आधार: सबसे बड़ा अपराध भूख से मरने वाले का है बाकि के सब पाक साफ़ हैं

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पहरिया और अन्य समुदाय के लोगों को जमावड़ा जिनको आधार की वजह से सरकारी सुविधा नहीं मिल पा रही है. स्रोत- रिथिंक आधार

 सौतुक डेस्क/

झारखंड के गढ़वा ज़िले के डंडा प्रखंड में 1 दिसम्बर को 64 वर्षीय विधवा प्रेमनी कुंवर की भुखमरी और थकावट से मौत हो गयी. सितम्बर 2017 तक उन्हें उनकी वृद्धा पेंशन उनके भारतीय स्टेट बैंक की डंडा शाखा के खाते में मिल रही थी. इसके बाद, बिना उनकी जानकारी के, उनकी पेंशन राशि भारतीय स्टेट बैंक के पिप्राकला शाखा (डंडा से 22 किमी दूर) में शांति देवी के नाम से खुले खाते में जमा होने लगी. जबकि शांति देवी की मृत्यु 25 साल पहले ही हो गयी थी.

शांति देवी प्रेमनी कुंवर के पति स्वर्गीय मुटूर महतो की पहली पत्नी थीं.

मीडिया और भोजन के अधिकार अभियान (Right to Food Campaign) की पड़ताल के बाद UIDAI ने भी 8 दिसम्बर को इस मामले की जाँच की.

क्या है पूरा मामला?

इन दो जांच से स्पष्ट होता है की प्रेमनी कुंवर की सितम्बर और अक्टूबर 2017 की वृद्धा पेंशन शांति देवी के नाम से खुले बैंक खाते में गई थी. 10 अक्टूबर 2017 को प्रेमनी कुंवर का आधार शान्ति देवी के नाम से खुले खाते के साथ लिंक हो गया था. उधर प्रेमनी कुंवर को नवम्बर 2017 का राशन नहीं मिला था, जबकि उनका उस महीने के राशन के लिए डीलर द्वारा अंगूठे का निशान ले लिया गया था और उनके राशन कार्ड में नवम्बर 2017 के लिए 35 किलो अनाज की एंट्री भी हो गई थी. बिना राशन के प्रेमनी कुंवर के पास एक मात्र सहारा बचा था किसी से मांगकर गुजारा करना. उन्होंने प्रयास किये जिसके पर्याप्त सबूत आ चुके हैं. और भूख से उन्होंने दम तोड़ दिया.

अब है सरकारी जांच की बारी

दो दिन भी नहीं हुए जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने 22 से चल रहे खुद के ऊपर दंगा भड़काने का केस वापस ले लिया.

यह वही देश है जिसकी न्याय व्यवस्था कमजोर लोगों को अब भरोसा नहीं देती. 23 दिसम्बर 2017 को मीडिया में खबर छपी की स्थानीय पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है कि शांति देवी की पारिवारिक पेंशन लेने के लिए प्रेमनी कुंवर ने अपने सौतेले बेटे सुनील महतो के साथ मिलकर अपने आधार कार्ड में हेरा-फेरी की थी.

इस जांच के अनुसार पुलिस ने पाया कि शांति देवी के नाम से खुले बैंक खाते में कोल माइंस प्रोविडेंट फण्ड (Coal Mines Provident Fund) के अंतर्गत 849 रुपये की मासिक पेंशन राशि जमा होती थी. पिप्राकला शाखा के बैंक प्रबंधक द्वारा गढ़वा थाना इंस्पेक्टर को दी गयी रिपोर्ट के अनुसार शांति देवी के खाते का प्रयोग प्रेमनी कुंवर और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा किया जा रहा था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 6 नवम्बर 2017 को शांति देवी के नाम से खुले खाते से 30,000 रुपये की निकासी हुई थी. पुलिस ने सुनील महतो को इस निकासी के लिए 13 दिसम्बर को गिरफ्तार भी कर लिया.

उधर UIDAI की जांच में पाया गया की 23 सितम्बर 2015 को प्रेमनी कुंवर के आधार (आधार संख्या XXXXXXXX7606) में दिए गए नाम को “शांति देवी” में बदला गया था.

माने यह सारे इलज़ाम मरने वाले पर है और यह पूरी व्यवस्था निर्दोष है.

जांचकर्ताओं से कुछ प्रश्न?

