जन्मदिन विशेष: भारत के परमाणु शक्ति बनने के सपने को साकार किया राजा रमन्ना ने

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डॉ राजा रमन्ना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और तत्कालीन रक्षा मंत्री आर वेंकटरमण को परमाणु कार्यक्रम की प्रगति का ब्यौरा देते हुए (फोटो क्रेडिट : डीआरडीओ)

चैतन्य चन्दन/

हमसब ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण के बारे में देखा-सुना है, जिसके सूत्रधार भूतपूर्व राष्ट्रपति और महान परमाणु वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को माना जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि देश को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने में एक अन्य वैज्ञानिक का बेहद अहम् योगदान रहा है? जी हां, हम यहां बात कर रहे हैं भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में देश में हुए पहले परमाणु परीक्षण का. इस परीक्षण को भी पोखरण में ही अंजाम दिया गया था और इसके सूत्रधार थे महान परमाणु वैज्ञानिक डॉ राजा रमन्ना.

तमिलनाडु के तुमकुर जिले में जन्मे राजा रमन्ना बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. उनका जितना लगाव भौतिकी विषय से था, उतना ही संगीत से. इसलिए उन्होंने भौतिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने साथ ही संगीत में भी ये दोनों उपाधियां हासिल की. स्नातकोत्तर की पढाई पूरी करने के बाद वे डॉक्टोरेट करने लन्दन चले गए. वहां से वे नाभिकीय भौतिकी (न्यूक्लियर फिजिक्स) में डॉक्टोरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद भारत लौट आये और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में एक वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. वहां जल्द ही उन्होंने अपनी प्रतिभा से डॉ होमी जहांगीर भाभा को प्रभावित कर लिया. भाभा ने रमन्ना को भारत की महत्वाकांक्षी “वर्गीकृत नाभिकीय शस्त्र परियोजना” की टीम में शामिल कर लिया. राजा रमन्ना को परमाणु परीक्षण के लिए सही स्थान चुनने के लिए अधिकृत किया गया. लेकिन जब 24 जनवरी 1966 को डॉ भाभा की रहस्यमयी मौत हो गई, तो भारत के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा. उस समय प्रधानमंत्री के पद पर इंदिरा गांधी आसीन थीं और वह किसी भी कीमत पर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहती थीं. ऐसे में उन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम की बागडोर राजा रमन्ना के हाथों में सौंप दी.

रमन्ना ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए वर्ष 1970 तक भारत के परमाणु शक्ति संपन्न होने का रास्ता साफ़ कर दिया. उनके नेतृत्व में नाभिकीय परीक्षण के लिए आवश्यक संयंत्र के डिजाईन सहित विस्फोटकों आदि की व्यवस्था का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया. जब वे परीक्षण की तैयारी से पूरी तरह से संतुष्ट हो गए, तो उन्होंने इसकी जानकारी इंदिरा गांधी को दी. इंदिरा गांधी ने उन्हें परीक्षण के लिए चुने गए स्थान पोखरण में अधोसंरचना विकसित करने की अनुमति दे दी.

चार साल बाद रमन्ना ने इंदिरा गांधी को पोखरण में परमाणु परीक्षण करने की तैयारी पूरी होने की सूचना दी. इंदिरा गांधी ने तुरंत इस परीक्षण को अंजाम देने के लिए रमन्ना को मौखिक अनुमति दे दी. परीक्षण की अनुमति मिलने के बाद रमन्ना खुद परमाणु हथियार को ट्रोम्बे से पोखरण तक अपनी निगरानी में लेकर आए, ताकि गोपनीयता बनी रहे. इंदिरा गांधी के पोखरण में परीक्षण स्थल के दौरे से पहले ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं. इंदिरा गांधी ने परीक्षण स्थल का दौरा करने के बाद बिना समय गंवाए भारत के पहले परमाणु परीक्षण, जिसे “स्माइलिंग बुद्धा” कोड नाम दिया गया था, की अनुमति दे दी. रमन्ना के नेतृत्व में 18 मई 1974 को भारत ने अपना पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न देशों की सूची में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया. रमन्ना ने पंडित जवाहरलाल नेहरु और डॉ होमी जहांगीर भाभा के सपनों को अंजाम तक पहुंचाया.

भारत की इस उपलब्धि ने रमन्ना की ख्याति दुनियाभर में फैला दी. वर्ष 1978 में इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने रमन्ना से संपर्क साधा और परमाणु हथियार बनाने के लिए सहायता मांगी. सद्दाम हुसैन ने उन्हें इराक में ही रहकर परमाणु कार्यक्रम को अपनी निगरानी में संपन्न करवाने का प्रस्ताव रखा, जिसे रमन्ना ने ठुकरा दिया और अगली ही फ्लाइट से भारत लौट आए. भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इस वैज्ञानिक को पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया.

(लेखक एक अंग्रेजी पत्रिका में कार्यरत हैं स्वतंत्र लेखन में भी सक्रिय हैं.)

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