मीटू कैम्पेन: तीर सही निशाने पर लगा है

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शिखा कौशिक/

भारत के पुरुष समाज का असली चेहरा अब सामने आया है. मीटू कैम्पेन में जब महिलाएं बड़े-बड़े लोगों का नाम ले रहीं हैं तो पता चल रहा है कि इस ‘रेपिस्तान’ का मूल कहाँ हैं. महिलाओं का असली दुश्मन कहाँ बैठा हुआ है और इसका सही इलाज क्या है.

निर्भया काण्ड जैसे हादसों के मुजरिम तो महज बीमारी के लक्षण हैं जिनके इलाज की तमाम कोशिशें नाकाम हुईं. महिलाएं वैसे ही शिकार बनती रहीं. इन महिलाओं का परिवार वैसे ही डरा-सहमा रहा. ऐसा इसलिए कि बीमारी का इलाज तो हो ही नहीं रहा था.

बीमारी है एम जे अकबर और आलोक नाथ जैसे लोग जिसका इलाज अब शुरू हुआ है. ‘मी टू’ नाम के कैंपेन से.

ये दोनों उस समुदाय से आते हैं जो बलात्कार और महिला उत्पीड़न जैसी घटनाओं पर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाता भी है और माहौल शांत होने के बाद नए शिकार की तलाश में निकल जाता है.

ये लोग निर्भया काण्ड के मुजरिमों की तरह कमजोर नहीं है कि एक बलात्कार किया और फांसी के फंदे पर झूल गए. ये वो लोग हैं जिनके पास इतनी ताकत है कि अच्छी-खासी पढ़ी-लिखी और अच्छे घरों से आने वाली महिलाओं का शोषण भी करें और उन्हें चुप रहने पर मजबूर भी कर दें. इसके बाद पुनः चिकनी-चुपड़ी इमेज के साथ बाज़ार में मौजूद हो जाते हैं.

ये वो लोग हैं जिन्होंने एक ऐसा तंत्र बनाया है कि उससे किसी महिला का निकलना लगभग नामुमकिन था. ऐसे लोगों की डर से ही भारतीय समाज के मातापिता अपने बच्चियों को पढ़ाने और नौकरी के लिए बाहर भेजने से कतराते रहें हैं और नतीजा यह निकलता है कि महिला वहीँ रह जाती है जहां से निकलने की कोशिश सदियों से चली आ रही है.

उदाहरण के लिए, फ़ोर्स न्यूज़मैगज़ीन की कार्यकारी संपादक गजाला वहाब की कहानी, जिसे पढ़कर रोना आ जाये. एक लड़की जो अपने पूरे खानदान में पहली बार दिल्ली आती है, करियर बनाने. घर वालों के विरोध के बाद भी. वैसी लड़कियों को एम जे अकबर जैसे बुद्दिजीवी अपना शिकार बनाते हैं. वह लड़की अपने माता-पिता को यह बात बता तक नहीं सकती क्योंकि उसको इसका हस्र मालूम है. घरवापसी और फिर शादी-विवाह. बाल बच्चे. यही तो मर्दवादी समाज चाहता है. खैर, गज़ाला की तारीफ करनी होगी कि वह हार मानकर घर नहीं लौट गयीं बल्कि आगे बढ़ने का निर्णय लिया. लेकिन गजाला जैसे कितनी लडकियां होंगी!

ये वो लोग हैं जिनके पास इतनी ताकत है किअच्छी-खासी पढ़ी-लिखी और अच्छे घरों से आने वाली महिलाओं का शोषण भी करें और उन्हें चुप रहने पर मजबूर भी कर दें

एम जे अकबर के बारे में दूसरी कहानी भी उतनी ही वीभत्स है जिसमें यह शख्स एक लड़की को अपने कमरे में मीटिंग के बहाने बुलाता है और उसके कपड़े में बर्फ का टुकड़ा डाल देता है. वो लड़की होश हवास खोकर पांच सितारा होटल से रोते हुए भागती है. उसे एक कैब वाला यह कहते हुए राहत देता है कि अब वह सुरक्षित है. उसे घर छोड़ता है. सनद रहे कि बलात्कार इत्यादि में इन गाड़ीवानों का नाम बहुत बदनाम है.

यह कल्पना भी दूभर है कि वैसी लड़की अगले दिन अपने बॉस से नज़र कैसे मिला पाती होगी! कैसे उस माहौल में काम करती होगी!

एम जे अकबर भारत के जाने-माने पत्रकार रह चुके हैं और इन्होंने तीन पत्र-पत्रिकाएं लांच की हैं. वर्तमान में यह शख्स देश काराज्य रक्षा मंत्री है. इस शख्स पर अब तक छः महिला पत्रकारों ने शोषण का आरोप लगाया है जिसमें प्रिया रमानी भी शामिल हैं.

उधर दूसरा चेहरा है आलोक नाथ, दुनिया को संस्कारी बनकर बेवकूफ बनाने वाला. अलोक नाथ अपने सीरियल की नायिका को लागातार छेड़ता है और उसके बचाव में आने वाली लेखिका और निर्माता विनिता नंदा को ड्रग्स देकर उसका बलात्कार करता है. यह आरोप खुद नंदा ने ही सोशल मीडिया के माध्यम से लगाएं हैं. आलोक नाथ पर आरोप लगाने वाली दूसरी महिला हैं संध्या मृदुल जो उसकी बेटी की उम्र की है. यह नायिका स्वाभिमान और कोशिश जैसे सीरियल में काम करने के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने भी आरोप लगाया है कि अलोक नाथ ने इनका शोषण करना शुरू कर दिया. बाद में माफ़ी भी मांगी. पर जब सब सुलझ गया तो मृदुल बारे में दुष्प्रचार करने लगा.  ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस सबसे मृदुल का करियर प्रभावित हुआ.

ये लोग इन लड़कियों के पिता के उम्र के थे और सामाजिक तौर पर ऐसे सक्षम थे कि इनसे यह उम्मीद बेमानी नहीं कि ये सुरक्षा प्रदान करते. औरों से. जैसे निर्भय काण्ड के अपराधियों से.

शायद यही वजह है कि मजबूत कानून होने के बाद भी भारत में महिलाओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. क्योंकि महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने वाले ही इनको असुरक्षित किये जा रहे हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो भी इसकी गवाही देता है. इसके 2014 में आए आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले कुल अपराध का 90 प्रतिशत उनलोगों के द्वारा किया जाता है जो उनके नजदीकी हैं. इसमें रिश्तेदार, मित्र, पड़ोसी और नौकरी देने वाला शामिल है. 2016 के आंकड़े के अनुसार महिलाओं के खिलाफ 33 लाख से अधिक अपराध हुए.

हाल ही में आये थॉमसन रायटर्स फाउंडेशन के सालाना सर्वेक्षण में कहा गया था कि भारत सेक्स सम्बंधित हिंसा में दुनिया का सबसे खराब देश है.

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