अगर देश पद्मावती पर चर्चा नहीं कर रहा होता तो क्या कर रहा होता

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सौतुक डेस्क/

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती अभी रिलीज़ नहीं हुई है पर इसको नहीं देखने वाले मान चुके है कि इस फिल्म में कुछ गलत है जो राजपूत समाज को आहत करने वाला है. दूसरी तरफ जो इस फिल्म को देख चुके हैं उन्हें लग रहा है कि फिल्म के हर दृश्य में राजपूत समाज और रानी पद्मावती की शान बघारी गई है. सनद रहे कि इस फिल्म को कुछ मीडिया वालों को दिखाया गया है जिसमे एक रिपब्लिक टीवी के अर्नव गोस्वामी भी हैं. भाजपा के प्रबल समर्थकों में से एक गोस्वामी ने अपने चैनल पर कहा कि इस फिल्म के हरेक फ्रेम में पद्मावती की गरिमा का ख़याल किया गया है. एक भी दृश्य में अलाउद्दीन खिलजी और पद्मवती को साथ नहीं दिखाया गया है. लेकिन उसी भाजपा की कुछ राज्य सरकारों ने ऐसे कदम उठाये हैं जो हास्यास्पद की श्रेणी में आते हैं. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने केंद्र को ख़त लिखकर इसे रिलीज़ नही करने देने की मांग की है वहीँ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस फिल्म को राज्य में बैन कर दिया है. कुछ लोगों की इस नाजयाज़ मांग को इन सरकारों के द्वारा इतनी गंभीरता से लिए जाने को देखते हुए साफ़ कहा जा सकता है कि यह विरोध भाजपा पोषित है और इससे पार्टी कोई ऐसा फायदा देख रही है जो और लोगों को नहीं दिख रहा है.

हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन फिल्म देने वाले जाने माने निर्देशक श्याम बेनेगल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह राजपूत वोट को एक साथ करने का प्रयास है. हो सकता है या नहीं भी हो सकता है. इसी तरह कुछ लोगों का बयान है कि यह सरकार की तरफ से जान-बूझकर इसलिए उछाला जा रहा है ताकि लोग गंभीर और जरुरी मुद्दों पर ध्यान न दे पायें. सौतुक ने ऐसे पांच मुद्दों की लिस्ट बनाई है जिसपर अभी बात होनी चाहिए थी पर पद्मावती फिल्म पर विवाद की वजह से उतनी तीव्रता से नहीं हो रही है.

  • पिछले सप्ताह कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने फ़्रांस के साथ हुए राफेल डील में अपने एक नजदीकी उद्योगपति को मुनाफा पहुंचाने के लिए कई गुना महंगा सौदा किया. इस आरोप के अनुसार मनमोहन सिंह सरकार ने भी यह डील किया था जिसमें एक प्लेन महज 526.1 करोड़ रुपये का आ रहा था. पर नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद उस डील को कैंसिल कर दिया. एक नई डील की जिसमे एक प्लेन 1,570 करोड़ रुपये का आने वाला है. कांग्रेस ने इसे बहुत बड़ा घोटाला बताया. जो भी हो पद्मावती के मुद्दे ने इस मामले को पीछे छोड़ दिया है.
  • नवम्बर में संसद का शीतकालीन सत्र बुलाया जाता रहा है. पुराने अनुभवों को आधार मानें तो अभी तक यह सत्र शुरू हो जाना चाहिए था पर अब तक इसको लेकर कोई चर्चा भी नहीं हो रही है. खबर आ रही है कि सरकार शीतकालीन सत्र बुलाना ही नहीं चाहती. वजह यह है कि भाजपा के बड़े नेता चुनाव प्रचार के लिए गुजरात में रहेंगे. वहाँ प्रधानमंत्री को पचास के करीब रैलियाँ करनी हैं. यह भी मुद्दा पद्मावती की वजह से पीछे छूट गया है.
  • पानामा पेपर के बाद पैराडाइज पेपर ने सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी इमेज को बट्टा लगाया था. सरकार में शामिल कई लोगों का नाम भी इसमें उजागर हुआ था. बिहार से आने वाले सबसे अमीर सांसद ने तो मौन व्रत का बहाना बनाकर जवाब देने से मना कर दिया था. उनका सात दिन का व्रत अभी ख़त्म होता कि पद्मावती के मुद्दे ने तुल पकड़ लिया. इस तरह पद्मावती ने सरकार को इस मुद्दे पर भी उबारा.
  • नोटबंदी को साल भर से ऊपर हो गया है. लगभग सारी रिपोर्ट से यह पता चलता है कि सरकार का यह कदम पूरी तरह फेल हुआ है. हाल ही में अर्थशास्त्र के नोबेल विजेता ने भी इस नोटबंदी के कदम पर सवाल खड़े किये. सरकार इस कदम पर सहमी हुई है. सरकार के प्रवक्ता लोगों के द्वारा पूछे सवाल पर कन्नी काट रहे थे कि पद्मावती के मुद्दे ने उन्हें फिर से उबार लिया.
  • देश में बेरोजगारी चरम पर है. नरेन्द्र मोदी ने लोगों को नौकरी का वादा तो किया था पर वह इसमें बुरी तरह से फेल हुए हैं. नोटबंदी ने देश में बेरोजगारी की समस्या को और बढ़ाया है. सरकार इसको भी लेकर घिर रही थी पर पद्मावती ने इस मुद्दे पर सरकार को तत्कालीन राहत पहुंचाई है.

 

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