  • UIDAI की रिपोर्ट में यह चर्चा नहीं हुई है कि नाम बदलने के बावज़ूद कैसे प्रेमनी कुंवर को उनके आधार से जुड़े पेंशन खाते (डंडा शाखा में) में सितम्बर 2017 तक पेंशन मिल रही थी.
  • इस पर भी कोई व्याख्या नहीं है कि कैसे 2007 में शांति देवी के नाम पर एक बैंक खाता खोला गया था, जबकि उनकी मृत्यु दो दशक पहले ही हो गयी थी. UIDAI जाँच दल के आने के ठीक एक दिन पहले शांति देवी के नाम से खोले गए खाते का KYC 7 दिसम्बर को बदला गया था.
  • यह इस खाते से हुई निकासी में बैंक कर्मियों की मिलीभगत की ओर भी इंगित करता है. SBI के पिप्राकला शाखा के प्रबंधक ने भोजन के अधिकार अभियान के तथ्यान्वेषण दल के साथ शांति देवी के नाम से खोले गए खाते के KYC दस्तावेज़ों को साझा करने से इंकार कर दिया.
  • UIDAI द्वारा इस बात की भी पुष्टि नहीं की गयी है कि दोनों, प्रेमनी कुंवर और शांति देवी के खाते एक ही आधार संख्या XXXXXXXX7606 से कैसे लिंक हो गए.

शांति देवी के बैंक खाते से फ़र्ज़ी निकासी करने के लिए पुलिस रिपोर्ट केवल सुनील महतो को ही ज़िम्मेवार मानती है. अगर इसमें सुनील महतो की भूमिका रही भी हो, तो भी वह यह निकासी निम्न लोगों के सहयोग के बिना नहीं कर पाते: (1) 2007 में शान्ति देवी के नाम से खाता खोलने के लिए ज़िम्मेवार बैंक कर्मी; (2) आधार में प्रेमनी कुंवर के नाम को शांति देवी करने के लिए ज़िम्मेवार लोग; (3) प्रेमनी कुंवर के आधार नंबर को शांति देवी के खाते से जोड़ने के लिए ज़िम्मेवार बैंक कर्मी और (4) शांति देवी के खाते के KYC को 7 दिसम्बर 2017 को अपडेट करने वाले बैंक कर्मी.

सरकार के प्राथमिकता वाले इस आधार से जुड़ें हैं ढेरों सवाल

हाल ही में इस बात का खुलासा हुआ था कि एयरटेल मोबाइल सेवा प्रयोग करने वाले ग्राहकों की सहमति के बिना ही उनका एयरटेल पेमेंट बैंक खाता खोल दिया गया. 2016 में पूर्वी सिंगभूम के बोराम प्रखंड में ICICI बैंक द्वारा 6,000 नरेगा मज़दूरों का आधार-लिंक्ड बैंक खाता बिना उनकी जानकारी के खोला गया था. लातेहार के महुआडाँर प्रखंड में हुई जांच में पता चला  कि किस प्रकार ऐसे फ़र्ज़ी बैंक खाते खोल कर नरेगा मज़दूरी का गबन होता है. कुछ दिनों पहले एक सांसद भी फ़र्ज़ी निकासी के शिकार बन गये जब उनके मोबाइल पर भेजे गए OTP को इस्तेमाल कर के आधार के माध्यम से पैसों की ऑनलाइन निकासी कर ली गयी.

यह हादसा दर्शाता है कि कैसे आधार जैसी जटिल व्यवस्थाओं के कारण हाशिये पर रहने वाले लोगों को जीवनरेखा समान मूलभूत सुविधाएं प्राप्त करने में रोज़ाना अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है. प्रेमनी कुंवर के बेटे, उत्तम महतो ने स्पष्ट रूप से लिखित एवं विडियो गवाही दी है कि उसकी माँ की मृत्यु भुखमरी के कारण हुई है. हालाँकि, डंडा के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उत्तम महतो ने गवाही दी है कि उसकी माँ की मृत्यु बीमारी के कारण हुई है. यह इस बात को इंगित करता है कि स्थानीय प्रशासन प्रेमनी कुंवर की मौत के असली कारण को छुपाने की कोशिश कर रहा है.

साथ ही, जिन स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भुखमरी के कारण प्रेमनी कुंवर की  हुई मौत को उजागर किया था, प्रशासन ने उनके विरुद्ध ही प्राथमिकी दर्ज कर दी है. प्रशासन ने कालीचरण महतो, सुषमा महतो और डंडा के प्रमुख बिरेन्द्र चौधरी के विरुद्ध सरकारी जांच में बाधा डालने और सरकारी जांच दल को भयभीत करने के आरोप पर प्राथमिकी दर्ज कर दी. इतना ही नहीं, प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि इन लोगों ने जांच दल के दस्तावेज़ फाड़ दिए थे जिसे प्रतिवादियों ने नकारा है.

यही है वर्तमान का न्याय. एक तरफ एक मुख्यमंत्री अपने द्वारा अपने खिलाफ हुए एफआईआर वापस लेता है तो दूसरी तरफ भूख से मरने वाले को अपराधी करार दिया जाता है. उसके हिस्से की लड़ाई लड़ने वाले पर एफआईआर दर्ज होता है.

(यह लेख राईट टू फ़ूड कैंपेन की रिपोर्ट पर आधारित है) 

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