दिनों से धरने पर बैठीं हैं. लेकिन सरकार ने इस आरोपी बिशप को अबतक गिरफ्तार नहीं किया. यह तब है जब निर्भया कांड के बाद बलात्कार जैसे अपराध के लिए कानून को सख्त किया गया था. क्या केरल सरकार इन धार्मिक संस्थाओं से डरी हुई है! और क्या सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी लोग चुनिन्दा मामलों में ही आक्रोशित होते हैं!

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