सेना के हमदर्द मोदी-शाह 29 जवानों के साथ गायब विमान को भूल ही गए

0

उमंग कुमार/

पुलवामा में सेना की टुकड़ी पर हमला होने के बावजूद इसे अपनी सफलता मानने वाले नरेन्द्र मोदी इस एक घटना का जिक्र भूलकर भी चुनाव प्रचार में नहीं करने वाले हैं. यह घटना 22 जुलाई 2016 को घटित हुई थी और इत्तेफाक कि यह भी सेना से जुड़ी थी.

भारतीय वायु सेना का एक परिवहन विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा था. इसमें 29 लोग सवार थे और अधिकतर भारतीय सेना के जवान थे. अचानक से यह विमान गायब हो गया. उस विमान का आज तक पता नहीं चला कि आखिर उसका हुआ क्या?

लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इस देश के शीर्ष नेताओं को सिर्फ पुलवामा में मरे सैनिकों पर देशभक्ति याद आती है उन सैनिकों पर नहीं. इस बात को इस सन्दर्भ में भी देखा जाना चाहिए कि सत्ता पक्ष के दो बड़े नेता, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह निर्वाचन आयोग के मना करने के बावजूद भी पुलवामा हमले का जिक्र किये बिना एक रैली नहीं करते. बल्कि निर्वाचन आयोग को खुल कर चुनौती देते हैं और कहते हैं कि सेना और देश की सुरक्षा जरुरी मुद्दा है और चुनावी रैली में इसका इस्तेमाल होना ही चाहिए. सनद रहे कि निर्वाचन आयोग ने सभी राजनैतिक दलों को सेना और पकिस्तान इत्यादि का जिक्र नहीं करने को कहा है.

भारतीय वायु सेना का यह परिवहन विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा था. इसमें 29 लोग सवार थे और अधिकतर भारतीय सेना के जवान थे. अचानक से यह विमान गायब हो गया. उस विमान का आज तक पता नहीं चला कि आखिर उसका हुआ क्या?

सवाल यह है कि अगर सेना सच में जरुरी मुद्दा है तो नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह इस गायब हुए विमान और उसमें मौजूद सेना का जिक्र क्यों नहीं करते! यह क्यों नहीं बताते कि उस विमान को खोजने के लिए क्या क्या प्रयास किये गए! भारत के लोगों को यह क्यों नहीं बताया जाता कि उस विमान को खोजने का प्रयास कब शुरू किया गया और कब सरकार ने यह मान लिया कि अब विमान नहीं मिलने वाला! इस खोजबीन में किसी विदेशी एजेंसी की मदद ली गई या नहीं! यह सब सवाल सेना से ही जुड़े हैं पर यह दिखाते हैं कि नरेन्द्र मोदी सरकार सेना की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. इसके उलट उनका अपने चुनावी लड़ाई में इस्तेमाल करने को लेकर गंभीर जरुर हैं.

इससे भी बड़ा दुर्भाग्य है मीडिया या विपक्ष का इस मुद्दे को तरजीह नहीं देना. सत्ता का काम तो है अपनी कमियों को छिपाना, पर बाकी के लोग भी सरकार को अपनी कमी छिपाने का पूरा मौका दे रहे हैं. हालांकि विपक्षी दल खासकर, कांग्रेस ने  निर्वाचन आयोग के पास मोदी और शाह के चुनावी रैली में सेना को इस्तेमाल करने को लेकर शिकायत जरुर की है, पर निर्वाचन आयोग इसपर चुप्पी साधे हुए है. इस पर कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसपर मंगलवार को सुनवाई होनी है.

विपक्षी दलों को चाहिए कि वे उस विमान का भी जिक्र करें जो सेना के जवानों के साथ गायब हो गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here