#MeToo: यह अभियान एक अश्वेत महिला द्वारा 10 वर्ष पहले शुरू हुआ था

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अनिमेष नाथ/

“मी टू” अभियान, जो वर्तमान में शोषित महिलाओं की आवाज़ बनकर तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, इस अभियान को मूल रूप से तराना बुर्के नाम की एक अश्वेत महिला ने शुरू किया था.

युवा संगठन जस्ट बी इंक(just be inc) की संस्थापक बुर्के ने “मी टू” अभियान की शुरुआत वर्ष 2007 में ऐसे वक़्त में की थी जब शायद हैशटैग जैसी कोई चीज़ इस दुनिया में मौजूद नहीं थी.

44-वर्षीया बुर्के ने एक पत्रिका (एबोनी मैगजीन) से बात करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने इस ज़मीनी अभियान को वंचित समुदाय की उन महिलाओं तक पहुँचने के लिए बनाया था जो कि यौन उत्पीडन का शिकार हुई हैं.

यद्यपि, बुर्के अभियान के सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर वायरल होने से खुश हैं पर उन्हें डर भी है कि यह हैशटैग अभियान कल भुला न दिया जाए. इस अभियान की कल्पना हैशटैग और वर्चुअल वर्ल्ड को सोचकर नहीं की गई थी.

इसकी परिकल्पना कुछ ऐसी थी कि एक शोषित महिला दूसरी शोषित महिला से ही सही कम से कम अपने उत्पीड़न की बात कहे. यह एक ऐसा शब्द है जो एक शोषित महिला से दूसरी महिला तक पहुंचा और उनकी आवाज़ बनकर यह एहसास दिलाया कि वे अकेली नहीं हैं और उन पर हुए अत्याचार के खिलाफ एक बड़ा आन्दोलन भी संभव है.”

यह अभियान एक हैशटैग के रूप में तब बदला जब अभिनेत्री एलिसा मिलानो ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की कहानी ट्विटर के माध्यम से लोगों से साझा की और यह अपील भी की, कि वे अपने साथ कभी भी हुए यौन उत्पीड़न की कहानी “मी टू” हैशटैग के साथ सभी के सामने रखे. हालाँकि मिलानो ने कभी यह दावा नहीं किया है कि यह अभियान उन्होंने शुरू किया है परन्तु कई मीडिया संस्थाओं ने इसका श्रेय अभिनेत्री मिलानो को दिया है.

इसकी परिकल्पना कुछ ऐसी थी कि एक शोषित महिला दूसरी शोषित महिला से ही सही कम से कम अपने उत्पीड़न की बात कहे

बुर्के ने आगे बताया है कि, “यह देखने में सच में “शक्तिशाली” सा प्रतीत होता है कि “मी टू” हैशटैग इतना वायरल हो गया है, जो आज हो रहा वह अपने आप में बहुत बड़ी बात है कि महिलाऐं इस अभियान के जरिये ही सही, कम से कम अपने उत्पीड़न को लेकर बातचीत तो कर रही हैं. यही “मी टू” की ताकत है कि अब महिलाएं अपनी कहानी कह पा रही हैं.”

जबसे यह ‘मी टू’ हैशटैग वायरल हुआ, तभी से कई लोगों ने ट्विटर के माध्यम से बुर्के को इस मुहीम के लिए धन्यवाद दिया है तथा उनके आन्दोलन का समर्थन किया है.

ब्लैक लाइव्स मैटर(BLACK LIVES MATTER) की सह-संस्थापक अलिसिया गारज़ा ने बुर्के को धन्यवाद देते हुए यह ट्वीट किया है:, “Thank you @TaranaBurke for bringing us this gift of #MeToo almost 10 years ago. Still powerful today.”

भारत में इसकी शुरुआत बॉलीवुड अदाकारा तनुश्री दत्ता से हुई जब उन्होंने नाना पाटेकर, गणेश आचार्य पर आरोप लगाया कि इनलोगों ने दत्ता का 2008 में एक फिल्म के सेट पर उत्पीड़न किया. लेकिन भारत में यह आन्दोलन शबाब पर तब आया जब लेखिका और निर्माता विनीता नंदा ने आलोक नाथ पर आरोप लगाते हुए अपनी दर्दनाक कहानी लिखी. उसके बाद तो मानों बाढ़ सी आ गयी है. मशहूर पत्रकार और अब केंद्र सरकार में मंत्री एम जे अकबर पर नौ महिला पत्रकार अब तक यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं. बड़े-बड़े नाम जैसे क्वीन फिल्म से मशहूर निर्देशक विकास बहल, साजिद खान, सुहैल सेठ इत्यादि भी मी टू” अभियान में बहार आये हैं. इस ने एक आम समस्या को लोगों के सामने रखा है.

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