बहुत हुआ नारी पर वार-छात्राओं की तो सुन लो सरकार

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उमंग कुमार/

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) की छात्राएं आन्दोलन कर रही हैं. देश के प्रधानमंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री दोनों शहर में ही हैं. मामला बस इतना है कि ये छात्राएं अब विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षित नहीं महसूस कर रही हैं और उन्होंने विश्वविद्यालय से कुछ ज़रूरी कदम उठाने की मांग की है. अभी तक विश्वविद्यालय के कुलपति ने छात्राओं से मिलने की जहमत नहीं उठाई है. प्रधानमन्त्री जो महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को अपने चुनावी कैंपेन का हिस्सा बनाए थे, काशी में होते हुए भी इस पर चुप्पी साढ़े हुए हैं.

आपको जानकार हैरानी होगी कि इन छात्राओं की मांग वही है जो इनकी सुरक्षा के मद्देनजर देश का एक सामान्य आदमी भी सुझाएगा. देखिये उनकी मांगे क्या है और जरा सोचिये कि इन छोटी माँगों को लेकर भी इन लड़कियों को आन्दोलन करना पड़ रहा है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव कैंपेन का एक मशहूर पोस्टर

आन्दोलन की शुरुआत शुक्रवार को हुई जब एक लड़की के साथ कुछ लड़को ने छेड़छाड़ की. घटना बृहस्पतिवार को साढ़े छः बजे शाम के करीब हुआ जब वह छात्रा हॉस्टल लौट रही थी. पीछे से कुछ लड़के मोटरसाइकिल पर आये, छेड़खानी की, और भाग गए. चूँकि अधेरा हो चुका था, इसलिए सड़क थोड़ी सुनसान थी. बैचलर ऑफ़ फाइन आर्ट्स (BFA) की पीड़ित छात्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि उसने चिल्लाकर कुछ ही दूर पर खड़े सुरक्षाकर्मियों को आवाज लगाई पर वे लोग इसको बचाने के लिए आगे नहीं आये. हॉस्टल लौटने के बाद पीड़ित लड़की कुछ अन्य साथियों के साथ गार्ड से शिकायत करने पहुंची तो वह उल्टे इस लड़की को ही शिक्षा देने लगा.

ऐसे में लड़कियां विश्वविद्यालय प्रशासन से अगर अपनी सुरक्षा को लेकर कुछ जरुरी इंतजाम जैसे सड़कों पर रोशनी की व्यवस्था करने की मांग कर रही हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन इन माँगों के प्रति इतना निष्ठुर क्यों बना हुआ है. इस बाबत उन्होंने चीफ प्रॉक्टर को पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने ने अपनी सारी मांगें रखी  हैं.

सनद रहे कि देश में और राज्य में अभी उसी दल की सरकार है जिसने महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर वोट माँगा था. एक तरफ यह और दूसरी तरफ इस विश्वविद्यालय की प्रशासन व्यवस्था लागातार कमजोर होती जा रही है. देखिये कुछ बानगी:

2012– BHU के इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस के डीन ने एक जूनियर डॉक्टर को अपने घर बुलाया और उसके साथ जोर-ज़बरदस्ती की.

छात्राओं की मांग- तस्वीर द वायर से साभार

छात्रो ने हंगामा किया तब जाकर प्रशासन की नींद खुली और आरोपी को निलंबित किया गया.

2015– एक प्रवासी भारतीय डॉक्टर जिसके पास अमेरिका की नागरिकता थी, को इस तरह के हादसे का शिकार होना पड़ा. पांच लोगों ने 22 अप्रैल को बीएचयू कैंपस में उस महिला के साथ छेड़खानी की. वो महिला आयुर्वेद से पीएचडी कर रही थी.

2016–  महिला महाविद्यालय (MMV) की 11 छात्राओं ने नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) के एक अधिकारी पर सेक्सुअली परेशान करने का आरोप लगाया. इन लड़कियों ने युवा एवं खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया. यह अधिकारी ने इन छात्राओं को विदेश भेजने का झांसा दे रहा था और बदले में खुद को खुश करने की मांग कर रहा था.

 2016– इसी साल अगस्त 24 को एक 19 साल के छात्र का कुछ लोगों ने बलात्कार कर दिया. यह लड़का सर सुन्दर लाल अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट से अपनी बहन की कोई रिपोर्ट लाने जा रहा था जब कुछ लोगों ने उसके साथ ज्यादती की. उस लड़के के बहन बीमार थी.

और अब यह नई घटना. इन सबको देखते हुए देश का हर नागरिक चाहेगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सुरक्षा के पुख्ता  इंतजाम करे, सीसीटीवी कैमरा लगाये. आखिर विश्वविद्यालय प्रशासन के पास ऐसी क्या मजबूरी है कि वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं और छात्राओं को इन मूलभूत सुविधाओं कि मांग को लेकर भी सड़क पर उतरना पड़ रहा है.

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